सीएम ने स्क्रीन से दबाया बटन, लेकिन क्या धरातल पर सुधरेगी खस्ताहाल सड़कें और पानी का संकट?
विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। चुनावी वादों, चमचमाते वर्चुअल स्क्रीन और मंचों पर होने वाली कागजी घोषणाओं से क्या किसी शहर की बदहाल सूरत रातों-रात बदल सकती है? गांधीधाम शहर में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के दौरान गांधीनगर से वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 286 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का खातमुहूर्त तो कर दिया, लेकिन इस ‘वर्चुअल’ सौगात के बीच शहर का आम नागरिक आज भी जमीनी हकीकत को लेकर सशंकित है। इफको ऑडिटोरियम में आयोजित इस भव्य समारोह में नेताओं और अधिकारियों की मौजूदगी के बीच बड़े-बड़े दावे किए गए, परंतु बड़ा सवाल यह है कि कागजों और स्क्रीन्स पर करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर देना ही काफी है या फिर इन योजनाओं को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती होगी?
वर्चुअल खातमुहूर्त के दौरान 135 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल हाईवे सर्विस रोड से आदिपुर तक 10 किलोमीटर लंबे रिंग रोड, मेघपर बोरीची व मेघपर कुंभारडी के लिए 100 करोड़ से अधिक की जल आपूर्ति योजना, 22 करोड़ के नए मनपा भवन और 20 करोड़ रुपये की आंतरिक सड़कों का खाका खींचा गया। मुख्यमंत्री ने मंच से “नागरिकों देवो भव” और “अर्निंग वेल, लिविंग वेल” जैसे आकर्षक नारों का ज़िक्र करते हुए गांधीधाम मनपा को गुणवत्तापूर्ण काम करने और जनता को स्वच्छता में नंबर-1 बनने की नसीहत भी दे डाली।
परंतु, अवंतिका के युवराज यह सीधा सवाल उठाता है कि जो गांधीधाम नगर निगम वर्ष 2025 में बना, उसे अब तक 1590 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के दावे दिए जा चुके हैं, फिर भी शहर की अधिकांश सड़कें खस्ताहाल क्यों हैं? मानसून आते ही सीवरेज का पानी और पानी का संकट जनता की नाक में दम क्यों कर देता है?
हाल ही में शहर के आदिलापुर और रामबाग अस्पताल के पास नवनिर्मित सड़कों का ताश के पत्तों की तरह उखड़ जाना और उफनते गटरों की भयावह तस्वीर इस बात की गवाही देती है कि गांधीधाम में सरकारी बजट का बड़ा हिस्सा ठेकेदारों और अफसरों की लापरवाही की बली चढ़ जाता है। मुख्यमंत्री जी ने स्क्रीन के उस पार से गुणवत्तापूर्ण काम कराने का कड़ा निर्देश तो जारी कर दिया, लेकिन गांधीधाम की ज़मीन पर जब तक इस 286 करोड़ रुपये के बजट का कड़ा थर्ड-पार्टी टेक्निकल ऑडिट नहीं होगा, तब तक इस बात की क्या गारंटी है कि यह 135 करोड़ का नया रिंग रोड पहली ही बारिश में गड्डों में तब्दील नहीं होगा?
नेताओं के लंबे-चौड़े भाषणों और ऑडिटोरियम में बजी तालियों के बीच जनता आज भी यही पूछ रही है कि क्या इस विशाल बजट के बाद उन्हें स्वच्छ पानी, गटर से मुक्ति और टिकाऊ सड़कें मिलेंगी या फिर यह 286 करोड़ का खातमुहूर्त भी केवल कागजी घोषणा और फाइलों का हिस्सा बनकर रह जाएगा? ‘अवंतिका के युवराज’ इस पूरे 286 करोड़ी प्रोजेक्ट्स की हर एक परत पर पैनी नजर रखेगा और धरातल पर काम शुरू होते ही निर्माण सामग्री और गुणवत्ता का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने लाता रहेगा।










