गांधीधाम के सपनानगर में 1.96 लाख रुपये की विदेशी शराब जब्त

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312 बोतलों के साथ तस्कर गिरफ्तार, राजस्थान का सप्लायर नामजद लेकिन शराब माफिया के आका अब भी बेखौफ!

विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। शुष्क राज्य (ड्राई स्टेट) गुजरात में कागजों पर सख्त ‘शराबबंदी’ लागू है, लेकिन धरातल पर अवैध शराब का काला कारोबार जिस तेजी से फल-फूल रहा है, उसने पुलिस प्रशासन की गश्त और दावों की हवा निकाल दी है। गांधीधाम बी-डिवीजन पुलिस ने सपनानगर इलाके में छापेमारी कर भारी मात्रा में विदेशी शराब के साथ एक तस्कर को धर दबोचा है। लेकिन इस कार्रवाई ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था की नीयत पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

सपनानगर के मकान पर छापेमारी, 13 ब्रांड की 312 बोतलें बरामद
बी-डिवीजन पुलिस को गश्त के दौरान गुप्त और सटीक सूचना मिली थी कि सपनानगर क्षेत्र के एनयू-4 स्थित मकान नंबर ई-53 में अवैध शराब की बड़ी खेप छिपाकर रखी गई है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने चिन्हित मकान पर अचानक दबिश दी। मौके से 40 वर्षीय जितेंद्र परशोत्तम भाटिया (निवासी सपनानगर, गांधीधाम) को गिरफ्तार किया गया। मकान की तलाशी लेने पर 13 अलग-अलग नामचीन ब्रांडों की कुल 312 बोतलें विदेशी शराब बरामद हुईं, जिसकी बाजार कीमत 1,96,549 रुपये आंकी गई है। पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन सहित कुल 2,06,549 रुपये का माल जब्त किया है। शराब की यह खेप राजस्थान से सप्लाई करने वाले योगेश नामक आरोपी के खिलाफ भी मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

पुलिस की फोटो-सेशन कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
गुजरात में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद हर दिन शहर के अलग-अलग कोनों से लाखों रुपये की शराब पकड़ी जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराब की यह विशाल खेप अंतरराज्यीय सीमाओं को पार करके आखिर गांधीधाम के अंदरूनी इलाकों तक कैसे पहुंच रही है? रोजाना शराब के छोटे-छोटे पेडलर्स और फुटकर तस्करों को पकड़कर पुलिस कैमरे के सामने ‘फोटो-सेशन’ तो करवा लेती है, लेकिन उसके बाद जांच की रफ्तार शून्य क्यों हो जाती है?

अवंतिका के युवराज यह सीधा और तीखा सवाल पूछता है कि इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले असली ‘शराब माफिया’ और मुख्य कर्ता-धर्ता आज तक पुलिस की पहुंच से दूर क्यों हैं? राजस्थान से लेकर गुजरात तक फैले इस काले सिंडिकेट के असली आकाओं की गरदन तक कानून के हाथ कब पहुंचेंगे? क्या यह कार्रवाई केवल आंकड़ों का पेट भरने के लिए की गई कागजी खानापूर्ति है, या फिर बी-डिवीजन पुलिस शराब की इस सप्लाई चेन की जड़ों पर प्रहार करके मुख्य माफिया को बेनकाब करेगी?