छात्रवृत्ति रोकी तो सड़कों पर उतरा आक्रोश

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आदिपुर में ABVP का गरजा मोर्चा, अनवरत देरी और तकनीकी धांधली से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में, डिप्टी कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन!

विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-आदिपुर)। गुजरात के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे हजारों गरीब, पिछड़ा वर्ग और मेधावी छात्रों के हक पर डाका डालने वाली प्रशासनिक नाकामी के खिलाफ अब छात्र शक्ति का जन-आक्रोश सड़कों पर उबाल मार रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने आदिपुर के व्यस्ततम कॉलेज सर्कल पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन करते हुए शासन और प्रशासन की कुंभकर्णी नींद उड़ा दी। सरकार की ढुलमुल कार्यशैली और अधिकारियों की लापरवाही की वजह से अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति, एसईबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के असहाय छात्रों की एमवाईएसवाई और सीएमएसएस जैसी महत्वपूर्ण छात्रवृत्तियां महीनों से अटकी पड़ी हैं।

तकनीकी गड़बड़ियों का बहाना, पिस रहा गरीब छात्र
सरकार एक तरफ जहां डिजिटलाइजेशन और पारदर्शी प्रणाली का ढिंढोरा पीटती नहीं थकती, वहीं धरातल पर direct benefit transfer (DBT), बैंक सत्यापन और पोर्टल से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों के नाम पर छात्रों को महीनों से केवल दफ्तरों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। फीस भरने और पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए छात्रवृत्ति पर निर्भर हजारों छात्र आज मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं। कॉलेज सर्कल पर हुए इस उग्र प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया कि यदि जल्द ही छात्रों के खातों में राशि जमा नहीं की गई, तो यह आंदोलन और अधिक विकराल रूप धारण करेगा।

डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन, अधिकारियों को अंतिम चेतावनी
छात्रों की इस न्यायसंगत लड़ाई का नेतृत्व करते हुए एबीवीपी पूर्वी कच्छ जिला समन्वयक सुनील अहीर और उनकी टीम ने अंजार के उप-जिलाधिकारी (डिप्टी कलेक्टर) को एक तीखा और सख्त ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि सभी प्रकार के पेंडिंग आवेदनों का निस्तारण करके अटकी हुई छात्रवृत्ति की राशि तुरंत प्रभाव से छात्रों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाए।

अवंतिका के युवराज यह सीधा और तीखा सवाल पूछता है कि जब चुनाव और राजनीतिक आयोजनों के नाम पर सरकारी तंत्र दिन-रात एक कर सकता है, तो फिर गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों का हक देने में यह हीला-हवाली क्यों? क्या वातानुकूलित कमरों में बैठे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इन छात्रों का दर्द नजर नहीं आता? यदि इस विरोध प्रदर्शन के बाद भी अटकी राशि छात्रों को नहीं मिली, तो अवंतिका के युवराज इस प्रशासनिक लापरवाही की परतें खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।