महाकाल क्षेत्र के रेस्टोरेंट्स में परोसा जा रहा था जहरीला डालडा और बासी पनीर, खाद्य विभाग के छापे में खुली हरसिद्धि और सुरेश उपहार गृह की पोल!

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उज्जैन। बाबा महाकाल की पावन नगरी में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और स्वास्थ्य के साथ चंद पैसों के लालच में किए जा रहे खिलवाड़ का एक बेहद संगीन और गंभीर मामला उजागर हुआ है। संभागीय खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम ने शुक्रवार दोपहर को प्रसिद्ध हरसिद्धि माता मंदिर के समीप संचालित नामचीन भोजनालयों पर अचानक छापामार कार्रवाई की। इस दौरान जो विधिक साक्ष्य और वीभत्स कर्गूजारियां सामने आईं, उसने धार्मिक नगरी के खान-पान उद्योग और रेस्टोरेंट संचालकों की शुचिता के दावों को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है। कानून और जन स्वास्थ्य के सिद्धांतों को ताक पर रखकर श्रद्धालुओं की थाली में मिलावटी और अमानक सामग्री परोसने वाले इन रसूखदार संचालकों के खिलाफ विभाग ने विधिक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

शुद्ध देसी घी के नाम पर डालडा का विधिक जाल

प्राप्त प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जब हरसिद्धि मंदिर मार्ग पर स्थित ‘सुरेश उपहार गृह एवं रेस्टोरेंट’ पहुंची, तो वहां उपभोक्ताओं और भोले-भाले श्रद्धालुओं के साथ सीधे तौर पर किए जा रहे एक बड़े विधिक अपराध का भंडाफोड़ हुआ। रेस्टोरेंट के भीतर कड़ाही और रोटियों पर चुपड़ने के लिए जिस पदार्थ का उपयोग शुद्ध देसी घी’ के नाम पर किया जा रहा था, वह दरअसल मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक और अमानक डालडा (वनस्पति घी) निकला। खाद्य अधिकारियों ने कानूनन इस अमानक घी के सैंपल जब्त कर विधिक प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया पूरी की। यह कृत्य सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं के साथ की जा रही धोखाधड़ी और जालसाजी की श्रेणी में आता है, जहां रसूख की आड़ में शुद्धता का मुखौटा पहनकर जहर परोसा जा रहा था।

हरसिद्धि रेस्टोरेंट के किचन में गंदगी का साम्राज्य

कार्रवाई की अगली कड़ी में जब संभागीय दल ने पड़ोस में ही संचालित हरसिद्धि रेस्टोरेंट पर दबिश दी, तो वहां के किचन (रसोई घर) का नजारा देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। करोड़ों रुपये का टर्नओवर करने वाले इस रेस्टोरेंट के मुख्य विनिर्माण क्षेत्र में चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य था, जो कि जन स्वास्थ्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है। टीम ने त्वरित विधिक कार्रवाई करते हुए मौके से संदेहास्पद पनीर, जलेबी, लस्सी और दही के रासायनिक नमूने सील किए। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इन सभी नमूनों को राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा जा रहा है, ताकि वैज्ञानिक विश्लेषण के जरिए इनके भीतर मौजूद हानिकारक रसायनों और बैक्टीरिया का विधिक रूप से पता लगाया जा सके।

प्रशासनिक नोटिस और जवाबदेही के सुलगते सवाल

इस समूची कार्रवाई को अंजाम देने वाले संभागीय दल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंत शर्मा, बी.एस. जामोद, प्रदीप लकड़े, बी.एस. देवलिया और सुरेंद्र सिंह शामिल रहे। विधिक जांच के बाद अधिकारियों ने दोनों रेस्टोरेंट संचालकों को कड़ी कानूनी चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि महाकाल और हरसिद्धि क्षेत्र में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भोजन ग्रहण करते हैं, इसलिए उनकी सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा। परंतु यहां सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या यह प्रशासनिक कार्रवाई केवल नोटिस और सैंपलिंग तक ही सीमित रहेगी, या फिर इन मिलावटखोरों की दुकानों को विधिक रूप से सील कर इनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा? अवंतिका की जनता अब इस रसूखशाही के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई का इंतजार कर रही है।