सिर पर पट्टी, टूटे दांत और पैर पर गहरे घाव, फिर भी खाकी ने रसूखदारों को बचाने के लिए खेली क्रॉस कायमी की चाल!

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मासूम के सामने माँ का सिर फोड़ा, जल्लादों की तरह पैर पर काटा, क्या मध्य प्रदेश पुलिस अपराधियों की ढाल बन गई है?

उज्जैन। धर्मधानी उज्जैन के केशवनगर कॉलोनी क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाला खूनी मंजर सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। हमारी पड़ताल में प्राप्त साक्ष्यों और रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरों के अनुसार, पुश्तैनी मकान हड़पने की हवस में अंधे हुए हमलावरों ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए एक परिवार पर प्राणघातक हमला बोल दिया। चश्मदीदों के अनुसार महेंद्र सिंह चौहान उसकी पत्नी भावना और उनके बेटों ने घर के सामने वह खूनी तांडव किया जिसे देख पूरा इलाका दहल उठा। एक मासूम बच्चे के सामने उसकी माँ के सिर पर पत्थर से वार कर लहूलुहान कर दिया गया और बचाव में आए पति के साथ इतनी बर्बरता की गई कि उनके दांत तक टूट गए। दरिंदगी की हद तो तब पार हो गई जब हमलावरों ने नर भक्षियों की तरह महिला के पैर पर इतनी बेरहमी से काटा कि गहरा घाव हो गया। सिर की पट्टी और खून से सनी साड़ी इस दरिंदगी का जीता-जागता प्रमाण हैं, लेकिन आश्चर्य है कि इन गहरे जख्मों को देखने के बाद भी पुलिस तंत्र का दिल नहीं पिघला और पीड़ित को न्याय देने के बजाय परिस्थितियों को उलझाने का प्रयास किया गया।
क्या अपराधियों के गुलाम बन चुके हैं जिम्मेदार?
इस पूरे मामले में सबसे संदेहास्पद भूमिका उन उत्तरदायी अधिकारियों की रही जिन्होंने प्राथमिकी संख्या 0194/2026 दर्ज करते समय कानून के हाथ बांध दिए। सिर की गंभीर चोट, टूटे दांत और पैर पर गहरे घाव जैसे स्पष्ट चिकित्सीय साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने हत्या के प्रयास जैसी धाराएं लगाने के बजाय महज़ मामूली खानापूर्ति की, ताकि आरोपियों को तत्काल कानूनी लाभ मिल सके। पुलिस को ये खूनी घाव महज़ मामूली चोटें लग रही हैं! हद तो तब हो गई जब अपनी निष्पक्षता का गला घोंटते हुए पीड़ित पक्ष पर ही ‘क्रॉस कायमी’ का दबाव वाला हथियार चला दिया गया। यह उस प्रशासनिक लीपा-पोथी का ज्वलंत उदाहरण है जहाँ रक्षक ही भक्षकों की ढाल बन गए हैं। क्या मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन का स्वरूप अब आम लोगों के लिए इतना दमनकारी हो चुका है कि खून से सनी साड़ी भी जिम्मेदारों की अंतरात्मा नहीं झकझोर पा रही? आखिर किसके इशारे पर एक घायल परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है और क्यों बीते कई वर्षों से लगातार दिए जा रहे आवेदनों को नजरअंदाज किया जा रहा है?
वर्षों की शिकायतों को पुलिस ने बनाया मौत का वारंट!
हमारी टीम द्वारा की गई गहन पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया है कि इस खूनी संघर्ष की जड़ में फर्जी रजिस्ट्री और कूटरचित दस्तावेजों का एक बड़ा मायाजाल फैला हुआ है। स्वर्गीय लोकेंद्र सिंह चौहान की पुश्तैनी संपत्ति को हड़पने के लिए जाली हस्ताक्षरों के सहारे एक ‘मौत की वसीयत’ तैयार की गई है। नगर निगम के जोन क्रमांक 06 में गुपचुप तरीके से चल रही नामांतरण की प्रक्रिया और पुलिस की यह पक्षपातपूर्ण कार्यवाही एक ही सिक्के के दो पहलू नजर आते हैं। दस्तावेज चीख-चीख कर कह रहे हैं कि जालसाजी के दम पर पीड़ित परिवार को उनके ही घर से बेदखल करने की गहरी साजिश रची गई है। पूर्व में जून 2023 से लेकर मार्च 2026 तक स्थानीय नीलगंगा थाने और वरिष्ठ अधिकारियों को दिए गए दर्जनों आवेदनों (जैसे 25/06/2023 और 17/03/2026) का हवाला देते हुए पीड़ित पक्ष ने बार-बार सुरक्षा की गुहार लगाई थी। लेकिन तंत्र की निष्क्रियता ने अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए कि उन्होंने सरेआम खून बहाने में भी संकोच नहीं किया। पुलिस ने इन पुरानी शिकायतों को महज़ रद्दी की टोकरी में नहीं फेंका, बल्कि उन्हें अपराधियों के लिए ‘मौत का वारंट’ बना दिया।
अब इस लड़ाई की गूँज दिल्ली तक जाएगी, क्या पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर खोलेंगे पट्टी बंधी आँखें?
यह मामला अब केवल उज्जैन के दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस अन्याय की गूँज दिल्ली तक सुनाई देगी। पीड़ित अब न्याय की उम्मीद में सीधे पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर और संभाग आयुक्त की चौखट पर अपना संवैधानिक अधिकार मांगने पहुँच रहे हैं। यदि सिर पर पत्थर के वार, टूटे दांत और जल्लादों द्वारा काटे गए गहरे घाव के बाद भी पुलिस प्रशासन की सुस्ती नहीं टूटी और उन जिम्मेदारों पर गाज नहीं गिरी जिन्होंने अपराधियों को बचाने के लिए क्रॉस प्राथमिकी की पटकथा लिखी है, तो यह माना जाएगा कि न्याय का गला घोंटा जा चुका है। हमारी टीम इस भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों की जड़ तक जाने के लिए संकल्पित है। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक उन जालसाजों और उनके संरक्षकों का असली चेहरा जनता के सामने नहीं आ जाता। हमारी पड़ताल निरंतर जारी है और इस मामले से जुड़े हर एक तथ्य को साक्ष्यों के साथ जनता की अदालत में रखा जाएगा।