लोहे की धारिया धोके और कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला
कानून-व्यवस्था और पुलिस की सुस्ती
विशेष खोजी व अपराध रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। गुजरात के प्रमुख औद्योगिक शहर गांधीधाम के अंतर्गत आने वाले किडाना गांव में जो रक्त-रंजित और दहला देने वाला खूनी मंजर देखने को मिला है, उसने एक बार फिर कानून-व्यवस्था, स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के इकबाल की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। एक तरफ पुलिस शहर में शांति, सुरक्षा और गश्त का ढोल पीटती है, वहीं दूसरी तरफ दिन-दहाड़े और खुलेआम सड़कों पर ऐसी बर्बर व जानलेवा घटनाएं घट रही हैं, जो यह साबित करने के लिए काफी हैं कि अपराधियों के दिल से पुलिस और कानून का खौफ पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
सामने आए सीसीटीवी फुटेज और घटनाक्रम के अनुसार, मोटापीर चौक के पास स्थित एक चाय की होटल के बाहर कार में सवार होकर आए बदमाशों ने किसी बात के विवाद को लेकर जिस अमानवीय और खौफनाक तरीके से आतंक मचाया, उससे पूरा इलाका थर्रा उठा है। लोहे की धारिया, धोके और कुल्हाड़ी जैसे घातक हथियारों से लैस इन गुंडों ने बेदर्दी से जानलेवा हमला बोल दिया। इस खूनी हमले में इरफान सोढ़ा के सिर और दोनों हाथों पर इतनी गंभीर चोटें आईं कि उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाना पड़ा, जहां सिर पर 10 टांके लगाने पड़े। इस भीषण झड़प में तौसिफ और उस्मान भी खून से लथपथ होकर बुरी तरह से घायल हो गए। सभी घायलों को गंभीर हालत में इलाज के लिए आदिपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
फरियादी इरफान की शिकायत के आधार पर पुलिस ने साहिल चावडा, कासम चावडा, हुसेन चावडा, इशाक चावडा और एक अज्ञात शख्स के खिलाफ मामला दर्ज कर कागजी कार्रवाई की रस्म अदायगी तो शुरू कर दी है, लेकिन सबसे तीखा और सुलगता सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी हिंसक घटनाएं बेखौफ होकर अंजाम कैसे दी जा रही हैं? क्या गांधीधाम और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में पुलिस का गश्ती अमला और लोकल इंटेलिजेंस पूरी तरह पंगु हो चुका है? खुलेआम धारिया, कुल्हाड़ी और लोहे के पाइप लेकर सड़कों पर नंगा नाच करने वाले इन असमाजिक तत्वों को पकड़ने के लिए क्या पुलिस को किसी की मौत या बड़े नरसंहार का इंतजार रहता है?
जब तक ऐसी आपराधिक मानसिकता और खुलेआम गुंडागर्दी करने वालों के खिलाफ कड़ी और नजीर बनने वाली कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आम नागरिकों का सुरक्षित जीना पूरी तरह दूभर रहेगा। अवंतिका के युवराज समाचार पत्र के समस्त पाठ को की पुलिस प्रशासन को यह साफ और दो टूक चेतावनी है कि दफ्तरों में बैठकर लकीर पीटने के बजाय धरातल पर उतरकर इन दंगाइयों और अपराधियों पर ऐसा कानूनी चाबुक चलाया जाए कि भविष्य में सड़कों पर हथियार लहराने की किसी की हिम्मत न हो सके!










