8 बुलेट सहित 16 लाख की 17 मोटरसाइकिलें जब्त भोपाल से ललितपुर तक फैला था नेटवर्क!

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इंदौर महंगे शौक और अय्याशी की जिंदगी जीने के लिए दूसरों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले एक शातिर अंतर-जिला वाहन चोर गिरोह की रीढ़ तोड़ने में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इंदौर की बाणगंगा थाना पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर घेराबंदी करते हुए इस गिरोह का भंडाफोड़ किया है और तीन शातिर बदमाशों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पुलिस ने इनके पास से करीब 16 लाख रुपए कीमत की 17 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की हैं, जिसमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 8 चमचमाती और कीमती बुलेट मोटरसाइकिलें शामिल हैं।

पुलिस की विशेष टीम ने बिछाया जाल, तीन सगे और चचेरे भाई चढ़े खाकी के हत्थे

इस पूरे ऑपरेशन को एडिशनल डीसीपी राम स्नेही मिश्रा और बाणगंगा थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर के नेतृत्व में गठित एक विशेष टीम ने अंजाम दिया। पुलिस के चंगुल में फंसे आरोपियों की पहचान पंकज लोधी, शिवेंद्र लोधी और बृजेंद्र लोधी के रूप में हुई है। पुलिस की कड़ाई से की गई पूछताछ में मुख्य आरोपी पंकज लोधी ने उगला कि वह मूल रूप से ललितपुर का रहने वाला है और इंदौर के गोरी नगर इलाके में छिपकर रह रहा था। यहीं से वह अपने साथियों के साथ मिलकर पूरे शहर और आसपास के जिलों में वाहन चोरी की वारदातों को ऑपरेट कर रहा था।

सुनसान इलाकों में रैकी, फिर चेचिस नंबर मिटाकर औने-पौने दामों में बेचने का खेल

पूछताछ में आरोपियों ने अपनी जो कार्यप्रणाली बताई है, वह बेहद शातिराना है। ये बदमाश पहले पॉश और सुनसान इलाकों में खड़ी कीमती गाड़ियों की रैकी करते थे और पलक झपकते ही मास्टर चाबी का इस्तेमाल कर गाड़ी उड़ा देते थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी तुरंत गाड़ियों की नंबर प्लेट बदल देते थे, उन्हें मॉडिफाई (रूप परिवर्तन) कर देते थे और पकड़े जाने के डर से कई गाड़ियों के चेचिस नंबर तक घिसकर मिटा देते थे। इसके बाद इन गाड़ियों को सीधे-साधे लोगों को कम दामों में बेचकर रफूचक्कर हो जाते थे।

भोपाल के शाहपुरा से जुड़े तार, राजधानी की पुलिस को भी थी इन बदमाशों की तलाश

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब जब्त की गई गाड़ियों की बारीकी से जांच की गई। पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि बरामद की गई 17 मोटरसाइकिलों में से 8 कीमती बाइक सीधे भोपाल के शाहपुरा थाना क्षेत्र से चुराई गई थीं। इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं था, बल्कि राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी इनके गुर्गे सक्रिय हैं जो लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

चेचिस नंबरों के जरिए असली मालिकों की खोज जारी, गिरोह के मददगारों पर भी कसेगा शिकंजा

फिलहाल बाणगंगा थाना पुलिस पकड़े गए तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है। जिन वाहनों के चेचिस नंबर मिटा दिए गए हैं, उन्हें फॉरेंसिक और तकनीकी टीम की मदद से रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उनके असली मालिकों का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि इस मामले में अभी कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है और जो लोग इन चोरों से सस्ती गाड़ियां खरीदते थे या इन्हें पनाह देते थे, उन्हें भी सह-आरोपी बनाकर जेल भेजा जाएगा।