उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में इंदौर के युगपुरुष आश्रम से स्थानांतरित किए गए 86 बच्चों की नियति अब मौत और लाचारी के बीच झूल रही है। महज 14 महीनों के भीतर 17 मासूमों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने न केवल मानवता को शर्मसार किया है, बल्कि जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति की भूमिका पर भी गहरे सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जिस आश्रम को ‘सेवा’ का पर्याय बताया जाता है, वहां से उठ रही अर्थियों की कतार ने अब पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है।
मल्टी-ऑर्गन फेलियर का बहाना या लापरवाही का सयाना खेल?
स्वास्थ्य विभाग और आश्रम प्रबंधन बच्चों की मौत के पीछे मल्टी-ऑर्गन फेलियर, टीबी और मिर्गी जैसे रोगों का तर्क दे रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इन मासूमों को सही समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों का इलाज मिला? हमारे सूत्रों के अनुसार, आश्रम में केवल औपचारिकता के नाम पर शनिवार को स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं, जबकि बच्चों की स्थिति ऐसी है कि उन्हें 24 घंटे मेडिकल सुपरविजन की आवश्यकता है। क्या जिला अस्पताल के भरोसे इन गंभीर बच्चों को छोड़कर प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ रहा है?
एनआरआई फंड की चमक में धुंधलाता मासूमों का भविष्य
सेवाधाम आश्रम में विदेशों से और बड़े-बड़े एनआरआई दानदाताओं द्वारा भारी-भरकम निवेश किया जाता है। करोड़ों की फंडिंग और संसाधनों के बावजूद बच्चों की ऐसी दयनीय स्थिति चौंकाने वाली है। आखिर यह पैसा जाता कहां है? क्या यह राशि केवल बिल्डिंगों और दिखावटी सुविधाओं तक सीमित है, या फिर बच्चों के पोषण और उच्च स्तरीय चिकित्सा पर भी खर्च होती है? दान की इस चकाचौंध के पीछे मासूमों की भूख और बीमारी का सच कहीं ओझल तो नहीं हो रहा?
आश्रम के गर्भ में दफन हैं कई खौफनाक राज
अवंतिका के युवराज को सूत्रों से मिली जानकारी बेहद विचलित करने वाली है। चर्चा है कि पूर्व में आश्रम परिसर में खुदाई के दौरान कुछ शव बरामद हुए थे, जिन्हें रसूख और सांठगांठ के चलते फाइलों में ही दबा दिया गया। इतना ही नहीं, आश्रम से महिलाओं के गायब होने की खबरें भी दबी जुबान में तैर रही हैं। यदि इन दावों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करता है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच अनिवार्य है।
सेवा के नाम पर मासूमों से ‘मजदूरी’ का काला सच
सूत्रों की मानें तो सेवाधाम में दिव्यांग और छोटे बच्चों से कथित तौर पर आश्रम की साफ-सफाई और अन्य काम कराए जाते हैं। यहां तक कि बच्चों से हाथ-पैर दबवाने जैसी खबरें भी छनकर बाहर आ रही हैं। जो बच्चे खुद अपने पैरों पर खड़े होने में अक्षम हैं, उनसे इस तरह का काम लिया जाना मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। क्या ‘सेवावीर’ बनाने की आड़ में इन मासूमों का बचपन और श्रम कुचला जा रहा है?
इंदौर बाल कल्याण समिति की वो घातक चूक
पूरे विवाद की जड़ में इंदौर की बाल कल्याण समिति की वो जल्दबाजी है, जिसके तहत 86 बच्चों को रातों-रात बिना किसी विस्तृत मेडिकल जांच के उज्जैन शिफ्ट कर दिया गया। बिना यह जाने कि बच्चों को क्या बीमारी है और उन्हें किस तरह के इलाज की जरूरत है, उन्हें सेवाधाम के सुपुर्द कर देना एक तरह से उन्हें मौत के मुंह में धकेलने जैसा था। इस अदूरदर्शिता की सजा आज वो मासूम भुगत रहे हैं, जिनमें से 17 अब इस दुनिया में नहीं हैं और 25 अब भी जिंदगी की अंतिम जंग लड़ रहे हैं।
गायब बच्चों का रहस्य, कहां गया रोशन?
86 बच्चों की सूची में से दो बच्चे लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि एक बच्चे को परिजन ले गए हैं, लेकिन ‘रोशन’ नाम के बच्चे का अब तक कोई सुराग नहीं मिलना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। पुलिस में गुमशुदगी तो दर्ज है, लेकिन क्या किसी ने यह जानने की कोशिश की कि एक सुरक्षित परिसर से बच्चा गायब कैसे हो गया? क्या इसके पीछे भी कोई गहरा षड्यंत्र है?
हाईकोर्ट की सख्ती और बंद लिफाफे का सस्पेंस
माननीय हाईकोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सभी पक्षों से जवाब तलब किया है। प्रशासन ने जांच के लिए 7 दिन का हवाला दिया था और अब रिपोर्ट बंद लिफाफे में शासन तक पहुंच चुकी है, लेकिन इस जांच का खुलासा अब तक नहीं होना संशय पैदा करता है। क्या इस बार भी रसूखदार लोग अपनी कमियों को दबाने में कामयाब हो जाएंगे, या फिर उन 17 मासूमों को इंसाफ मिलेगा जिनकी जान सिस्टम की भेंट चढ़ गई?
एसडीएम और डॉक्टरों की टीमें अब स्क्रीनिंग का नाटक कर रही हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब बच्चे मर रहे थे, तब यह तत्परता कहां थी? मुख्यमंत्री और प्रशासन को जवाब देना होगा कि आखिर कब तक अनाथ और दिव्यांग बच्चों के जीवन के साथ यह खिलवाड़ जारी रहेगा? अवंतिका के युवराज की पैनी नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या लापरवाह अफसरों और प्रबंधन पर गाज गिरेगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।










