ड्यूटी पर बाफले की दावत, वन दफ्तर बना पिकनिक स्पॉट कंडे सुलगाते दिखे मुलाजिम

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उज्जैन। सरकारी दफ्तरों में कामचोरी और लापरवाही की खबरें तो आम हैं, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और ड्यूटी का समय पिकनिक में तब्दील हो जाए, तो प्रशासनिक साख का जनाजा निकलना तय है। ऐसा ही एक शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला उज्जैन के वन भवन स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से सामने आया है, जहां वन विभाग के जिम्मेदार कर्मचारी मुस्तैदी से जंगलों और पर्यावरण की रक्षा करने के बजाय दफ्तर परिसर के भीतर ही कंडे सुलगाकर ‘दाल-बाफले’ की दावत उड़ाने में मशगूल थे। सरकारी ऑन-ड्यूटी समय में वन कार्यालय को पिकनिक स्पॉट बनाने का यह कारनामा अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसने पूरे महकमे की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

जनता के टैक्स के पैसों पर पलने वाले इन मुलाजिमों को न तो कानून का खौफ है और न ही अपने वरिष्ठ अधिकारियों का डर। जानकारी के अनुसार, कार्यालय परिसर के भीतर यह पूरा तामझाम विभाग के ही एक कर्मचारी अरुण वाडिया के जन्मदिन की पार्टी के लिए जुटाया गया था। जिस वक्त दफ्तर में फाइलों का निपटारा होना चाहिए था, जनता की समस्याओं को सुना जाना चाहिए था, उस कीमती समय में कर्मचारी कंडे सुलगाने, बाफले सेकने और भोजन तैयार करने में व्यस्त नजर आए। सरकारी दफ्तर के संसाधनों और ऑन-ड्यूटी समय का इस तरह निजी अय्याशी और आयोजनों में इस्तेमाल करना सीधे तौर पर घोर अनुशासनहीनता और जनता के साथ धोखा है।

वीडियो वायरल होने के बाद अब आम जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि ड्यूटी के वक्त इस तरह की मनमानी और लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। यह घटना दर्शाती है कि वन विभाग के इस दफ्तर में अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है और कर्मचारी अपनी मर्जी के मालिक बन बैठे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग के आला अधिकारी इस खुली गुंडागर्दी और लापरवाही पर कोई कड़ा संज्ञान लेंगे? क्या जन्मदिन मनाने वाले कर्मचारी अरुण वाडिया और इस दावत में शामिल अन्य लापरवाह कर्मचारियों पर निलंबन जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी अब खुद उनके संरक्षण पर भी सवाल खड़े कर रही है।