महाकाल थाना क्षेत्र के गोंसा में सड़क निर्माण के दौरान दर्दनाक हादसा, प्रशासनिक अनदेखी और ठेकेदारों की रसूखशाही ने ली तीन साल की वंशिका की जान!

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उज्जैन। आस्था की नगरी उज्जैन के महाकाल थाना अंतर्गत ग्राम गोंसा में विकास के नाम पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने का एक ऐसा वीभत्स और हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने समूचे प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। धार जिले के सुदूर अंचल से पेट पालने आए एक लाचार मजदूर परिवार की महज तीन वर्षीय मासूम बच्ची वंशिका को निर्माण स्थल पर दौड़ रहे एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ने बेरहमी से कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। साक्ष्य विधि और निर्माण नियमों के तहत कार्यस्थल पर सुरक्षात्मक बैरिकेडिंग और लेबर वेलफेयर गाइडलाइंस का पालन न करना सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है, जिसके कारण एक हंसती-खेलती मासूम जिंदगी काल के गाल में समा गई और समूचा मजदूर परिवार न्याय के लिए भटकने को मजबूर है।

मजदूरों की बेबसी पर भारी पड़ी ठेकेदार की मनमानी

प्राप्त साक्ष्यों और घटनाक्रम के प्रामाणिक विवरण के अनुसार, धार जिले की ग्राम पंचायत सेबरीमाल भड़लिया का निवासी प्यारेसिंह अपने परिवार के साथ पिछले दो महीनों से उज्जैन के गोंसा रोड क्षेत्र में हाड़-तोड़ मजदूरी कर रहा था। गुरुवार देर शाम जब भारी भरकम ट्रैक्टर से निर्माण सामग्री उतारी जा रही थी, तब ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की ओर से सुरक्षा का कोई भी पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया था। कार्यस्थल पर न तो कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था और न ही बच्चों के लिए कोई सुरक्षित घेरा बनाया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिजनों के बयानों से यह साफ जाहिर होता है कि ट्रैक्टर चालक अत्यंत लापरवाही पूर्वक और अंधाधुंध तरीके से वाहन का संचालन कर रहा था। परिजनों ने पहले ही चालक को वाहन सुरक्षित स्थान पर खड़ा करने की चेतावनी दी थी, लेकिन रसूख और काम की अंधी होड़ में डूबे चालक ने गरीब मजदूरों की विधिक गुहार को पूरी तरह अनसुना कर दिया।

दूरी का बहाना और गैर-जिम्मेदाराना दलीलें

दुर्घटना की विधिक और तकनीकी जांच में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि खेलते-खेलते जब तीन साल की वंशिका ट्रैक्टर के समीप पहुंची, तो चालक की घोर लापरवाही के कारण वाहन पर से नियंत्रण खो चुका था। निर्माण कार्य से जुड़े प्रतिनिधि नौशाद और अन्य जिम्मेदार लोग अब इस जघन्य कृत्य पर पर्दा डालने के लिए ‘कम दूरी’ और ‘अचानक सामने आने’ जैसी गैर-जिम्मेदाराना और लचर विधिक दलीलें पेश कर रहे हैं, जो कि कानूनन पूरी तरह अक्षम्य है। यदि निर्माण स्थल पर स्थापित नियमों के तहत गति सीमा निर्धारित होती और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता, तो इस भयावह दुर्घटना को टाला जा सकता था। यह सीधे तौर पर कबाड़ और अनियंत्रित वाहनों को रिहायशी और निर्माण क्षेत्रों में दौड़ाने की उस संगठित कर्गूजारी का नतीजा है, जिस पर स्थानीय प्रशासन हमेशा आंखें मूंदे रहता है।

पोस्टमार्टम के बाद सुलगते विधिक यक्ष प्रश्न

शुक्रवार सुबह शासकीय अस्पताल में मृतका वंशिका के शव का डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। महाकाल थाना पुलिस ने मृतका के पिता प्यारेसिंह की विधिक शिकायत पर ट्रैक्टर चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और मानव जीवन को संकट में डालने की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है। परंतु इस मामले का सबसे बड़ा कानूनी और प्रशासनिक यक्ष प्रश्न यह है कि क्या पुलिस केवल एक मामूली चालक पर मर्ग कायम कर इस पूरे मामले की इतिश्री कर लेगी? क्या उन रसूखदार ठेकेदारों और निर्माण प्रभारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत सह-अभियुक्त के रूप में कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने मासूमों की सुरक्षा को ताक पर रखकर मौत का यह खुला खेल खेलने की इजाजत दी? पीड़ित परिवार अब इस प्रशासनिक रसूखशाही के खिलाफ डटकर खड़ा है और उच्चतम स्तर पर न्याय की मांग कर रहा है।