उज्जैन। नीलगंगा थाना क्षेत्र में शनिवार की देर रात दरबार फूड रेस्टोरेंट के सामने जो हिंसक वारदात हुई, उसने एक बार फिर कानून व्यवस्था और जमीनी सुरक्षा तंत्र को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो पक्षों के बीच लंबे समय से सुलग रही पुरानी रंजिश जिस तरह से खुलेआम गोलीबारी और जानलेवा हमले में तब्दील हो गई, वह बेहद चिंताजनक है। इस खूनी झड़प में लोकेश गोरकर नामक युवक की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बीच-बचाव करने आए उसके परिवार के कई सदस्य लाठी, तलवार और पत्थरों के वार से गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे खूनी संघर्ष की जड़ें बीते होली के त्योहार से जुड़ी हुई हैं। उस दौरान दो पक्षों में एक महिला से जुड़े विषय को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। यद्यपि उस समय पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए मामले को शांत करा दिया था, परंतु दोनों पक्षों के बीच भीतर ही भीतर सुलग रही आपसी रंजिश पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी थी। शनिवार की रात यही रंजिश अचानक भड़क उठी और देखते ही देखते रेस्टोरेंट के सामने दोनों पक्ष हथियारों के साथ आमने-सामने आ गए, जिसके परिणामस्वरूप यह दुखद हत्याकांड घटित हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया। वर्तमान में शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर घायलों को निजी अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है, वहीं पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ संदेहियों को हिरासत में भी लिया है।
अपराधों की जड़ पर प्रहार की दरकार, केवल हथियार जब्ती काफी नहीं, सप्लाई चेन और अवैध सौदागरों के नेटवर्क को ध्वस्त करना समय की मांग
इस घटना के बाद शहर का सजग और प्रबुद्ध वर्ग अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच के तौर-तरीकों को लेकर आत्ममंथन करने पर मजबूर है। हाल के दिनों में देखा गया है कि पुलिस प्रशासन ने अपराधियों पर नकेल कसने के लिए त्वरित मुठभेड़ (शॉर्ट एनकाउंटर) से लेकर अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर मकान ढहाने तक की बड़ी कार्रवाइयां की हैं। निश्चित रूप से पुलिस बल पूरी मुस्तैदी और ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभा रहा है, परंतु केवल घटना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियार की जब्ती कर लेना इस समस्या का अंतिम समाधान नहीं है।
वरिष्ठ विधिक विशेषज्ञों और कानूनविदों का मानना है कि जब तक अपराध के मूल कारणों और हथियारों के अवैध स्रोतों पर चौतरफा प्रहार नहीं होगा, तब तक समाज में पूर्ण शांति की स्थापना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। असली सवाल यह है कि इन अपराधियों के पास ये घातक हथियार पहुंच कहां से रहे हैं और इन अवैध हथियारों का मुख्य सप्लायर कौन है? यदि अनुसंधान के दौरान पुलिस उस पूरे नेटवर्क की तह तक जाकर अवैध हथियारों के सौदागरों को नेस्तनाबूद करे और अपराधियों को कम से कम 10 से 15 दिनों के लंबे पुलिस रिमांड पर लेकर सघन पूछताछ करे, तो हथियारों की आपूर्ति स्वतः ही बंद हो जाएगी।
जब भी कोई ऐसी हिंसक घटना होती है, तो पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर खड़ी उस मां के कलेजे पर क्या गुजरती होगी, जब वह अपनी संतान के निर्जीव शरीर को चीर-फाड़ की प्रक्रिया से गुजरते हुए देखती है। वह उजड़ा हुआ शरीर देखकर मां का कलेजा फट जाता है। पुलिस विभाग समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात मुस्तैद रहता है, और यदि वह अपनी परंपरागत जांच प्रणाली में ‘सप्लायर नेटवर्क लिंकेज’ की इस नई विधिक रणनीति को शामिल कर ले, तो यह कई माताओं की गोद को उजड़ने से बचाने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।










