विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। गुजरात की प्रमुख औद्योगिक नगरी गांधीधाम में इन दिनों प्रशासनिक संवेदनहीनता, लापरवाही और राजनीतिक ढोंग का ऐसा शर्मनाक नज़ारा देखने को मिल रहा है, जिसने तथाकथित गौरक्षकों और खोखले दावे करने वाले प्रशासनिक आकाओं की पोल खोलकर रख दी है। एक तरफ जहां मंचों पर खड़े होकर आस्था, धर्म और गोमाता की रक्षा के लंबे-चौड़े भाषण झाड़े जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ गांधीधाम की सड़कों पर वही बेजुबान गोमाता और मवेशी भूखे-प्यासे, लावारिस हालत में दर-दर की ठोकरें खाने और अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं।

शहर के सतवारा सेक्टर 5, गायत्री स्वीट्स के आसपास के मुख्य मार्गों पर देर रात दर्जनों आवारा और बेसहारा मवेशी (गाय और बैल) बीच सड़क पर झुंड बनाकर बैठे और बेखौफ घूमते नज़र आते हैं। यह कोई एकाध मवेशी की बात नहीं है, बल्कि पूरा का पूरा मुख्य रास्ता ही इन बेजुबानों का रैनबसेरा बना हुआ है। रात के घने अंधेरे में सड़क के ठीक बीचों-बीच बैठे ये मवेशी न केवल खुद मौत के साये में जीने को विवश हैं, बल्कि सड़कों से गुजरने वाले राहगीरों, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए भी सीधी मौत का सबब बने हुए हैं। तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर आए दिन ये बेजुबान गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं और अकाल मौत का शिकार बन रहे हैं।

सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि यदि नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन के लिए गोमाता वाकई पूजनीय हैं, तो वे सड़कों पर पन्नी-कचरा खाने और गाड़ियों से कटकर मरने को क्यों छोड़ दी गई हैं? क्या स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका का काम केवल आम नागरिकों की जेब से भारी-भरकम टैक्स वसूलना और चालान के नाम पर रसीदें काटना रह गया है? सतवारा सेक्टर 5 की यह बेहद खौफनाक तस्वीर चीख-चीखकर सवाल पूछ रही है कि मवेशी नियंत्रण दस्ता और ढोर-डब्बा (कैटल ट्रैपिंग) पार्टी आखिर किस बिल में जाकर छिपी बैठी है?

गौशालाओं, शेल्टर होम और बेसहारा मवेशियों के रख-रखाव के नाम पर आने वाला लाखों-करोड़ों का सरकारी बजट आखिर किसकी काली जेबों में समा रहा है? क्या गांधीधाम का बेपरवाह प्रशासन किसी बड़े, दर्दनाक और खूनी सड़क हादसे का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही उसकी नींद टूटेगी? स्थानीय निवासियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है, जो लगातार यह मांग कर रहे हैं कि कागजी दावों का नाटक बंद करके तुरंत इन बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित गौशालाओं में भिजवाया जाए।
अवंतिका के युवराज गांधीधाम नगर पालिका प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को स्पष्ट और दो टूक शब्दों में चेतावनी देता है कि धार्मिक भावनाओं और गौरक्षा के नाम पर यह नौटंकी अब और नहीं चलेगी। यदि जल्द ही सड़कों से इन बेसहारा मवेशियों को हटाकर सुरक्षित व्यवस्था नहीं की गई और हादसों पर रोक नहीं लगी, तो जनता के इस आक्रोश की आग में भ्रष्ट अफसरों की मलाईदार कुर्सियां जलकर खाक हो जाएंगी!










