नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी पर उठे तीखे सवाल!
विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। धार्मिक आस्था और आगामी त्योहारों की आहट के साथ ही शहर के अलग-अलग इलाकों में भगवान श्री गणेश और मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण जोर-शोर से शुरू हो चुका है। लेकिन इस भक्तिमय माहौल की आड़ में पर्यावरण और जल स्रोतों को घोर नुकसान पहुँचाने वाला एक काला कारोबार बेधड़क फल-फूल रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और राज्य सरकार की सख्त पाबंदियों के बावजूद गांधीधाम में खुलेआम प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का इस्तेमाल कर विशालकाय जहरीली प्रतिमाएं ढाली जा रही हैं।
प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां महीनों तक पानी में नहीं गलतीं और विसर्जन के बाद प्राकृतिक जल निकायों को पूरी तरह दूषित कर देती हैं। इसके ऊपर चढ़ाए जाने वाले घातक रासायनिक रंग और हैवी मेटल्स पानी को जहरीला बनाकर जलीय जीवों की मौत का कारण बनते हैं। इसके बावजूद स्थानीय नगर पालिका और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) का जिम्मेदार प्रशासनिक अमला आंखें मूंदकर बैठा हुआ है। हर साल त्योहारों से पहले बड़ी-बड़ी बातें करने वाले अधिकारी आज शहर के मुख्य इलाकों में चल रही इन अवैध भट्टियों और कारखानों को देखकर भी अनजान बने हुए हैं।
प्रशासन की इस कुंभकर्णी नींद और आपराधिक अनदेखी का दोहरा खामियाजा समाज को भुगतना पड़ रहा है। एक तरफ जहां प्राकृतिक पर्यावरण और जल स्रोतों का विनाश हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ नियमों का ईमानदारी से पालन करने वाले स्थानीय पारंपरिक मिट्टी के मूर्तिकारों की रोजी-रोटी पर गहरा संकट मंडरा गया है। पीओपी की सस्ती और चमक-दमक वाली मूर्तियों के आगे शुद्ध मिट्टी से प्रतिमाएं बनाने वाले कारीगर भुखमरी की कगार पर पहुँच रहे हैं, लेकिन प्रशासन को इन गरीब कारीगरों का दर्द नजर नहीं आ रहा।
अवंतिका के युवराज यह सीधा और तीखा सवाल पूछता है कि जब कानूनन पीओपी की मूर्तियों के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध है, तो फिर गांधीधाम की गलियों में यह जहरीला सामान किसकी शह पर तैयार हो रहा है? क्या नगर निगम प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी केवल विसर्जन के बाद कागजी रिपोर्ट बनाने का इंतजार कर रहे हैं? यदि समय रहते इन अवैध निर्माण स्थलों पर छापेमारी कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई और इन मूर्तियों को जब्त नहीं किया गया, तो आने वाले विसर्जन के बाद होने वाली तबाही का सीधा जिम्मेदार स्थानीय प्रशासन होगा।










