रहस्यमयी मौत और गुपचुप समाधि, मंगलनाथ क्षेत्र में साधु गंगेश्वरी महाराज की संदिग्ध मृत्यु से सनसनी परिजनों ने लगाया हत्या का संगीन आरोप कब्र खोदकर निकाला गया शव

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उज्जैन। धर्मधानी उज्जैन के बेहद शांत और आस्था के केंद्र मंगलनाथ मंदिर क्षेत्र स्थित ‘मलानी बाबा की कुटिया’ से एक ऐसा सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने धार्मिक नगरी की सुरक्षा और प्रशासनिक चौकसी पर बड़े तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। कुटिया में रहने वाले साधु गंगेश्वरी महाराज (मूल नाम सुनील जोशी, जिन्होंने वर्ष 2010 में संन्यास लिया था) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का एक खौफनाक खेल खेला गया है। मौत तो संदिग्ध थी ही, लेकिन उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि प्रशासन और पुलिस को कानों-कान खबर दिए बिना, बेहद गोपनीयता के साथ महाराज के शव को कुटिया के ठीक पीछे ही जमीन में दफन कर समाधि दे दी गई। इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब कई दिनों तक महाराज से संपर्क न होने पर उनका पूरा परिवार घबराकर उज्जैन पहुंचा और जब हकीकत सामने आई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

साधु गंगेश्वरी महाराज की इस रहस्यमयी मौत और आनन-फानन में दी गई समाधि को लेकर मृतक के भाई अनिल जोशी ने सीधे तौर पर हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस प्रशासन के सामने न्याय की गुहार लगाई है। शिकायतकर्ता भाई का आरोप है कि करीब 10 दिन पहले जब उनकी महाराज से आखिरी बार फोन पर बातचीत हुई थी, तब पृष्ठभूमि से गंभीर विवाद और झगड़े जैसी डरावनी आवाजें सुनाई दे रही थीं, और उस कॉल के तुरंत बाद से ही महाराज का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा था। परिजनों का यह तीखा आरोप है कि अगर यह सामान्य मृत्यु थी, तो परिवार को सूचना क्यों नहीं दी गई? अंतिम संस्कार को इस कदर गुप्त क्यों रखा गया? इतना ही नहीं, कुटिया से महाराज की मोटरसाइकिल और उनका तमाम निजी कीमती सामान भी गायब मिला है, जो इस बात का चीख-चीखकर गवाह दे रहा है कि इस वारदात के पीछे कोई बहुत बड़ी साजिश या सफेदपोश अपराधियों का हाथ है।

परिजनों के इस भारी आक्रोश और लिखित शिकायत के बाद आखिरकार गहरी नींद में सोए प्रशासनिक अमले और पुलिस के हाथ-पांव फूले। आनन-फानन में कार्यपालक मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी में उस विवादित समाधि स्थल को खुदवाया गया और जमीन के भीतर से महाराज के शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया गया। हालांकि, पुलिस अब भी पारंपरिक ढर्रे पर चलते हुए यही रटा-रटाया बयान दे रही है कि पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह खड़ा होता है कि उज्जैन जैसे अति-संवेदनशील और संतों की नगरी में किसी साधु की मौत हो जाती है, उन्हें गुपचुप तरीके से दफना दिया जाता है, और स्थानीय खुफिया तंत्र से लेकर बीट पुलिस तक को इसकी भनक तक नहीं लगती? आखिर कुटिया से मोटरसाइकिल और सामान गायब करने वाले वो शातिर चेहरे कौन हैं, जिन्हें कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है? हमारा समाचार पत्र इस पूरे संदिग्ध घटनाक्रम और साधुओं की सुरक्षा में हो रही इस गंभीर लापरवाही पर अपनी तीखी नजर बनाए हुए है, और जब तक इस रहस्यमयी मौत के पीछे छिपे असली गुनहगार बेनकाब होकर सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाते, तब तक इस मामले की परतें लगातार उघाड़ता रहेगा।