खबरों का हड़कंप सिर्फ ‘चाय की चुस्की’ तक सीमित, जनता के भूलने का इंतजार करता लाचार प्रशासनिक तंत्र!

विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम)। राष्ट्रीय पर्व पर आज गांधीधाम शहर की सड़कों से तिरंगा यात्रा तो पूरे लवाजमे, ढोल-नगाड़ों और प्रशासनिक वाहवाही के साथ निकल गई, लेकिन जिन रास्तों से यह यात्रा गुजरी, उनके जमीनी हालात और भी ज्यादा बदतर और विपरीत नजर आए। ‘अवंतिका के युवराज’ द्वारा उजागर किए गए अंधेरे के साम्राज्य पर जागा तो सही, लेकिन उसका असर केवल चंद मिनटों की जुबानी चर्चा और अफसरों की ‘चाय की चुस्की’ तक ही सीमित रह गया। गांधीधाम का लाचार और ढीला-ढाला प्रशासन आज भी उसी पुरानी मानसिकता पर चल रहा है— खबर छपे तो दो मिनट अफसोस जताओ, फिर जनता के भूलने का इंतजार करो और उसके बाद फिर वही ढाक के तीन पात!

सरदार पटेल प्रतिमा से लेकर ग्रीन पैलेस मार्ग और शामजी कृष्ण वर्मा रोड से कलेक्टर रोड चौराहे तक 50 से अधिक बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा जब ‘अवंतिका के युवराज’ ने पूरी प्रखरता से उठाया, तो उम्मीद थी कि जिम्मेदार अफसर रात-दिन एक करके इन बत्तियों को रोशन करेंगे। लेकिन अफ़सोस, तिरंगा यात्रा की चकाचौंध के पीछे शहर की मुख्य सड़कों का अंधेरा ज्यों का त्यों बना रहा। खंभे आज भी बिन बत्तियों के अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं और केबल बिछाने का घिसा-पिटा बहाना बनाकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
इस संवेदनहीन और निकम्मे प्रशासनिक ढर्रे पर किसी शायर की यह पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं!
वे वादे करते हैं हुकूमत की मेज पर बैठकर ऐसे,
जैसे अंधेरों को चिरागों से सख्त नफरत हो।
खबर छपती है तो चंद मिनटों का बवाल होता है,
फिर वही खामोशी, वही अंधेरा, वही ढीला मलाल होता है!
प्रशासन की इस कार्यशैली का कड़वा सच यही है कि उन्हें न तो व्यापारियों के नुकसान की फिक्र है और न ही त्योहारों के समय खरीदारी करने वाली आम जनता की सुरक्षा की चिंता। अफसरों का पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर टिका रहता है कि किसी तरह मुद्दा ठंडा पड़ जाए, लोग इस खबर को भूल जाएं और उन्हें अपनी नाकामियों को छुपाने का फिर से नया मौका मिल जाए। ‘अवंतिका के युवराज’ इस ढर्रे को भली-भांति समझता है और स्पष्ट कर देना चाहता है कि जनता भले ही सब्र कर ले, लेकिन जब-जब प्रशासनिक नाकामी शहर की जनता को अंधेरे में धकेलेगी, तब-तब अखबार की स्याही अधिकारियों की नींद उड़ाने का काम करती रहेगी।










