उज्जैन। उज्जैन शहर में दो ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सुरक्षा तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई इन दोनों घटनाओं में जहां एक ओर एक युवक गंभीर रूप से झुलसी हुई अवस्था में सुबह-सुबह खुद पुलिस थाने पहुंचा, वहीं दूसरी ओर एक बंद मकान में आठ वर्षों से बिस्तर पर पड़े लकवाग्रस्त बुजुर्ग जिंदा जलने से बाल-बाल बचे। इन दोनों ही मामलों में स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाया और विधिक जांच शुरू कर दी है।
थाने पहुंचा तेजाब हमले का पीड़ित,सात नामजद आरोपियों पर झुलसाने और लूट का संगीन आरोप, पुलिस खंगाल रही सच
पहली घटना महाकाल थाना क्षेत्र की है, जहां शनिवार की सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब योगीपुरा का रहने वाला एक युवक सतीश (32 वर्ष), पिता धनीराम, बेहद झुलसी और तड़पती हुई हालत में सीधे थाने के भीतर दाखिल हुआ। युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस ने बिना एक पल गंवाए उसे तत्काल जिला अस्पताल के चरक भवन (बर्न वार्ड) में भर्ती कराया और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में उसके बयान दर्ज किए। मूल रूप से आगरा के रहने वाले और वर्तमान में उज्जैन में फूल-प्रसाद बेचकर गुजर-बसर करने वाले पीड़ित सतीश ने पुलिस को दिए बयानों में एक महिला समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों पर रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए हैं।
सतीश का आरोप है कि शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे जब वह गौंड बस्ती इलाके में था, तब वहां मौजूद सपना, मोनू, गबलू, कृष्णा, नवीन, करण और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति ने उस पर अचानक तेजाब (एसिड) से जानलेवा हमला कर दिया। पीड़ित के अनुसार, आरोपी न केवल उसे जिंदा जलाने की कोशिश कर रहे थे, बल्कि वे उसके पास रखे 30 हजार रुपये नकद भी जबरन छीनकर रफूचक्कर हो गए। इस गंभीर शिकायत के बाद महाकाल थाना प्रभारी (टीआई) गगन बादल के निर्देशन में पुलिस टीम तुरंत घटनास्थल यानी गौंड बस्ती पहुंची और तफ्तीश शुरू की। हालांकि, प्राथमिक तौर पर वहां के स्थानीय रहवासियों ने रात के समय ऐसी किसी भी घटना की जानकारी होने से इनकार किया है, जिससे मामला पेचीदा हो गया है।
जांच के दायरे में पारिवारिक विवाद और रात भर का घटनाक्रम, हर पहलू पर गहन अनुसंधान
इस संवेदनशील मामले में न्यायशास्त्र और आपराधिक अनुसंधान के सिद्धांतों के तहत पुलिस बहुत ही फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार, पीड़ित सतीश के बयानों में कई ऐसे बिंदु हैं जिनकी गहनता से पुष्टि की जानी अनिवार्य है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात भी प्रकाश में आई है कि सतीश का उसकी पत्नी के साथ काफी समय से गंभीर पारिवारिक विवाद चल रहा है।
कानूनविदों और न्यायालयीन दृष्टि से ऐसे मामलों में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं होता, इसलिए पुलिस वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जुटाने में लगी है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि यदि हमला रात 1 बजे हुआ था, तो पीड़ित सुबह तक कहां था और उसके शरीर पर मौजूद झुलसने के निशान किस केमिकल के हैं। पुलिस का कहना है कि मामला पूरी तरह संदिग्ध है, और जब तक आरोपियों की संलिप्तता के पुख्ता विधिक साक्ष्य नहीं मिल जाते, तब तक निष्पक्ष जांच जारी रहेगी।
ताले में बंद घर में भड़की आग 40 प्रतिशत झुलसे बेबस बुजुर्ग, पड़ोसियों की सजगता ने बचाई जान
दूसरी मर्मस्पर्शी और दर्दनाक घटना चिमनगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तिरुपतिधाम कानीपुरा रोड की है, जहां शुक्रवार की दोपहर एक बेबस और लाचार बुजुर्ग प्रशासनिक और सामाजिक सुरक्षा के बीच एक बड़े हादसे का शिकार हो गए। 65 वर्षीय रामचंद्र, पिता उमराव सोलंकी, जो पिछले 8 वर्षों से पक्षाघात (लकवा) से पीड़ित हैं और पूरी तरह से मूक-बधिर व बिस्तर पर आश्रित हैं, अपने ही घर में लगी आग में 40 प्रतिशत तक झुलसे गए।
घटना के समय उनकी पत्नी शांताबाई घर का दरवाजा बाहर से बंद करके बाजार से कुछ जरूरी सामान लेने गई थीं। इसी बीच अचानक घर के भीतर बिस्तर ने आग पकड़ ली। जब पड़ोसियों ने बंद मकान की खिड़कियों और दरवाजों से काला धुआं निकलते देखा, तो उनके होश उड़ गए। पड़ोसियों ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए शांताबाई को सूचित किया और आनन-फानन में ताला खोलकर भीतर प्रवेश किया। अंदर का दृश्य देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया; लकवाग्रस्त बुजुर्ग आग की लपटों से घिरे बिस्तर पर बेबसी से तड़प रहे थे।
अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे बुजुर्ग, पुलिस आग लगने के कारणों की तलाश में जुटी
सगड़ पड़ोसियों ने अपनी जान पर खेलकर किसी तरह आग पर काबू पाया और झुलसी हुई अवस्था में बुजुर्ग रामचंद्र को तत्काल जिला चिकित्सालय चरक भवन पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने की हरसंभव कोशिश कर रही है। सूचना मिलते ही चिमनगंज थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और पीड़ित की पत्नी शांताबाई के विस्तृत बयान दर्ज किए। पुलिस ने बताया कि बुजुर्ग का बेटा वर्तमान में देश की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में दिल्ली में पदस्थ है, जिसे घटना की सूचना दे दी गई है।
इस घटना ने एक बार फिर समाज में अकेले रह रहे बुजुर्गों और विशेष रूप से दिव्यांग व असाध्य बीमारियों से पीड़ित नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। चिमनगंज पुलिस इस बात की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच कर रही है कि बंद कमरे के भीतर आखिर बिस्तर में आग किन कारणों से लगी—क्या यह शॉर्ट सर्किट का नतीजा था या कोई अन्य कारण।
कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण,मुस्तैद जांच और जन-जागरूकता से ही रुकेंगे हादसे
इन दोनों ही अलग-अलग घटनाओं ने उज्जैन पुलिस के सामने अनुसंधान की दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर जहां महाकाल पुलिस को तेजाब हमले जैसे संवेदनशील और संगीन मामले में झूठ और सच का फैसला करने के लिए गहन तकनीकी साक्ष्य (जैसे मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज) जुटाने होंगे, ताकि किसी बेकसूर को सजा न हो और असली गुनहगार बच न सके। वहीं दूसरी ओर, चिमनगंज पुलिस को बुजुर्गों की सुरक्षा से जुड़े इस हादसे की तह तक जाना होगा।
एक जिम्मेदार समाज और सजग पुलिस तंत्र की भूमिका तभी सार्थक होती है जब प्रत्येक पीड़ित को समय पर न्याय और उपचार मिले। इन घटनाओं से यह सामाजिक सीख भी मिलती है कि संकट के समय पड़ोसियों की सजगता किसी की जिंदगी बचा सकती है, और पुलिस की निष्पक्ष व बिना किसी दबाव के की जाने वाली वैधानिक कार्रवाई ही समाज में कानून के इकबाल को बुलंद रखती है।










