पहली ही जोरदार बारिश में धंसी उज्जैन की सड़क, रक्षक बने भगवान तो टला बड़ा हादसा, प्रशासन की लापरवाही से आम जनता त्रस्त

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उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की भव्यता और विकास के नाम पर शहर को चमकाने के प्रशासनिक दावों का खोखलापन मानसून की पहली जोरदार बारिश ने पूरी तरह उजागर कर दिया है। शहर के सबसे व्यस्ततम मार्गों में से एक, हरी फाटक ओवर ब्रिज से सावरा खेड़ी ब्रिज की ओर जाने वाले रास्ते पर आज एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसने पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। तेज बारिश के बाद भ्रष्टाचार और लचर निर्माण की कलई खोलती हुई मुख्य सड़क अचानक ताश के पत्तों की तरह धंस गई। इस गहरे और जानलेवा गड्ढे की चपेट में वहां से गुजर रहा एक भारी-भरकम डंपर ट्रक आ गया, जिसका पहिया और आधा हिस्सा जमीन के भीतर धंसकर बुरी तरह पलट गया। डंपर ट्रक (MP 09 ZR 5695) के इस कदर पलटने से वहां खड़े अन्य वाहनों में हड़कंप मच गया।

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इस खौफनाक हादसे के वक्त वहां एक सफेद रंग की एक्टिवा टू-व्हीलर (MP 09 SG 8052) भी साइड में पार्क थी, जो डंपर की चपेट में आकर उसके नीचे बुरी तरह दब गई। गनीमत रही कि काल बनकर आए इस हादसे में भगवान महाकाल की कृपा से कोई जनहानि नहीं हुई और दो पहिया वाहन पर कोई सवार नहीं था, जिससे एक बहुत बड़ी दुर्घटना टल गई। लेकिन इस पूरी घटना में वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है और प्रशासनिक कुंभकर्णी नींद पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। सड़क का यह हिस्सा किस तरह भीतर से पूरी तरह खोखला हो चुका था, इसकी गवाही धंसी हुई सड़क और डंपर के पहियों के नीचे दिखाई दे रहा गहरा दलदल साफ दे रहा है, जो ऊपरी तौर पर केवल कागजी विकास की परत से ढका हुआ था।
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इस भयंकर हादसे के बाद पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और आम जनता को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ रहा है। मार्ग की स्थिति यह है कि एक तरफ का रास्ता सिंहस्थ और विकास कार्यों के नाम पर पहले से ही बंद कर रोड निर्माण कार्य के हवाले किया हुआ था, और दूसरे मार्ग पर जहां से पूरा यातायात रेंगते हुए गुजर रहा था, वह इस डंपर के धंसने और पलटने के कारण पूरी तरह ब्लॉक हो गया है। इस वीआईपी मार्ग के बंद होने की वजह से वाहन चालकों, राहगीरों और रोजमर्रा के काम पर निकलने वाले लोगों को कई किलोमीटर का लंबा और थकाऊ चक्कर काटकर, दूर-दराज के रास्तों से घूमकर अपने गंतव्य तक जाना पड़ रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि घटना के घंटों बीत जाने के बाद भी उस जानलेवा गड्ढे को भरने या यातायात को सुचारू करने के लिए मौके पर कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी सुध लेने नहीं पहुंचा, जिससे वह गड्ढा धीरे-धीरे और गहरा तथा खतरनाक होता जा रहा है जो किसी भी वक्त एक और बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है।
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पड़ताल की सबसे कड़वी और तीखी हकीकत तो यह है कि आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 के मद्देनजर उज्जैन शहर में चारों ओर सड़कों के चौड़ीकरण और कायाकल्प का जो ढिंढोरा पीटा जा रहा है, उसकी जमीनी सच्चाई पहली ही बारिश के जलभराव ने बयां कर दी है। जिन सड़कों को करोड़ों-अरबों रुपए फूंककर चौड़ा और आधुनिक बनाने का दावा किया जा रहा था, आज वे तमाम मार्ग और निर्माणाधीन स्थल घुटने तक भरे पानी और कीचड़ के टापू में तब्दील हो चुके हैं। जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण चौड़ीकरण वाले प्रोजेक्ट्स के आसपास भारी जलभराव देखने को मिला, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि केवल कागजों पर ही मास्टर充 प्लान तैयार किए गए हैं और ठेकेदारों और रसूखदार इंजीनियरों की जुगलबंदी से जनता के टैक्स के पैसे को पानी में बहाया जा रहा है।

अब जनता के बीच यह तीखा और गंभीर सवाल पूरी तरह गूंज रहा है कि अगर चार साल बाद होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों का यह शुरुआती ट्रेलर इतना भयावह है, तो आने वाले समय में जब लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं का सैलाब यहां उमड़ेगा, तब इस लचर सिस्टम का क्या हाल होगा। क्या प्रशासन हमेशा की तरह किसी बड़ी जनहानि और खूनी हादसे का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही फाइलों को आगे बढ़ाया जाएगा। एक तरफ वीआईपी दौरों के समय रातों-रात चमचमाती सड़कें तैयार करने वाला अमला आज इस मुख्य मार्ग पर हुए गहरे गड्ढे और जलभराव को देखकर भी अंधा-बहरा बना हुआ है। हमारे समाचार पत्र की पैनी नजर इस पूरे मामले, घटिया निर्माण कार्य के पीछे छिपे सफेदपोश चेहरों और प्रशासन के इस लापरवाह रवैये पर लगातार बनी हुई है।