नई दिल्ली। देश की राजधानी का जंतर-मंतर आज एक ऐसे ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाले संघर्ष का गवाह बन चुका है, जिसने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है। युवाओं के भविष्य, निष्पक्ष भर्ती प्रणाली और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर शुरू हुआ यह महा-अनशन आज 17वें दिन भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी है। इस आंदोलन में देश के जाने-माने वैज्ञानिक और हजारों की संख्या में छात्र अपनी जान की बाजी लगाकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अब तक इस दमनकारी व्यवस्था ने जब भी भ्रष्टाचार किया, तब-तब आम जनता और युवाओं की आवाज को बर्बरता से दबा दिया गया। लेकिन इस बार देश का युवा जाग चुका है। अब आवाज दबेगी नहीं, क्योंकि यह लड़ाई किसी एक परीक्षा की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व और उनके सुनहरे भविष्य की है।

मासूमों की मौतों पर कब तक मौन रहेगी सत्ता पेपर लीक के दंश से टूटी सांसें और बेबस परिवारों का चीत्कार
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे डरावना और दुखद पहलू यह है कि इस भ्रष्ट परीक्षा तंत्र और पेपर लीक के कारण देश के कई होनहार छात्र मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा चुके हैं। जिन घरों के चिराग बुझ गए, उनके माता-पिता के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं और अनशनकारियों की मांग बिल्कुल साफ और न्यायसंगत है। उनकी पहली मांग है कि देश की शिक्षा व्यवस्था को गर्त में धकेलने वाले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के कारण जो बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं, उनके पीड़ित परिवारों को सरकार तुरंत 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करे ताकि उन्हें इस संकट की घड़ी में संबल मिल सके। इसके साथ ही पूरे परीक्षा और भर्ती सिस्टम में आमूलचूल सुधार किया जाए, ताकि भविष्य में फिर किसी मां की गोद सूनी न हो।

सिस्टम सुधारने के लिए चुनी थी सरकार, जनता मालिक है, राज करने का मुगालता छोड़ दें नेता
लोकतंत्र में जनता और सरकार के रिश्तों को लेकर आज देश के युवाओं ने एक बहुत बड़ा वैचारिक सवाल खड़ा कर दिया है। देश की आम जनता अपने कीमती वोट की ताकत से नेताओं को इसलिए चुनती है ताकि वे देश के सिस्टम को सुधार सकें, युवाओं को रोजगार दे सकें और व्यवस्था को पारदर्शी बना सकें। लेकिन आज के हालात देखकर ऐसा लगता है कि सत्ता की कुर्सियों पर बैठने के बाद ये राजनेता खुद को शहंशाह समझने लगते हैं। इन्हें यह याद रखना होगा कि जनता ने उन्हें व्यवस्था में सुधार करने के लिए चुना है, न कि इस पूरे तंत्र को बंधक बनाकर जनता के ऊपर अपना एकछत्र राज स्थापित करने के लिए। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता को सड़क पर उतरना ही पड़ता है और जंतर-मंतर का यह सैलाब इसी जन-आक्रोश का जीता-जागता उदाहरण है।

तपते आसमान के नीचे हौसलों की उड़ान, सिर से छीनी जा रही तिरपाल की छांव फिर भी नहीं डिगे कदम
हैरानी की बात यह है कि इस कड़कड़ाती धूप और उमस के बीच अनशन पर बैठे इन मासूम बच्चों और देश के वैज्ञानिकों को थोड़ी सी राहत देने के लिए सिर पर तिरपाल तक लगाने की अनुमति पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं दी जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि इस चिलचिलाती धूप में बिना किसी सहारे के तड़पकर ये बच्चे खुद-ब-खुद जंतर-मंतर खाली कर दें। लेकिन सत्ता की यह क्रूरता भी इन जांबाजों के हौसले नहीं तोड़ पा रही है। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के जवानों की आंखें भी इस मर्मस्पर्शी दृश्य को देखकर नम हो जाती हैं, लेकिन वे भी व्यवस्था के आदेशों के आगे बेबस हैं। इसी बीच आंदोलनकारियों ने एक बड़ी आशंका व्यक्त करते हुए प्रशासन को आगाह किया है कि इस ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए कुछ शरारती और बाहरी तत्वों को भीड़ में शामिल किया जा सकता है, जो हंगामा खड़ा करके इस पवित्र आंदोलन की छवि खराब करने की साजिश रच रहे हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रहे साथियों ने अपील की है कि ऐसे संदिग्ध लोगों पर कड़ी नजर रखी जाए ताकि आंदोलन की गरिमा बनी रहे।

फिल्मी हस्तियों से लेकर राजनीतिक दिग्गजों तक का मिला साथ, चतुर रामलिंगम और प्रकाश राज भी उतरे समर्थन में
इस आंदोलन की गूंज अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें देश के सबसे बड़े चेहरे भी आकर जुड़ गए हैं। सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म 3 इडियट्स में चतुर रामलिंगम का यादगार किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने इस संघर्ष को अपना खुला समर्थन देते हुए देश की जनता और मीडिया से अपील की है कि वे भूख हड़ताल पर बैठे वैज्ञानिकों और बच्चों के बिगड़ते स्वास्थ्य पर गंभीरता से ध्यान दें। इसके साथ ही प्रख्यात अभिनेता प्रकाश राज भी आंदोलनकारियों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी आवाज बुलंद कर रहे हैं। राजनीतिक मोर्चे पर शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस लड़ाई को अपना पूरा समर्थन दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भी लगातार धरना स्थल पर पहुंचकर हौसला बढ़ा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी देश के करोड़ों नागरिकों का समर्थन इस बात का गवाह है कि यह लड़ाई अब पूरे देश की सांझी लड़ाई बन चुकी है।












