अधिकारियों की अमानवीय तानाशाही, पसीने की कमाई पर अफसरों की टेढ़ी नजर, वसूली का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद भी 34 कर्मचारियों के चूल्हे बुझाने की तैयारी

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उज्जैन। नगर पालिक निगम के हुक्मरानों की संवेदनहीनता ने सारी हदें पार कर दी हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग संधारण उपखंड में तैनात नियमित, दैनिक वेतन भोगी और आउटसोर्स के 34 कर्मचारी आज अपने ही पसीने की कमाई के लिए अधिकारियों की चौखट पर गिड़गिड़ाने को मजबूर हैं। एक तरफ जहां सरकार कर्मचारियों के कल्याण के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर उज्जैन नगर निगम के ‘कुंभकरणी नींद’ में सोए अधिकारी अपनी नाकामियों का ठीकरा इन छोटे कर्मचारियों पर फोड़ रहे हैं। मार्च का महीना बीत जाने के बाद भी अप्रैल की तपिश में इन परिवारों को भूखा मारने की साजिश रची जा रही है। अधिकारियों की इस मनमानी ने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए कर्मचारियों की मेहनत की कोई कीमत नहीं है।
करोड़ों की वसूली फिर भी वेतन पर ‘कैंची’: जांबाज कर्मचारियों ने जान जोखिम में डाल कर जमा कराए 1.77 करोड़, बदले में मिली प्रताड़ना
हैरानी की बात तो यह है कि जिन कर्मचारियों का वेतन ‘कम वसूली’ का बहाना बनाकर रोका गया है, उन्हीं जांबाजों ने बिना किसी अवकाश के, शनिवार और रविवार को भी काम करके विभाग के खजाने में 1 करोड़ 77 लाख रुपये जमा कराए हैं। बिना किसी पुलिस प्रोटेक्शन और बिना किसी विशेष दल के, अपनी जान पर खेलकर ये कर्मचारी गली-गली जाकर वसूली कर रहे हैं। विभाग को मालामाल करने वाले इन कर्मचारियों को ईनाम देने के बजाय, कार्यपालन यंत्री और उपायुक्त एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल कर तमाशा देख रहे हैं। क्या करोड़ों रुपये की नगद वसूली अधिकारियों की नजर में ‘कम’ है, या फिर यह उनकी तानाशाही का नया पैमाना है?
जिम्मेदारी का ‘फुटबॉल’ खेल रहे साहब: उपायुक्त कहते हैं हमने नहीं रोका, कार्यपालन यंत्री ने उपायुक्त के आदेश का दिया हवाला।
जब मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के नेतृत्व में कर्मचारी अपनी फरियाद लेकर उपायुक्त श्री टैगोर के पास पहुँचे, तो उन्होंने बड़ी सफाई से पल्ला झाड़ लिया। वहीं, जब कार्यपालन यंत्री श्री वैभव भावसार से चर्चा की गई, तो उन्होंने उपायुक्त के आदेशों की आड़ लेकर अपना पल्ला झाड़ लिया। अधिकारियों के इस ‘म्यूजिकल चेयर’ के खेल में 34 परिवारों का भविष्य अधर में लटका है। श्री पवन सिंह और पुनीत शुक्ला जैसे अधिकारियों से चर्चा के बाद भी नतीजा सिफर ही रहा। सवाल यह उठता है कि जब कर्मचारी फील्ड पर अपना शत-प्रतिशत दे रहे हैं, तो अधिकारियों की कलम वेतन जारी करने में क्यों कांप रही है?

कर्मचारी संघ ने दी चेतावनी,अब बर्दाश्त नहीं होगी अफसरों की मनमानी, संगठन ने घेरा अधिकारियों का गलियारा

इस अन्याय के खिलाफ मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने कमर कस ली है। प्रदेश संगठन मंत्री श्री मनोहर गिरी और जिला अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की है। इस अवसर पर संभागीय अध्यक्ष मांगीलाल पाटीदार, राजकुमार सोलंकी, राम सिंह बनिहार और शैलेन्द्र सिंह ठाकुर सहित अन्य पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर जल्द ही वेतन आहरित नहीं हुआ, तो यह लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी। अधिकारियों की इस ‘पिक एंड चूज’ वाली नीति ने कर्मचारियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
कुंभकरणी नींद से जागें साहब, वरना जनता और कर्मचारी सिखाएंगे सबक
हमने पूर्व में भी इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर समाचार प्रकाशित किया था, लेकिन लगता है कि एसी कमरों में बैठने वाले इन साहबों को गरीब कर्मचारियों की आह सुनाई नहीं देती। अपनी नाकामी छुपाने के लिए कर्मचारियों के वेतन को ‘हथियार’ बनाना कायराना हरकत है। कार्यपालन यंत्री श्री भावसार ने अब आश्वासन तो दिया है, लेकिन कर्मचारी अब बातों से नहीं, अपने बैंक खातों में वेतन देखना चाहते हैं।
उपस्थिति: श्री राजेन्द्र तिवारी, पुष्पा कोल, जगदीश तिवारी, राजेंद्र वेद, महेन्द्र वर्मा, अनिरुद्ध पण्डया, रमेश मालवीय, पवन कुमार यादव, सुनील सरसवाल, फिरोज खान, हुकुम यादव, आकाश मालवीय आदि समस्त पीड़ित कर्मचारी इस संघर्ष में शामिल रहे।