किडाणा रोड पर वन विभाग की जमीन के पास सुलगता ज़हरीला बारूद

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कचरे से उठता ख़तरनाक धुआँ दे रहा बीमारियों को न्योता, राहगीरों के लिए बना डरावना सफ़र!

विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। गांधीधाम के किडाणा रोड पर वन विभाग की सीमा से सटी खाली ज़मीन पर फेंके जा रहे कचरे और उसमें लगाई जा रही आग ने स्थानीय रहवासियों और राहगीरों का जीना दूभर कर दिया है। मुख्य सड़क और घनी रिहायशी कॉलोनियों के ठीक समीप स्थित यह जगह अब प्लास्टिक, कचरे के अंबार और उठते ज़हरीले धुएँ का स्थायी अड्डा बन चुकी है।

तस्वीरों में साफ़ दिखाई दे रहा है कि किस तरह दिन-रात कचरे के इन ढेरों में बेधड़क आग लगाई जा रही है। प्लास्टिक और रासायनिक कचरे के जलने से उठने वाला सघन और ज़हरीला धुआँ पूरी आबो-हवा में ज़हर घोल रहा है। हालाँकि प्रशासन के पास अभी तक किसी के बीमार होने का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन जिस तरह से आसपास की कॉलोनियों के लोग, मासूम बच्चे और बुज़ुर्ग इस बदबूदार और ख़तरनाक धुएँ में साँस लेने को मजबूर हैं, उससे फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, दमा और त्वचा रोगों की चपेट में आने का ख़तरा चरम पर पहुँच गया है।

स्वास्थ्य सुरक्षा के इस ख़तरे के साथ-साथ यह किडाणा रोड राहगीरों के लिए भी मुसीबत का पर्याय बना हुआ है। दिन के उजाले में कचरे से उठती असह्य सड़न की बदबू के कारण सड़क पर पैदल चलना मुहाल हो जाता है। वहीं दूसरी ओर, वन विभाग की झाड़ियों से सटे होने और समुचित स्ट्रीट लाइट व सुरक्षा घेरे के अभाव में रात के समय किडाणा रोड का यह हिस्सा बेहद सुनसान और डरावना रूप अख़्तियार कर लेता है। रात के अंधेरे में सुरक्षा इंतज़ाम न होने से पैदल राहगीरों की जान हमेशा ज़ोखिम में बनी रहती है।

शहर में काग़ज़ी स्वच्छता अभियानों का ढिंढोरा पीटने वाले प्रशासनिक अमले और नगरपालिका के अधिकारियों की आँखें किडाणा रोड पर सुलग रहे इस ज़हरीले ढेर पर क्यों नहीं पड़ रही हैं? सड़क किनारे धधकती यह आग और फैला कचरा सीधे तौर पर स्थानीय नगर निगम और वन विभाग की घोर अनदेखी को बेनकाब करता है। अब देखना यह होगा कि किडाणा रोड के इस ख़तरनाक मंज़र और बेखौफ़ कचरा माफिया पर ज़िम्मेदार महकमा कब तक आँखें मूँदे बैठा रहता है।