नगर निगम वर्कशॉप में करोड़ों के टायर-बैटरी डकार गए ज़िम्मेदार…?

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जनता के टैक्स पर वर्कशॉप का डाका जानकारी देने में क्यों कांप रहे अधिकारियों के हाथ….?

उज्जैन। नगर निगम का कार्यशाला विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार के ऐसे दलदल में फंसा नज़र आ रहा है जहाँ पारदर्शिता शब्द का कोई अस्तित्व ही नहीं बचा है। अवंतिका के युवराज द्वारा जनहित में लगाई गई सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारियों पर विभाग का सांप सूंघ जाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि निगम के वाहनों के रख-रखाव के नाम पर बड़ा वारा-न्यारा किया जा रहा है। विभाग से जब निगम के वाहनों में लगने वाले नए टायर, बैटरी और डीजल के स्टॉक रजिस्टर की प्रमाणित प्रतियां मांगी गईं, तो जिम्मेदारों ने सूचना देने के बजाय ‘अतार्किक बहानों’ का सहारा लेकर सत्य को दबाने का कुत्सित प्रयास किया। आखिर वे कौन से राज हैं जिन्हें सार्वजनिक होने से बचाने के लिए विभाग सूचना के अधिकार जैसे संवैधानिक कानून की धज्जियां उड़ाने पर उतारू है और क्या शासन के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को करोड़ों के इस खेल की भनक तक नहीं है?

कचरा संग्रहण के भुगतान में करोड़ों की गड़बड़ी होने की आशंका…?

झोनल स्तर पर सफाई व्यवस्था और कचरा संग्रहण के नाम पर निजी एजेंसियों को किए जा रहे करोड़ों रुपये के मासिक भुगतान का हिसाब मांगना विभाग को इतना नागवार गुजरा कि तीस दिवस की वैधानिक समय सीमा बीत जाने के बाद भी विभाग ने पूर्णतः मौन साधे रखा। निगम की गाड़ियों के टायर-बैटरी बदलने से लेकर कंडम घोषित वाहनों की नीलामी प्रक्रिया तक, हर कदम पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि स्टॉक रजिस्टर का विवरण न देना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति प्रतीत होता है। ऐसा प्रतीत होता है कि नगर निगम वर्कशॉप के भीतर एक ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है जो नई बैटरी और टायरों को कागजों में खपाकर जनता की गाढ़ी कमाई पर कुंडली मारकर बैठा है और यही कारण है कि लॉग-बुक से लेकर पीएफ चालान तक की जानकारी को ‘गोपनीय’ बताकर छुपाया जा रहा है।

अपील की दहलीज पर पहुँचा भ्रष्टाचार का मामला….

विभाग की इस तानाशाही और जानकारी रोकने के विरुद्ध अब प्रथम अपील का बिगुल फूँक दिया गया है और मामला नगर निगम मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की चौखट पर पहुँच चुका है। लोक सूचना अधिकारी द्वारा धारा 7(1) का खुला उल्लंघन करना यह दर्शाता है कि उन्हें कानून का जरा भी भय नहीं है, लेकिन अब अधिनियम की धारा 7(6) के तहत समस्त जानकारी निशुल्क प्राप्त करने का वैधानिक दावा ठोक दिया गया है। यदि आगामी सात दिवस के भीतर वाहनों की नीलामी, नए कलपुर्जों की खरीदी और डीजल के खर्च का संपूर्ण विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, तो राज्य सूचना आयोग के समक्ष इन जवाबदेह अधिकारियों के विरुद्ध व्यक्तिगत अर्थदंड और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की जाएगी। अवंतिका के युवराज इस महा-घोटाले की जड़ तक जाने के लिए संकल्पित है और विभाग की हर उस फाइल को बेनकाब किया जाएगा जिसे भ्रष्ट तंत्र ने अंधेरे में छुपाकर रखा है।

निगम के वर्कशॉप के काले कारनामों की फेहरिस्त अभी और भी लंबी है…

नगर निगम वर्कशॉप से जुड़े इस भ्रष्टाचार के मामले में अभी रहस्य का पर्दा पूरी तरह नहीं उठा है क्योंकि विभाग की घबराहट चीख-चीखकर कह रही है कि मामला केवल टायर-बैटरी तक सीमित नहीं है। जैसे ही प्रथम अपील की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, कई ऐसे ‘सफेदपोश’ चेहरे बेनकाब होंगे जो सत्ता के संरक्षण में इस लूट को अंजाम दे रहे हैं और जिन्होंने पत्रकारिता की आवाज़ को दबाने के लिए सूचनाओं को विखंडित करने का प्रयास किया है। हमारी पैनी नज़र निगम के उन ठेकेदारों पर भी है जो अधिकारियों के साथ मिलकर जनता के धन की बंदरबांट कर रहे हैं और जल्द ही अगले अंक में हम उन विशिष्ट नामों और रसीदों का खुलासा करेंगे जो इस भ्रष्ट तंत्र की नींव हिला देंगे।