इंदौर। स्वाद के शौकीन इंदौरियों की सेहत के साथ चंद पैसों के लालच में किस कदर खौफनाक खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका एक और वीभत्स और रोंगटे खड़े कर देने वाला आधिकारिक सच सामने आया है। शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा प्रशासन की विशेष टीम ने शहर के विभिन्न बेक समोसा निर्माताओं के खिलाफ एक बड़ा दंडात्मक अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान छोटा बांगड़दा स्थित ‘आदित्य राज बेकरी’ में जो नजारा देखने को मिला, उसने जन स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तमाम नियमों को तार-तार कर दिया। रसूख और मुनाफे की अंधी हवस में डूबे इस संचालक ने बेकरी को बीमारी बांटने का केंद्र बना रखा था, जिसके बाद प्रशासनिक दल ने त्वरित विधिक एक्शन लेते हुए मौके पर ही इस गंदे धंधे को पूरी तरह ताला जड़कर बंद करवा दिया।

नरक जैसी गंदगी के बीच सड़े आलुओं से सज रही थी थाली
प्राप्त प्रामाणिक और विधिक विवरण के अनुसार, जब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का दल आदित्य राज बेकरी के भीतर औचक निरीक्षण के लिए दाखिल हुआ, तो वहां का दृश्य किसी कबाड़खाने और डंपिंग ग्राउंड से भी बदतर था। परिसर में चारों तरफ सड़ांध और गंदगी का साम्राज्य था, जहां टूटी हुई टाइल्स के बीच जमीन पर कच्ची खाद्य सामग्री लावारिस हालत में पटक रखी थी। हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने बेक समोसे के भीतर भरा जाने वाला आलू का मसाला चेक किया; वह पूरी तरह सड़ चुका था और उसमें से भयंकर दुर्गंध आ रही थी। इसके अलावा, बिना किसी विधिक लेबल, एक्सपायरी डेट या ब्रांड के अवैध रूप से निर्मित सॉस और खतरनाक ग्रीन चटनी का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए मौके पर ही लगभग 300 तैयार बेक समोसे, भारी मात्रा में सड़ा हुआ आलू मसाला, 10 बोतलें रासायनिक चटनी और अमानक केक को विधिक रूप से कचरे की गाड़ी में डालकर नष्ट करवा दिया।
न लाइसेंस न मेडिकल सर्टिफिकेट, सिर्फ कानून को ठेंगा
इस समूची कर्गूजारी का सबसे गंभीर और गैर-कानूनी पहलू यह सामने आया कि करोड़ों के इस टर्नओवर वाले कृत्य के लिए संचालक के पास कोई वैध खाद्य लाइसेंस तक मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं, जो कर्मचारी वहां अत्यंत अस्वच्छ परिस्थितियों में खाने-पीने की वस्तुएं तैयार कर रहे थे, उनके पास कानूनन अनिवार्य ‘मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र’ का एक पन्ना तक नहीं मिला। साक्ष्य अधिनियम और प्रशासनिक नियमों के तहत यह बेहद संगीन जुर्म है, क्योंकि किसी संक्रामक बीमारी से ग्रसित कर्मचारी के जरिए यह संक्रमण हजारों उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता था। पीछे के हिस्से से आ रही असहनीय दुर्गंध और इन अक्षम्य अनियमितताओं को देखते हुए विभाग ने बिना कोई मोहलत दिए, ऑन द स्पॉट प्रतिष्ठान का संचालन विधिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया।
जांच की जद में अन्य बेकरियां, थमाया कारण बताओ नोटिस
खाद्य विभाग का यह हंटर सिर्फ एक दुकान तक सीमित नहीं रहा। टीम ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए स्कीम नंबर-103 स्थित ‘सुख सिस्टर बेकरी’ पर भी दबिश दी और वहां से बेक समोसे के सैंपल जब्त किए। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से बेक समोसा क्रीम रोल चटनी नमकीन और व्हिप क्रीम के रासायनिक नमूने सील कर राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजे जा रहे हैं। विभाग ने आदित्य राज बेकरी को कड़ी विधिक धाराओं के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर यदि बुनियादी सुधार नहीं किए गए, तो इनका लाइसेंस हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाएगा और संचालकों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
कलेक्टर हेल्पलाइन पर ठोकें शिकायत, प्रशासन का कड़ा संदेश
इस बड़ी और तीखी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने इंदौर के जागरूक नागरिकों से एक महत्वपूर्ण विधिक अपील की है। यदि शहर के किसी भी कोने में कोई रसूखदार या छोटा-बड़ा दुकानदार गंदगी के बीच खाद्य सामग्री बनाता है, बिना लाइसेंस के धंधा चलाता है या मिलावटखोरी करता पाया जाता है, तो जनता बिना किसी डर के तत्काल कलेक्टर हेल्पलाइन नंबर 0731-181 पर इसकी सीधी विधिक शिकायत दर्ज कराए। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में संदेश दे दिया है कि चंद रुपयों के लिए जनता की जिंदगी और सेहत को दांव पर लगाने वाले इन चंद गंदे मगरमच्छों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अवंतिका के युवराज समाचार पत्र की ओर से भी यह साफ संदेश है कि ऐसे जन-शत्रुओं का सामाजिक और कानूनी रूप से पूरी तरह बहिष्कार होना समय की सबसे बड़ी मांग है।










