भोपाल आज जब हम विकास और आधुनिकता के दौर में ऊंचाइयों को छूने की बात करते हैं, तो अक्सर उन बुनियादी रिश्तों को भूल जाते हैं जिन्होंने हमें चलना सिखाया। महाकुंभ 2025 की भीड़ में रुद्राक्ष बेचते हुए रातों-रात अपनी मासूम मुस्कान से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली महेश्वर की बेटी मोनालिसा भोंसले ने जो कदम उठाया है, उसने न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अवंतिका के युवराज के माध्यम से आज हम उस दर्द को महसूस कर रहे हैं, जो एक माता-पिता की आंखों में अपनी लाडली के दूर जाने पर झलकता है। उन माता-पिता ने, जिन्होंने गरीबी और अभावों की तपिश में खुद को जलाकर अपनी बेटी को इस काबिल बनाया कि वह दुनिया के सामने खड़ी हो सके, आज वही बेटी उन्हें मजधार में छोड़कर अपने नए सफर पर निकल पड़ी है। केरल के तिरुवनंतपुरम से आई शादी की इन तस्वीरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मोनालिसा ने अपने बॉयफ्रेंड फरमान खान के साथ मंदिर में शादी रचा ली है और इसे अपनी मर्जी का नाम दिया है, लेकिन क्या इस मर्जी में उन बूढ़े कंधों का आशीर्वाद शामिल था जिन्होंने उसे बचपन में सहारा दिया था?

यह दृश्य देखकर एक पुरानी मगर कड़वी सच्चाई याद आती है कि ‘यदि अंधे को अचानक दिखने लग जाए, तो वह सबसे पहले उस छड़ी को फेंकता है जिसके सहारे उसने अब तक का सफर तय किया था।’ मोनालिसा की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही नजर आती है। महाकुंभ के मेले में जिस बेटी की सादगी पर दुनिया फिदा थी, जिसे डायरेक्टरों ने फिल्मों के ऑफर दिए और जिसकी तस्वीरें टी-शर्ट्स पर छपने लगीं, आज उसी बेटी ने अपने माता-पिता के आंसुओं की परवाह किए बिना अपनी दुनिया अलग बसा ली है। अवंतिका के युवराज यह सवाल पूछता है कि क्या प्रसिद्धि का नशा इतना गहरा होता है कि इंसान को अपने जन्मदाता ही बोझ लगने लगते हैं? फरमान खान के साथ केरल के अरुमनूर मंदिर में ली गई सात फेरों की कसमें और प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी जान का खतरा बताना, क्या उन माता-पिता के लिए किसी गहरे जख्म से कम होगा जो आज भी महेश्वर की गलियों में अपनी बेटी की कुशलता की दुआ मांग रहे होंगे?

मोनालिसा और फरमान का कहना है कि यह प्यार है और इसमें किसी भी तरह का ‘लव जिहाद’ या साजिश नहीं है। उन्होंने पुलिस स्टेशन जाकर सुरक्षा मांगी और खुद को बालिग बताकर अपनी मर्जी का हवाला दिया। फरमान का दावा है कि मोनालिसा ने ही उन्हें प्रपोज किया था और शादी न होने पर खुदकुशी की धमकी दी थी। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू महेश्वर में बिखरा पड़ा है। मोनालिसा के परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी को डराया-धमकाया गया है और उसे एक बड़ी साजिश के तहत फंसाया गया है। अवंतिका के युवराज के संवाददाताओं ने जब महेश्वर के माहौल को देखा, तो वहां आक्रोश और दुख का मिला-जुला सैलाब नजर आया। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब फिल्म जगत में ऐसी नैतिकता के साथ उन्हें काम मिलेगा? क्या दर्शक और चाहने वाले, जिन्होंने एक साधारण रुद्राक्ष बेचने वाली लड़की को सिर-आंखों पर बिठाया था, इस बेरुखी को स्वीकार कर पाएंगे?

आने वाला समय बताएगा कि यह रिश्ता कितनी दूर तक चलेगा, लेकिन आज की हकीकत यही है कि एक घर का चिराग किसी और आंगन को रोशन करने के लिए अपने मूल को भूल चुका है। माता-पिता की गरीबी और उनके संघर्षों को सीढ़ी बनाकर सफलता के शिखर पर पहुंचने वाली बेटी ने शायद यह नहीं सोचा कि शिखर की हवाएं बहुत ठंडी होती हैं और वहां अपनों की गर्माहट के बिना टिक पाना मुश्किल होता है। क्या प्यार के भरोसे जिंदगी की जंग जीती जा सकती है जब पीछे छूटे अपनों की हाय साथ चल रही हो? यह खबर केवल एक शादी की नहीं है, बल्कि उन टूटते मूल्यों की है जो समाज की नींव को खोखला कर रहे हैं। अवंतिका के युवराज के पाठक आज इस खबर को पढ़कर शायद यह सोचने पर मजबूर होंगे कि क्या हम अपनी बेटियों को केवल सफल होने की शिक्षा दे रहे हैं या उनमें संस्कारों के उस बीज को बोना भूल गए हैं, जो उन्हें जमीन से जोड़े रखे। आज मोनालिसा भले ही केरल की वादियों में अपना नया आशियाना तलाश रही हों, लेकिन महेश्वर के उन खाली कमरों की खामोशी आज भी उनसे सवाल कर रही है कि क्या उनकी ममता का मोल इतना ही था?











