मुख्य बाजार में धूल फांक रहे बापू, अवैध पार्किंग का अड्डा बना परिसर क्या केवल जयंतियों तक सीमित है गांधीधाम प्रशासन का सम्मान?
विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। पूरे देश को स्वच्छता, स्वावलंबन और आत्मसम्मान का संदेश देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर बसे ऐतिहासिक शहर गांधीधाम में खुद बापू की प्रतिमा आज प्रशासनिक उपेक्षा, लापरवाही और बदहाली का दंश झेल रही है। गांधीधाम के हृदय स्थल यानी मुख्य बाजार चौक में स्थापित राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर जमी धूल की मोटी परतें और चारों तरफ पसरी गंदगी स्थानीय नगरपालिका और जिम्मेदार अधिकारियों के स्वच्छता के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ा रही हैं।
शहर के सबसे व्यस्ततम व्यावसायिक केंद्र पर स्थित बापू की इस प्रतिमा का रखरखाव पूरी तरह से रामभरोसे छोड़ दिया गया है। न तो यहाँ नियमित रूप से प्रतिमा की सफाई की जाती है और न ही इस परिसर को स्वच्छ रखने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम हैं। हद तो तब हो जाती है जब बापू की प्रतिमा के ठीक नीचे और आसपास का पूरा क्षेत्र अवैध पार्किंग स्थल में तब्दील हो चुका है। वाहन चालक धड़ल्ले से प्रतिमा के आसपास गाड़ियां पार्क करके चले जाते हैं, लेकिन न तो यातायात पुलिस और न ही नगरपालिका प्रशासन के किसी जिम्मेदार अधिकारी की नजर इस शर्मनाक नजारे पर पड़ रही है।
यहाँ सबसे पहला और बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या राष्ट्रपिता और महान स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने के लिए केवल 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) और 30 जनवरी (पुण्यतिथि) का दिन ही बचा है? क्या साल के बाकी दिनों में उनके सम्मान की कोई अहमियत नहीं रह जाती? इसके अलावा, शहरभर में जोर-शोर से चलाए जाने वाले स्वच्छता अभियानों का ढिंढोरा तो पीटा जाता है, लेकिन गांधीधाम की पहचान कहे जाने वाले बापू की इस प्रतिमा की सुध लेने की फुर्सत नगर निगम और प्रशासनिक अमले को क्यों नहीं है? एक तरफ जहां सत्ताधीशों और प्रशासनिक अधिकारियों के स्वागत-सत्कार में सरकारी खजाने का पैसा पानी की तरह बहाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ जिस महापुरुष के नाम से यह शहर पहचाना जाता है, उनकी प्रतिमा धूल-मिट्टी के ढेर में तब्दील हो रही है।
जिस राष्ट्रपिता ने पूरे देश से गुलामी और गंदगी का खात्मा करने का बीड़ा उठाया था, आज उन्हीं के नाम पर बसे शहर में उनकी प्रतिमा अपनी गरिमा खो रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि पूरे शहर के लिए एक बड़ा कलंक है। अवंतिका के युवराज यह स्पष्ट करता है कि नगरपालिका प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना होगा। इस प्रतिमा परिसर को अविलंब अवैध अतिक्रमण और पार्किंग से मुक्त कराया जाए तथा प्रतिमा की नियमित सफाई व भव्य रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, अन्यथा प्रशासनिक लापरवाही की इस कहानी को सार्वजनिक मंचों पर उजागर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।










