अवंतिका के युवराज के खुलासे से प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप

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अस्पताल में दिल्ली के जंतर-मंतर जैसी महा-क्रांति के खौफ में आए जिम्मेदार, चंद घंटों की भूख हड़ताल में ही कंपनी व भ्रष्ट आकाओं के उड़े होश, रातों-रात पंकज सर्वा व अक्षय रिंगे की ‘घर वापसी’ का फरमान जारी

विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/इंदौर)। इंदौर के नंदा नगर स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) मॉडल अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक तानाशाही, सफेद झूठ और अवैध वसूली के सिंडिकेट के खिलाफ ‘अवंतिका के युवराज’ समाचार पत्र में प्रकाशित तीखी और खोजी रिपोर्ट का ऐसा भयंकर प्रहार हुआ है कि जिम्मेदार अधिकारियों और आउटसोर्स कंपनी (लायल्टेक) के पूरे सिंडिकेट की नींद उड़ गई। समाचार पत्र में अधिकारियों के झूठ का पर्दाफाश करते आधिकारिक पत्रों और लिखित दस्तावेजों के सार्वजनिक होते ही प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई।

बुधवार की सुबह 7:30 बजे जैसे ही निष्कासित कर्मचारियों पंकज सर्वा और अक्षय रिंगे के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू हुई, तो जिम्मेदार आकाओं के पसीने छूट गए। अधिकारियों को साफ डर सताने लगा कि इंदौर का यह ईएसआई अस्पताल कहीं दिल्ली के जंतर-मंतर का मैदान न बन जाए, क्योंकि आज देश का जागरूक युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जुट होकर बोलना सीख चुका है। इसी खौफ का नतीजा रहा कि महज 6 घंटे के भीतर (सुबह 7:30 से दोपहर 1:30 बजे के बीच) ही कंपनी और अस्पताल प्रबंधन को घुटने टेकने पड़े और दोनों कर्मचारियों की सहसम्मान ‘घर वापसी’ का फरमान जारी करना पड़ा।

अस्पताल परिसर में लंबे समय से फल-फूल रही अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाने वाले 9 वर्षों से सेवारत निष्ठावान आउटसोर्स नर्सिंग अर्दली पंकज सर्वा और अक्षय रिंगे को षड्यंत्र के तहत नौकरी से बेदखल कर दिया गया था। इसके विरोध में जैसे ही बुधवार सुबह सत्याग्रह और भूख हड़ताल की शुरुआत हुई और अवंतिका के युवराज ने अस्पताल के पत्र क्रमांक 254 समेत कंपनी द्वारा जारी निष्कासन पत्रों को अखबार के पन्नों पर उजागर किया, तो प्रशासनिक गलियारे की चूलें हिल गईं। अखबार में छपे आधिकारिक लिखित प्रमाणों ने डीन, निदेशक मोहम्मद रुबानी और उप निदेशक पुलकित जैन के उस सफेद झूठ की पूरी तरह से धज्जियां उड़ा दीं, जिसमें वे कार्रवाई से पल्ला झाड़ रहे थे।

अखबार के पन्नों पर सच उजागर होते ही और सुबह से ही युवाओं के एकजुट होते आक्रोश को देख अधिकारी अपनी ही कही बातों से पलटी मारते नजर आए। शुरुआत में तो जिम्मेदार पल्ला झाड़ते रहे और गोलमोल जवाब देते रहे, लेकिन जब अखबार में प्रकाशित पक्के सबूत सामने रखे गए तो उप निदेशक पुलकित जैन ने इंचार्ज की शिकायत का नया बहाना बनाया, जिसका पर्दाफाश भी ऑन-द-स्पॉट हो गया। जब अधिकारियों की हर कूटनीतिक चाल विफल हो गई, तो कर्मचारियों को बहलाने और अलग-अलग करने के लुभावने प्रस्ताव दिए गए। लेकिन जागरूक युवाओं की अटूट एकजुटता और आर-पार के मूड को देखकर प्रशासन का ‘फूट डालो और राज करो’ का पैंतरा पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ।

चारों तरफ से फजीहत होते देख और अस्पताल में जंतर-मंतर जैसा बड़ा जन-आंदोलन खड़ा होने के डर से आखिरकार निदेशक मोहम्मद रुबानी, उप निदेशक पुलकित जैन और कंपनी प्रबंधन को दोपहर 1:30 बजे से पहले ही पूरी तरह नतमस्तक होना पड़ा। प्रशासन ने तुरंत लिखित रूप से कर्मचारियों का पत्र स्वीकार किया और दोनों कर्मचारियों पंकज सर्वा एवं अक्षय रिंगे को सहसम्मान पुनः नौकरी पर वापस लेने का निर्णय सुनाया। इसके साथ ही प्रशासन ने यह आधिकारिक और सार्वजनिक आश्वासन भी दिया कि पूर्व में किचन कांड के नाम पर रची गई दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई को पूरी तरह समाप्त माना जाएगा, हड़ताल में शामिल किसी भी कर्मचारी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और दोनों कर्मचारी पूर्व की भांति अस्पताल में अपनी सेवाएं निरंतर देंगे।

अस्पताल प्रशासन द्वारा घुटने टेककर बात मानने के बाद बुधवार दोपहर में भूख हड़ताल समाप्त कराई गई और 4:00 बजे के बाद दोनों कर्मचारियों को अस्पताल परिसर में आने-जाने व कार्य करने की आधिकारिक अनुमति दे दी गई। ‘अवंतिका के युवराज’ के इस खुलासे और युवाओं के आक्रोश ने यह साबित कर दिया है कि जब जागरूक युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होते हैं, तो भ्रष्ट आकाओं को झुकना ही पड़ता है। परंतु अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनी और अस्पताल का यह सिंडिकेट इन कर्मचारियों को स्वतंत्रता से कार्य करने देगा या फिर अंदरखाने उनके शोषण का कोई नया पैंतरा रचेगा। यदि भविष्य में इन कर्मचारियों के स्वाभिमान या सुरक्षा पर दोबारा आंच आई, तो अवंतिका के युवराज इस भ्रष्ट सिंडिकेट के खिलाफ और भी तीखा मोर्चा खोलेगा।