उज्जैन। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की विधिक और प्रशासनिक तैयारियों के तहत धार्मिक नगरी उज्जैन को वैश्विक स्तर के यातायात बुनियादी ढांचे से सुसज्जित करने का एक ऐतिहासिक महाप्लान धरातल पर उतर चुका है। जिला प्रशासन और नगर पालिक निगम के संयुक्त तत्वावधान में शहर के 100 प्रमुख चौराहों के आधुनिकीकरण और चौड़ीकरण की विधिक कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस महापरियोजना के तहत शहर के सबसे व्यस्ततम और संवेदनशील जंक्शनों—नानाखेड़ा चौराहा, मंछामन चौराहा और नीलगंगा हरीफाटक चौराहे—का ब्लूप्रिंट और हाईटेक डिजाइन आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। विकास के इस विधिक रोडमैप का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को निर्बाध, सुरक्षित और सुगम यातायात प्रबंधन प्रणाली उपलब्ध कराना है।

फोर और सिक्स लेन सड़कों का विधिक संजाल
प्रशासनिक साक्ष्यों और विधिक स्वीकृतियों के अनुसार, उज्जैन की आंतरिक और बाह्य सीमाओं को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों को युद्धस्तर पर फोर लेन (चार लेन) और सिक्स लेन (छह लेन) में परिवर्तित किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग और सिंहस्थ विकास प्राधिकरण के तकनीकी मापदंडों के तहत वर्तमान में शहर के भीतर की 60 से अधिक मुख्य सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। प्रशासनिक नीति के तहत, सड़क निर्माण के इन विधिक कार्यों के पूर्ण होते ही चरणबद्ध तरीके से चिन्हित चौराहों के भौतिक पुनर्गठन और सौंदर्यीकरण की जमीनी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके विधिक डिजाइन और भूमि अधिग्रहण के तकनीकी नक्शे भी जारी किए जा चुके हैं, जिसमें नीलगंगा हरीफाटक जंक्शन पर 572.69 वर्ग मीटर और मंछामन जंक्शन पर 44.53 वर्ग मीटर का विधिक क्षेत्र चिन्हित किया गया है।

स्मार्ट तकनीक और सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम का पहरा
इस समूची कायाकल्प परियोजना की सबसे बड़ी प्रशासनिक और विधिक विशेषता इसका पूरी तरह ‘स्मार्ट और हाईटेक’ होना है। कलेक्टर रौशन सिंह द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के तहत, इन सभी 100 विकसित चौराहों को आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सर्विलांस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। चौराहों पर स्थापित किए जाने वाले हाई-डेफिनिशन कैमरों और स्वचालित ट्रैफिक सिग्नलों की लाइव डिजिटल फीड सीधे एक केंद्रीय एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी। साक्ष्य और सुरक्षा के विधिक सिद्धांतों के तहत यह प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी, क्योंकि इसके जरिए किसी भी चौराहे पर यातायात का दबाव बढ़ने या दुर्घटना की स्थिति निर्मित होने पर प्रशासनिक अमला रियल-टाइम में त्वरित दंडात्मक और सुधारात्मक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित कर सकेगा।

सिंहस्थ 2028 की समय-सीमा का विधिक डेडलाइन
प्रशासनिक दावों और विधिक हलफनामों के अनुसार, इस हाईटेक चौराहे विकास परियोजना के माध्यम से समूचे अवंतिका क्षेत्र की सुरक्षा और मॉनिटरिंग को एक नया संवैधानिक और तकनीकी संबल प्राप्त होगा। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की विधिक समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी प्रस्तावित चौराहों का भौतिक निर्माण, आधुनिकीकरण और लाइटिंग का कार्य सिंहस्थ की आधिकारिक शुरुआत से पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। आधुनिक विधिक यातायात प्रबंधन की यह दीर्घकालिक योजना न केवल सिंहस्थ के दौरान जुटने वाले लाखों श्रद्धालुओं के सुरक्षित आवागमन की विधिक गारंटी बनेगी, बल्कि भविष्य के उज्जैन की महानगरीय छवि और प्रशासनिक साख को भी वैश्विक पटल पर एक नई और मजबूत पहचान प्रदान करेगी।











