एनकाउंटर और बुलडोजर मॉडल पस्त, विपक्ष ने साधा निशाना!
विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/उज्जैन)। मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले और पवित्र धार्मिक नगरी उज्जैन में बेखौफ बदमाशों का खूनी तांडव चरम पर पहुंच चुका है। अगस्त माह में हुई 4 नृशंस हत्याओं, सरेराह चाकूबाजी और ताबड़तोड़ डकैती की वारदातों ने पूरे जिले को दहला कर रख दिया है। एक तरफ जहां महीने भर पहले नीलगंगा थाना क्षेत्र में हुई हत्या के मामले में पुलिस अब तक चार्जशीट तक पेश नहीं कर पाई है, वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही नई वारदातों ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और इकबाल पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। बदमाशों के मन में खौफ पैदा करने के लिए चलाए गए शॉर्ट एनकाउंटर और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने वाले मॉडल पूरी तरह से बेअसर साबित हो रहे हैं, जिससे आम जनता में दहशत और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।

शहर में बेलगाम हो चुके अपराध का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महाकाल मंदिर के अति-सुरक्षित क्षेत्र शक्ति पथ और धनुष द्वार के बीच नंदी हॉल के सफाई कर्मचारी उमेश टेटवाल पर बदमाशों ने सरेराह चाकू से हमला कर दिया। महज साइड से चलने की बात को लेकर हुए इस विवाद में पुलिस ने रोनक हरित, हर्ष उर्फ बाबू पंवार और अर्पित उर्फ काजू फतरोड़ को गिरफ्तार कर महाकाल मंदिर के गेट के सामने उनका जुलूस निकाला, जहां आरोपी कान पकड़कर उठक-बैठक लगाते नजर आए। वहीं माधव नगर थाना क्षेत्र के दमदमा मोड़ के पास सड़क पर गाड़ी निकालने के लिए हॉर्न बजाने के मामूली विवाद में ट्रैक्टर शोरूम संचालक 27 वर्षीय यश मित्तल की 8-9 बदमाशों ने चाकू गोदकर निर्मम हत्या कर दी। इस वारदात में उनके दो साथी भी गंभीर रूप से घायल हुए। मामले में आक्रोशित अग्रवाल समाज ने थाने का घेराव कर सख्त कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने आयुष शर्मा, आकाश रायकवार, संटू, विजय सिंह ठाकुर, करण, विशाल और सागर समेत कुल 7 आरोपियों को दबोचकर उनका घटनास्थल पर जुलूस निकाला।

इसके अलावा चिमनगंज थाना क्षेत्र के कानीपुरा स्थित लक्की दरबार ढाबे पर बुधवार देर रात करणी सेना से जुड़े दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। पुरानी रंजिश और समझौते की पार्टी के दौरान हुए विवाद में 12 से 15 हथियारबंद बदमाशों ने हमला बोल दिया, जिसमें करणी सेना के जिला उपाध्यक्ष राहुल दरबार उर्फ विजय प्रताप और ढाबा मालिक जितेंद्र पवार की चाकू व तलवारों से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। इन बैक-टू-बैक हुई 4 हत्याओं ने पुलिस के खुफिया तंत्र की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।

एक तरफ जब पुलिस चेकिंग अभियानों का ढिंढोरा पीट रही थी, ठीक उसी वक्त बदमाशों ने नानाखेड़ा थाना क्षेत्र की मोती बाग कॉलोनी में 3 सूने मकानों के ताले तोड़कर करीब 10 लाख रुपये से अधिक के सोने-चांदी के जेवर, नकदी और तिजोरी में रखी भगवान की चांदी की प्रतिमाएं पार कर दीं। जिले में लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने आनन-फानन में 14 चेकिंग प्वाइंट लगाकर अलर्ट मोड जारी किया। वहीं नागदा तहसील में बिना पूर्व सूचना के रात 10 बजे अचानक ‘गुंडा अभियान’ के तहत पूरा बाजार बंद कराया गया, जिससे व्यापारियों और नगरवासियों में अफरा-तफरी मच गई।
उज्जैन की इस खौफनाक स्थिति पर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश के सबसे असफल गृहमंत्री का गृह नगर उज्जैन आज पूरी तरह ‘कानून अ-व्यवस्था’ की चपेट में है। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार हो रही हत्याओं और ध्वस्त कानून-व्यवस्था के बावजूद मुख्यमंत्री कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं।
अब यहां सवाल उठता है कि आखिर कब तक पुलिस केवल वारदात हो जाने के बाद जुलूस निकालने और पब्लिसिटी बटोरने तक सीमित रहेगी? जब थानों की नाक के नीचे हत्याएं और चोरियां हो रही हैं, तो इन formal चेकिंग अभियानों और लाठी पटककर बाजार बंद कराने से अपराधियों पर लगाम कैसे लगेगी? यदि पुलिस ने अवैध हथियारों के सप्लायरों, शराब माफिया और मुख्य अपराधियों पर सीधी कार्रवाई नहीं की, तो यह शहर आने वाले दिनों में और बड़े खूनी मंजर देखने को मजबूर होगा।










