उज्जैन। शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगर निगम प्रशासन इन दिनों अपनी पीठ थपथपाने में जुटा है, लेकिन इस दिखावे के चक्कर में आम जनता की बुनियादी जरूरतों की किस कदर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण जीरो पॉइंट ब्रिज पर देखने को मिला। स्वच्छता रैंकिंग सुधारने की अंधी होड़ में अधिकारी इस कदर अंधे हो चुके हैं कि उन्हें जनता की प्यास से ज्यादा ब्रिज की रेलिंग की चमक प्यारी लग रही है। भीषण गर्मी के इस दौर में, जहां शहर की आधी आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रही है, वहां नगर निगम के कारिंदे पाइप लगाकर बेधड़क हजारों लीटर पीने का पानी पुल की रेलिंग धोने में बर्बाद कर रहे हैं। प्रशासन का यह तमाशा न सिर्फ आम जनता के जले पर नमक छिड़कने जैसा है, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की पराकाष्ठा है।
एक तरफ शहर की जमीनी हकीकत यह है कि कहीं मुख्य पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं, तो कहीं इंटेल वेल में विद्युत आपूर्ति बाधित होने का बहाना बनाकर पेयजल की नियमित सप्लाई ठप कर दी गई है। शहर की दर्जनों कॉलोनियों के लोग नगर निगम के टैंकरों के इंतजार में पूरी रात जागकर काट रहे हैं, और जहां पानी आ भी रहा है, वहां दबाव इतना कम है कि लोगों के घरों के बर्तन तक नहीं भर पा रहे हैं। ऐसी विकट स्थिति में जब पानी की एक-एक बूंद को सहेजने और उसका सही प्रबंधन करने की जरूरत थी, तब नगर निगम की अक्ल पर ऐसा ताला लगा कि वे सड़कों और लोहे की रेलिंग को पानी से नहलाने में व्यस्त हैं। जनता को पीने का पानी न देकर इस तरह पुल चमकाना कौन सा स्वच्छता अभियान है और इसका क्या औचित्य है, यह आम नागरिकों की समझ से परे है।
दिखावे की इस प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर अब जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है। जागरूक नागरिकों का साफ कहना है कि रैंकिंग सुधारने के नाम पर पानी की इस तरह बर्बादी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अधिकारियों को यह समझना होगा कि शहर की असली स्वच्छता और सुशासन कागजी नंबरों या चमचमाती रेलिंग से नहीं, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से आंका जाता है। जब तक जनता की प्यास नहीं बुझेगी, तब तक ऐसे खोखले स्वच्छता अभियानों का कोई मोल नहीं है। अब देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही और पानी की बर्बादी पर जिम्मेदार आला अधिकारी क्या सफाई देते हैं, या फिर हमेशा की तरह मौन साधकर इस फिजूलखर्ची को जायज ठहराने की कोशिश की जाएगी।










