निष्पक्ष जंग लड़ने वाले आउटसोर्स कर्मी पर अन्याय की गाज, पंकज सर्वा बैठेगे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर, जान जाने पर डीन और प्रशासन होंगे सीधे जिम्मेदार

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ESIC अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज इंदौर में भ्रष्टाचार और साजिश की पराकाष्ठा

विशेष रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/इंदौर)। इंदौर के नंदा नगर स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक राजनीति, भ्रष्टाचार और तानाशाही का एक ऐसा खतरनाक और घिनौना खेल उजागर हुआ है, जिसने पूरे चिकित्सा और प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अस्पताल में लंबे समय से फल-फूल रही अवैध वसूली और भ्रष्ट गतिविधियों के खिलाफ निर्भीक होकर आवाज उठाने वाले आउटसोर्स कर्मचारी (लायल्टेक कंपनी) पंकज सर्वा को साजिशन झूठे इल्जामों में फंसाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अस्पताल प्रशासन के इस एकतरफा, द्वेषपूर्ण और अन्यायपूर्ण फैसले के विरोध में पीड़ित कर्मचारी ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंकते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का कहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़े और तीखे सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल के निदेशक मोहम्मद रुबानी और उप निदेशक पुलकित जैन द्वारा की गई शुरुआती जांच में पंकज सर्वा को पूरी तरह से निर्दोष पाया गया था। इतना ही नहीं, निदेशक एवं उप निदेशक ने अपनी आधिकारिक विभागीय रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट रूप से अंकित कर दिया था कि संबंधित कर्मचारी का इसमें कोई दोष नहीं है। इसके अलावा उप निदेशक पुलकित जैन द्वारा लक्ष्मी नारायण पाठक के समक्ष यह भरोसा भी दिलाया गया था कि पूरा मामला समाप्त हो चुका है और इस विषय में कर्मचारी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बावजूद नए डीन के पदभार संभालते ही बिना किसी निष्पक्ष जांच के, बिना आरोपी का पक्ष सुने और तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए द्वेष भावना से ग्रसित होकर कर्मचारी को अस्पताल परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया।

प्रशासनिक तानाशाही का आलम तो यह है कि पीड़ित कर्मचारी की निजी फोटो और गोपनीय जानकारियां तक चुरा ली गईं और फिर उनका दुरुपयोग करके उसी के खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया। किसी भी नागरिक या कर्मचारी की निजता का इस प्रकार सरेआम हनन करना न केवल नैतिक रूप से अपराध है, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक मर्यादाओं की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है। पीड़ित पंकज सर्वा स्वयं एक बीमित व्यक्ति (IP) भी हैं, जिसके नाते उन्हें अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने का विधिक अधिकार है। इसके बावजूद उन्हें अस्पताल परिसर में आने से रोका जा रहा है, जो उनके मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है। यदि इस दौरान उन्हें या उनके स्वास्थ्य को किसी भी प्रकार की आपातकालीन चिकित्सीय आवश्यकता पड़ती है और उनका कोई अहित होता है, तो इसकी सीधी और पूर्ण रूप से कानूनी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन तथा डीन की होगी।

इस पूरी साजिश की परतें खोलते हुए यह कड़वी सच्चाई सामने आई है कि कुछ समय पूर्व नर्सिंग अर्दली स्टाफ के ड्यूटी समय में बदलाव किया गया था। इसी बात का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से प्रशासनिक राजनीति का सहारा लेकर षड्यंत्र की पटकथा लिखी गई। पीड़ित कर्मचारी को जबरन सेवा से पृथक करवाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए सेवा प्रदाता कंपनी को झूठी शिकायतें और भ्रामक मेल भेजे गए, जो कि एक स्वच्छ, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रशासनिक वातावरण के सर्वथा विरुद्ध है। जहां तक झूठे आरोपों का सवाल है, पीड़ित के पास इस बात के ठोस और अकाट्य प्रमाण मौजूद हैं कि वह नवीन आर्य के स्पष्ट बुलावे पर ही किचन परिसर में गए थे, जिसकी पुष्टि स्वयं नवीन आर्य भी कई बार कर चुके हैं। सच और सबूत होने के बावजूद, अस्पताल के भीतर अवैध वसूली करने वाले सिंडिकेट को संरक्षण देने के लिए एक बेकसूर और निष्ठावान कर्मचारी की बलि चढ़ाई जा रही है। लगातार हो रहे इस मानसिक उत्पीड़न के कारण पीड़ित की मानसिक स्थिति अत्यंत विकट दौर से गुजर रही है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखने वाले पंकज सर्वा ने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त करते हुए साफ कर दिया है कि यदि इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान उनकी जान जाती है, तो इसके सीधे जिम्मेदार डीन महोदय, निदेशक मोहम्मद रुबानी और उप निदेशक पुलकित जैन होंगे तथा उनके खिलाफ वही कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए जो एक भ्रष्टाचार के आरोपी पर होती है। अवंतिका के युवराज समाचार पत्र इस भ्रष्ट तंत्र से सीधे सवाल पूछता है कि जब विभागीय निदेशक और उप निदेशक की जांच रिपोर्ट में कर्मचारी पूरी तरह निर्दोष पाया गया था, तो नए डीन ने किस दबाव या षड्यंत्र के तहत यह तानाशाही आदेश जारी किया। अस्पताल परिसर में फल-फूल रही अवैध वसूली पर पर्दा डालने के लिए सच बोलने वाले कर्मचारियों की आवाज को दबाने का यह काला खेल आखिर कब तक चलेगा। यदि इस सत्याग्रह में पीड़ित को कोई भी शारीरिक नुकसान पहुंचता है, तो भ्रष्टाचार के आकाओं को बख्शा नहीं जाएगा।