एमवाय अस्पताल के सरकारी डेथ वारंट वाले बाथरूम में मिला तीन माह के मासूम का शव, खाकी और प्रबंधन के दावों की खुली पोल

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इंदौर। चिकित्सा के सबसे बड़े शासकीय केंद्र महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल में संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और सुरक्षा तंत्र के पूरी तरह वेंटिलेटर पर चले जाने का एक बेहद शर्मनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला आधिकारिक मामला सामने आया है। अस्पताल के सबसे व्यस्ततम और संवेदनशील हिस्से यानी इमरजेंसी वार्ड के ठीक सामने स्थित प्रसाधन गृह (बाथरूम) से एक करीब तीन माह के मासूम नवजात का बेजान शव बरामद किया गया है। कानून व्यवस्था और साक्ष्य विधि की परिधि में यह घटना सीधे तौर पर प्रशासनिक घोर लापरवाही और आपराधिक कृत्य का स्पष्ट उदाहरण है, जिसने इस प्रतिष्ठित शासकीय चिकित्सालय के सुरक्षा दावों को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है।

इमरजेंसी के मुहाने पर लावारिस मौत

प्राप्त प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों और पुलिसिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार सुबह जब अस्पताल में सामान्य मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही शुरू हुई, तब प्रसाधन गृह पहुंचे कुछ नागरिकों ने वहां एक निर्दोष और असहाय मासूम का शव लावारिस हालत में पड़ा देखा। इस हृदयविदारक दृश्य को देखते ही मौके पर मौजूद सुरक्षा प्रहरियों को सूचित किया गया, जिसके बाद सफाई कर्मचारियों के माध्यम से शव को विधिक रूप से बाहर निकाला गया। कानून की नजर में सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस इमरजेंसी वार्ड के मुहाने पर चौबीस घंटे डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और निजी सुरक्षा एजेंसियों का भारी-भरकम अमला तैनात रहता है, ठीक उसी के नाक के नीचे कोई अज्ञात क्रूर शख्स एक जिंदा या मृत बच्चे को फेंककर फरार हो जाता है और किसी को भनक तक नहीं लगती।

अस्पताल प्रबंधन के दावों की पोस्टमार्टम

शुरुआती चिकित्सकीय परीक्षण और विधिक पंचनामा रिपोर्ट के मुताबिक, मृत नवजात की आयु लगभग तीन माह आंकी जा रही है। घटना की भयावहता को देखते हुए शव को प्राथमिक तौर पर सीएचएमओ कक्ष में रखवाने के पश्चात, विधिक प्रक्रिया और मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने हेतु मर्चुरी (शवगृह) भिजवा दिया गया है, जहां डॉक्टरों का एक पैनल शव का पोस्टमार्टम करेगा। यह मामला अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली का वास्तविक पोस्टमार्टम करता है, क्योंकि जो परिसर मरीजों को जीवनदान देने के लिए विख्यात है, उसकी चारदीवारी के भीतर एक मासूम को इस तरह लावारिस और अमानवीय परिस्थितियों में छोड़ दिया जाना किसी गंभीर संगठित लापरवाही से कम नहीं है।

सीसीटीवी की अंधी आंखें और खाकी की तफ्तीश

इस पूरे घटनाक्रम ने एमवाय अस्पताल की सुरक्षा में लगी निजी सुरक्षा एजेंसी और करोड़ों रुपये के बजट से संचालित होने वाले सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम की उपयोगिता पर गंभीर कानूनी और प्रशासनिक यक्ष प्रश्न खड़े कर दिए हैं। एमवाय चौकी पुलिस ने मर्ग कायम कर अस्पताल परिसर में स्थापित कैमरों की डिजिटल फुटेज को अपने कब्जे में लेकर विधिक विश्लेषण शुरू कर दिया है। वरिष्ठ डॉक्टरों और पुलिस के आला अधिकारियों की टीमें अब इस बात का सुराग लगाने में जुटी हैं कि आखिर वह कौन सी कलयुगी मां या आपराधिक तत्व था, जो कानून और कैमरों की तीसरी आंख को ठेंगा दिखाते हुए इस जघन्य कृत्य को अंजाम देकर निकल गया। जांच के बाद ही साफ होगा कि यह मामला सीधे तौर पर हत्या का है या फिर किसी लाचारी और लोक-लाज के डर से उपजा कोई संगीन जुर्म।