गांधीधाम के सत्वरा मार्केट में सरकारी शह पर महा-कब्जा

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बहुमंजिला इमारतों के बाहर टीन शेड डालकर सरकारी जमीन पर डाका, सड़कों पर लबालब गंदा पानी और बदहाली का आलम!

विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। गुजरात के गांधीधाम स्थित सत्वरा (सेक्टर 5) का पूरा व्यावसायिक बाजार क्षेत्र प्रशासनिक भ्रष्टाचार, अवैध अतिक्रमण और जिम्मेदारों की नीयत का नंगा सच बयां कर रहा है। ‘अवंतिका के युवराज’ की विशेष खोजी पड़ताल और मौके से मिली तस्वीरों ने नगर पालिका और स्थानीय तंत्र के उन दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं, जो स्वच्छता और सुशासन का ढिंढोरा पीटते नहीं थकते।

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का खेल
तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बाजार में बड़े-बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और बहुमंजिला इमारतें खड़ी हैं। पक्का निर्माण तो इन व्यापारियों की खुद की सीमा में आता है, लेकिन उसके आगे की पूरी की पूरी सरकारी जमीन पर अवैध रूप से टीन शेड बढ़ाकर खुलेआम कब्जा जमा लिया गया है। दुकानों के बाहर फुटपाथ और सड़क की जमीन पर बड़े-बड़े बर्तन, दूध के कैन, क्रेट्स और निजी सामान रखकर रास्ता रोक दिया गया है। यह पूरा तंत्र बिना नगर पालिका और प्रशासनिक अफसरों की सीधी सांठगांठ के संभव ही नहीं है। रसूखदार दुकानदारों को सरकारी जमीन पर कब्जा करने की खुली छूट दी जा रही है और आम जनता का पैदल चलना भी दूभर कर दिया गया है।

मेकरान मिल्क सेंटर की मनमानी, सड़क पर बह रहा पानी
अतिक्रमण की हद तो तब हो जाती है जब सत्वरा स्थित ‘मेकरान मिल्क सेंटर’ जैसे व्यापारी अपनी दुकान की दूध की टंकियों और बड़े-बड़े बर्तनों को धोने के लिए खुलेआम पाइप चालू करके सारा पानी सड़क पर बहा रहे हैं। दुकान के बाहर सड़क पर दर्जनों टंकियां रखकर पाइप से पानी फैलाया जा रहा है, जिससे मुख्य रास्ते पर गंदा पानी जमा हो रहा है और कीचड़ की स्थिति और भी विकराल हो चुकी है।

बिना बारिश सड़कों पर जलजमाव और गड्ढे
दूसरी तरफ, मुख्य मार्ग का दृश्य बेहद बदतर है। बिना किसी बारिश के भी पूरी सड़क पर पानी और कीचड़ भरा हुआ है। सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। राहगीरों, महिलाओं और बच्चों को इसी बदबूदार गंदे पानी और गड्ढों के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। दुपहिया वाहन चालक पानी से भरे गड्ढों में असंतुलित हो रहे हैं, लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी अपने दफ्तरों में बैठकर केवल सरकारी वेतन निकालने में मस्त हैं।

दिखावटी स्वच्छता और गरीब ठेला चालकों की बेबसी
सड़क के किनारों पर सब्जी विक्रेता और ठेला चलाने वाले मजदूर अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए खड़े हैं, जिन्हें न तो कोई बुनियादी सुविधा दी जा रही है और न ही सुरक्षा। वहीं दूसरी तरफ, स्वच्छता का दावा करने वाली नगर पालिका की कचरा गाड़ियां गलियों में अत्यधिक रफ्तार से दौड़ती हुई निकल जाती हैं। आम जनता आवाज लगाती रह जाती है, लेकिन गाड़ियां रुकने का नाम नहीं लेतीं।

‘अवंतिका के युवराज’ यह सीधा सवाल उठाता है कि आखिर किस कानून और किसकी अनुमति से सरकारी जमीन पर टीन शेड डालकर यह अवैध कब्जा कराया गया है? क्या गांधीधाम नगर पालिका के अधिकारियों का जमीर पूरी तरह मर चुका है, जो सरेआम सड़क पर पानी बहाने वाली दुकानों और अवैध अतिक्रमण पर आंखें मूंदकर बैठे हैं? यदि इस खोजी रिपोर्ट के बाद भी जिम्मेदार अपनी नींद से नहीं जागे, तो यह साफ हो जाएगा कि भ्रष्टाचार का यह खेल ऊपर से लेकर नीचे तक सभी की मिलीभगत से चल रहा है।