बच्चों के निवाले पर डाका डालकर अफसर ने खड़ा किया ऐश-ओ-आराम का साम्राज्य, लोकायुक्त के छापे में खुला करोड़ों की काली कमाई का कुबेर खजाना

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इंदौर। महिला एवं बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी और खौफनाक हो चुकी हैं, इसका एक और शर्मनाक चेहरा इंदौर लोकायुक्त की ताबड़तोड़ कार्रवाई में बेनकाब हुआ है। संभाग स्तर के सबसे मलाईदार और महत्वपूर्ण माने जाने वाले संयुक्त संचालक पद पर बैठे लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर जब बुधवार सुबह लोकायुक्त की टीम ने एक साथ धावा बोला, तो वहां का नजारा देखकर खुद अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। सरकारी दफ्तरों में बैठकर महिला सुरक्षा, नौनिहालों के पोषण और बेसहारा बच्चों के हक की रक्षा का ढोंग रचने वाले इस साहब ने असल में अपनी तिजोरी भरने का ऐसा गंदा खेल खेला कि बच्चों के निवाले और आंगनवाड़ियों के बजट को ही अपनी अय्याशी का जरिया बना लिया। इंदौर लोकायुक्त की टीम ने करीब डेढ़ महीने तक बेहद गोपनीयता के साथ जाल बुना और इस भ्रष्ट अफसर के साम्राज्य पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी, जिसमें कंडवाल की जायज आमदनी से करीब 241 प्रतिशत अधिक की अवैध संपत्ति का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।

प्रशासनिक हल्के में यह चर्चा जोरों पर है कि साहब ने अपने पूरे सेवाकाल का एक बड़ा हिस्सा संभाग स्तर की मलाईदार कुर्सियों पर बैठकर ही गुजारा है, ताकि भ्रष्टाचार की गंगा लगातार बहती रहे। कंडवाल ने झाबुआ, रतलाम, नीमच, रीवा, शहडोल के साथ-साथ उज्जैन, देवास और इंदौर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में अपनी पदस्थापना के दौरान जमकर चांदी काटी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक लगभग तीस साल की इस नौकरी में उनका कुल वेतन करीब ढाई करोड़ रुपए के आसपास होना चाहिए था, लेकिन साहब ने पद के रसूख और रौब का ऐसा नाजायज इस्तेमाल किया कि आज उनके पास साढ़े नौ करोड़ रुपए से भी ज्यादा की बेहिसाब दौलत बिखरी पड़ी है। धार, पीथमपुर, बेकल्या, बनेड़िया और इंदौर के पॉश इलाकों जैसे स्कीम नंबर 103 और 140 में करोड़ों की बेशकीमती जमीनों, आलीशान भवनों और कमर्शियल प्लॉटों का पूरा जाल बिछा रखा है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस अफसर को मासूम बच्चों के कुपोषण को दूर करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसने अपनी काली कमाई को खपाने के लिए इंदौर में दो मंजिला आलीशान हाईटेक जिम और एक विशालकाय सुपर मार्केट खड़ा कर लिया, जो किसी बड़े मॉल को भी मात देता है।

भ्रष्टाचार के इस कुबेर तक पहुंचने के लिए लोकायुक्त पुलिस को भी फिल्मी अंदाज अपनाना पड़ा, क्योंकि कंडवाल बेहद शातिर तरीके से अपनी इस समानांतर सत्ता को चला रहा था। लोकायुक्त के जांबाज अधिकारी आम जनता और ग्राहक बनकर साहब के आलीशान जिम में मेंबरशिप की पूछताछ करने पहुंचे, तब जाकर पता चला कि वहां विदेश से मंगवाई गई चालीस लाख रुपए से ज्यादा की अत्याधुनिक फिटनेस मशीनें लगी हुई हैं और नीचे विशालकाय डिपार्टमेंटल स्टोर में रोजमर्रा की चीजों का करोड़ों का धंधा चल रहा है। लोकायुक्त एसपी के निर्देशन में चली इस पूरी कार्रवाई की भनक कंडवाल परिवार को सुबह छह बजे तक कानो-कान नहीं लगी और जब तक वे नींद से जागते, तब तक उनके भ्रष्टाचार का पूरा कच्चा चिट्ठा टेबल पर आ चुका था। विभाग के भीतर चल रही यह लूट चार अलग-अलग रास्तों से अंजाम दी जा रही थी, जिसमें आंगनबाड़ियों में बंटने वाले बच्चों के भोजन की खराब गुणवत्ता को दबाना, स्व-सहायता समूहों के बिल पास करने के एवज में तगड़ा कमीशन वसूलना, आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण और मरम्मत के नाम पर ठेकेदारों से मोटी रकम ऐंठना तथा विभागीय जांचों के मामलों में भ्रष्टाचारियों को क्लीन चिट देने का खुला सौदा शामिल था। इसके अलावा छात्रावासों और वन स्टॉप सेंटरों के संचालन में भी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।

हमारे जागरूक पाठकों को यह अच्छी तरह याद होगा कि अभी कुछ ही दिन पहले उज्जैन के बाल संप्रेक्षण गृह में बच्चों के साथ हुई क्रूरता और मारपीट का एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें हमारे समाचार पत्र ने यह खुलासा भी किया था कि महिला एवं बाल विकास विभाग में आरटीआई के तहत जानकारी मांगने पर भी अधिकारी नियमों का हवाला देकर दस्तावेज छुपा रहे हैं। अब कंडवाल पर हुए इस महा-छापे के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आखिर इस विभाग के अधिकारी आरटीआई के आवेदनों से इस कदर डर क्यों रहे थे और फाइलों को दबाकर किस राज को दफन करने की छटपटाहट चल रही थी। जब संभाग का मुखिया ही करोड़ों की दलाली और कमीशनखोरी के खेल में डूबा हो, तो नीचे के कर्मचारियों से ईमानदारी की उम्मीद करना ही बेमानी है। फिलहाल लोकायुक्त की टीम कंडवाल के बैंक लॉकरों को खोलने और संपत्ति के वास्तविक मूल्यांकन में जुटी है, जिसके बाद आय के छिपे हुए स्रोतों पर जांच का दूसरा हथौड़ा चलेगा। अब देखना यह है कि बच्चों के हक पर डाका डालने वाले इस सफेदपोश अधिकारी को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाता है या फिर रसूख के दम पर यह मामला भी ढीला पड़ जाएगा, लेकिन हमारे समाचार पत्र की पैनी नजर इस पूरे भ्रष्ट तंत्र पर मजबूती से टिकी रहेगी।