प्रशासनिक अनदेखी के बीच ज़रा सी चूक यानी सीधे मौत को बुलावा!

विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। शहर के सबसे व्यस्त और मुख्य हाईवे पर इफ्को (IFFCO) के ठीक सामने प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय निर्लज्जता की एक ऐसी भयानक तस्वीर सामने आई है, जो किसी भी वक्त एक विशालकाय हादसे में तब्दील हो सकती है। हाईवे के ठीक किनारे एक गहरा और विशालकाय नाला पूरी तरह से खुला पड़ा हुआ है, जो रोज़ाना यहाँ से गुजरने वाले हज़ारों राहगीरों और वाहन चालकों के लिए मौत का फंदा बना हुआ है। अब तक शहर के किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म या जिम्मेदार प्रतिनिधि ने इस गंभीर मुद्दे को उठाने की जहमत नहीं उठाई, लेकिन अवंतिका के युवराज इस जानलेवा बदहाली पर खामोश नहीं रहेगा।
सड़क सुरक्षा के तमाम दावों को ठेंगा दिखाता यह नाला किस कदर खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाईवे और इस गहरे गड्ढे के बीच सुरक्षा की कोई एक दीवार तक मौजूद नहीं है। सड़क और नाले के बीच न तो कोई कंक्रीट का मजबूत डिवाइडर बनाया गया है, न ही लोहे की फेंसिंग या तार का सुरक्षा घेरा लगाया गया है। नाले को ऊपर से स्लैब डालकर ढकने की फुर्सत भी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और स्थानीय नगर निगम प्रशासन को नहीं मिली है। मुख्य हाईवे पर दौड़ते तेज़ रफ्तार वाहन यदि ज़रा से भी अनियंत्रित होते हैं या किसी मोड़ पर सामने से आने वाली गाड़ी से बचने की कोशिश करते हैं, तो वाहन सीधे इस गहरे नाले में जा समाएगा, जहाँ से किसी का भी जीवित बचना केवल भगवान भरोसे ही रहेगा।
दूसरी तरफ, गांधीधाम में जिस तरह रोज़ाना पुलिस द्वारा विदेशी शराब की खेप पकड़े जाने की खबरें सामने आ रही हैं, उससे यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि शुष्क राज्य होने के बावजूद शहर की गलियों में शराब का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। ऐसे में यदि कोई वाहन चालक शराब के नशे में धुत होकर रात के अंधेरे या कम विजिबिलिटी में गाड़ी से नियंत्रण खोता है, तो हाईवे पर बिना रिफ्लेक्टर और बिना फेंसिंग के पड़ा यह नाला उसे सीधे काल के गाल में खींच लेगा। शराब माफिया की चहल-पहल और सड़कों पर सुरक्षा इंतज़ामों का शून्य होना प्रशासनिक नीयत पर बहुत बड़ा धब्बा है।
सुरक्षा के इस भयानक खतरे के साथ-साथ यह नाला गंदगी और महामारी का भी अड्डा बना हुआ है। नाले के भीतर सड़ा हुआ प्लास्टिक, जहरीला काला पानी और भारी मात्रा में मलबा जमा है, जिसकी असह्य बदबू से आसपास के दुकानदारों और राहगीरों का दम घुट रहा है। शहर में स्वच्छता और सुशासन का ढिंढोरा पीटने वाला प्रशासनिक अमला रोज़ इसी हाईवे से गुजरता है, लेकिन उनकी गाड़ियाँ इस मौत के कुएं के पास से आँखें मूँदकर निकल जाती हैं।
अवंतिका के युवराज यह सीधा और तीखा सवाल उठाता है कि आखिर इफ्को के सामने बने इस जानलेवा नाले को ढकने के लिए किस मासूम की बलि का इंतज़ार किया जा रहा है? क्या नेशनल हाईवे अथॉरिटी और गांधीधाम नगर निगम के आला अधिकारी किसी बड़े नरसंहार के बाद ही अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे? जनता की स्पष्ट माँग है कि इस नाले पर तुरंत मजबूत कंक्रीट का स्लैब डालकर इसे पूरी तरह ढका जाए, किनारे पर रिफ्लेक्टर युक्त डिवाइडर या फेंसिंग लगाई जाए और भीतर जमे गंदगी के अंबार को तत्काल साफ किया जाए, वरना इस जानलेवा लापरवाही के खिलाफ जन-आक्रोश की ज्वाला भड़कना तय है।










