केपीटी ग्राउंड पर रॉयल मेला की दादागिरी

विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम)। गुजरात के गांधीधाम, राजकोट और भुज जैसे बड़े शहरों में अपने ब्रांड की धाक जमाने और पब्लिसिटी का शौक रखने वाले ‘रॉयल मेला’ सिंडिकेट का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और ‘दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी’ (DPT) की नीयत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। टकोर रोड स्थित सेंट्रल गवर्नमेंट के स्वामित्व वाले केपीटी ग्राउंड की 2 एकड़ जमीन पर 15 जून से 15 जुलाई तक चलने वाले इस मेले की मियाद बीते एक महीने से ज्यादा समय (आज 22 अगस्त) पहले ही समाप्त हो चुकी है। मेला आयोजकों की पूरी मंडली ने ग्राउंड से झूले और तंबू तो उखाड़ लिए, लेकिन मुख्य मार्ग पर खड़ा लगभग 2000 स्क्वायर फीट का विशालकाय, किला-नुमा और बेहद खतरनाक लकड़ी-प्लाई का स्ट्रक्चर (प्रवेश द्वार) वहीं लावारिस हालत में छोड़ दिया है।

सामने आई तस्वीरों से साफ जाहिर होता है कि जहां 2 एकड़ का पूरा मैदान अब खाली और बदहाल पड़ा है, वहीं सड़क किनारे खड़ा गुलाबी और नीले रंग का यह मायावी महल (गेट) बिना किसी सुरक्षा, चौकीदार या सीसीटीवी कैमरे के अकेला खड़ा है। 2 एकड़ जमीन का किराया प्रति एकड़ 7500 रुपये यानी प्रतिदिन 15,000 रुपये के हिसाब से तय किया गया था। शहर के गलियारों में दबी जुबान यह चर्चा जोरों पर है कि आयोजकों पर केपीटी प्रशासन का भारी-भरकम किराया बकाया है, जिसके भुगतान को लेकर खींचतान जारी है। आमतौर पर व्यावसायिक मेला खत्म होते ही आयोजक जमीन का एक-एक तिनका उठाकर ले जाते हैं, लेकिन रॉयल ग्रुप का यह गगनचुंबी गेट आखिर किस प्रशासनिक शह और साठगांठ के दम पर रास्ते पर छोड़ दिया गया है।
हैरानी की बात तो यह है कि गुजरात के अलग-अलग बड़े शहरों में इस समय जन्माष्टमी के पावन पर्व के उपलक्ष्य में जगह-जगह बड़े-बड़े मेलों का संचालन वर्तमान में जारी है। रॉयल कंपनी का पूरा ध्यान अन्य शहरों में नए मेलों से भारी मुनाफा कमाने और अपने ब्रांड का प्रचार-प्रसार करने पर लगा हुआ है, लेकिन गांधीधाम में छोड़े गए इस जानलेवा ढांचे की सुध लेने की फुर्सत किसी के पास नहीं है।
सबसे ज्यादा खौफनाक और चिंताजनक बात यह है कि चारों तरफ से कवर्ड इस विशालकाय 2000 स्क्वायर फीट के स्ट्रक्चर के भीतर इतना ज्यादा गुप्त स्पेस (जगह) है कि कोई भी असामाजिक तत्व, नशेड़ी या गिरोह आसानी से छिप सकता है। बिना सिक्योरिटी वाले इस सुनसान स्ट्रक्चर के अंदर यदि कल को कोई गंभीर अपराध, लूट, बलात्कार, नशीले पदार्थों की तस्करी या जनहानि जैसी अप्रिय घटना घटित हो जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या दूर बैठकर कमान संभाल रहे रॉयल ग्रुप के बेपरवाह कर्ताधर्ता इसके जिम्मेदार होंगे या फिर मुंह में दही जमाकर बैठी केपीटी और स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीम?
केपीटी द्वारा नोटिस जारी करने की बातें केवल कागजी खानापूर्ति और औपचारिकता तक सीमित नजर आ रही हैं। धरातल पर स्थिति यह है कि जिम्मेदार अधिकारी आँखें मूंदकर किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं। अलग-अलग शहरों में करोड़ों का टर्नओवर करने वाली रॉयल कंपनी का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताता है कि ब्रांड के प्रचार के मोह में जनता की सुरक्षा और प्रशासनिक नियमों को ठेंगा दिखाना इनकी आदत बन चुका है। गांधीधाम की जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है कि क्या यह विशालकाय ढांचा अपराधियों को शरण देने के लिए खड़ा रखा गया है? यदि इस अवैध और खतरनाक स्ट्रक्चर को तुरंत बुलडोजर चलाकर ध्वस्त नहीं किया गया, तो अवंतिका के युवराज इस साठगांठ की अगली परतें खोलने से पीछे नहीं हटेगा।










