फ्लाईओवर के नीचे बदहाली का काला सच

0
12


एक तरफ मलबे से बंद रास्ता, दूसरी तरफ वाहनों के जमावड़े से राजस्व और सुरक्षा पर गहराते सवाल!


विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। शहर में जनता की सहूलियत और यातायात को सुगम बनाने के लिए करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए फ्लाईओवर (ओवरब्रिज) के नीचे की जमीनी हकीकत प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है। जिस अंडरपास और निचले हिस्से का उपयोग सुचारू आवागमन और ट्रैफिक को रफ्तार देने के लिए होना चाहिए था, वह आज उपेक्षा, मलबे और वाहनों के संदेहास्पद जमावड़े का केंद्र बन चुका है।

रास्ते पर मलबे का कब्जा, राहगीर काट रहे लंबा चक्कर
ओवरब्रिज के नीचे एक तरफ से दूसरी तरफ जाने वाले मुख्य निकास मार्ग पर मलबे, पत्थरों और कंक्रीट के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिससे रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है। निर्माण या रखरखाव के नाम पर छोड़ा गया यह मलबा महीनों से जस का तस पड़ा हुआ है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इसे हटाने की जहमत तक नहीं उठा रहा। इस निकास मार्ग के बंद होने के कारण स्थानीय चालकों और राहगीरों को मजबूरी में लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है, जिससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।

पेवर ब्लॉक पर वाहनों का मेला: प्रशासनिक संरक्षण या खुली अनदेखी?
दूसरी ओर, फ्लाईओवर के नीचे बने पेवर ब्लॉक वाले हिस्सों में पिकअप वैन, कमर्शियल लोडर्स और निजी चार पहिया वाहनों का विशाल जखीरा हर समय खड़ा रहता है। शहर के बीचों-बीच मुख्य मार्ग पर इतनी बड़ी तादाद में वाहनों की कतारें खड़ी होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि यह पार्किंग अनाधिकृत है, तो इससे स्थानीय नगरपालिका के राजस्व को सीधा चूना लग रहा है और सवाल उठना लाजमी है कि आखिर किसके इशारे पर सार्वजनिक संपत्ति का यह व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है? वहीं दूसरी तरफ, यदि यह स्थान अधिकृत भी है, तो भी आम जनता के निकास मार्ग को बाधित कर वाहनों को खड़ा कराने की इजाजत किसने दी?
सार्वजनिक स्थल पर इस तरह का अव्यवस्थित कब्जा बिना स्थानीय तंत्र की मौन सहमति या अनदेखी के संभव नजर नहीं आता। स्वच्छता और सुचारू यातायात का ढिंढोरा पीटने वाला प्रशासनिक अमला शहर के इस मुख्य केंद्र से पूरी तरह बेखबर बना बैठा है।

स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का स्पष्ट कहना है कि अंडरपास के निकास मार्ग से तुरंत मलबा हटाकर बंद रास्ते को चालू किया जाए। इसके साथ ही ब्रिज के नीचे वाहनों की इस भारी मौजूदगी की निष्पक्ष जांच की जाए कि यह व्यवस्था किसके आदेश पर चल रही है, ताकि सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमण-मुक्त कराया जा सके और व्यवस्था सुधर सके। अवंतिका के युवराज यह उम्मीद करता है कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का शीघ्र संज्ञान लेंगे।