उज्जैन। घर के डिब्बों में जिनके फूटी कौड़ी नहीं और दो वक्त के आटे तक का ठिकाना नहीं, वही ‘सरकारी राशन’ की खैरात पर पलने वाले शहर के कुछ आवारा तत्व अब उज्जैन की शांत फिजा में जहर घोलने का खौफनाक ख्वाब देख रहे हैं। होली के पावन पर्व पर जब पूरा शहर गुलाल और खुशियों की तैयारी में जुटा है, तब बहादुरगंज के योगेश्वर टेकरी का रहने वाला सावन शेर पिता दिलीप शेर और कुशलपुरा का रहने वाला रौनक करपुरिया पिता रिंकू जैसे ‘नस्लकुशे’ बदमाश खूनी खंजर लहराकर अपनी झूठी मर्दानगी का प्रदर्शन कर रहे थे। ताज्जुब तो इस बात का है कि जिन हाथों में इस उम्र में घर की जिम्मेदारी या कोई नेक काम होना चाहिए, उन 19 और 24 साल के लड़कों ने गले में ताबीज की जगह मौत का सामान यानी ‘खटकेदार चाकू’ टांग रखे हैं। ये वही दो टके के गुंडे हैं जिन्हें महीने की मोबाइल किश्त भरने के लिए भी दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है और अपनी फटी जेबें छिपाने के लिए ये मासूमों पर चाकू की धौंस जमाकर खुद को ‘डॉन’ साबित करने की नाकाम कोशिश करते हैं।

24 साल का सावन शेर तो अपराध की दुनिया का पुराना कीड़ा है, जिस पर पहले से ही देवास गेट और चिमनगंज मंडी जैसे थानों में हत्या के प्रयास (307) और मारपीट जैसे संगीन मामले दर्ज हैं, लेकिन इसकी खाल इतनी बेशर्म हो चुकी है कि खैरात का अनाज खाकर यह फिर से शहर को लहूलुहान करने निकल पड़ा। वहीं 19 साल का रौनक करपुरिया, जिसकी उम्र अभी नजर उतारने की है, वह शहर की फिजा बिगाड़ने के लिए बड़े-बड़े चाकू लेकर घूम रहा है। ये बदमाश खुद को समाज के सामने ‘टूटा-फूटा’ और लाचार साबित कर सहानुभूति बटोरते हैं, लेकिन असल में ये वही जहरीले बिच्छू हैं जो मौका मिलते ही डसने से बाज नहीं आते। सड़क किनारे बैठकर सेव-परमल चबाकर दिन काटने वाले इन बदमाशों की हेकड़ी तब धरी की धरी रह गई जब देवास गेट पुलिस ने इन्हें घेराबंदी कर दबोच लिया। इनके पास से बरामद अवैध चाकू अब इनकी बर्बादी की इबारत लिखेंगे, क्योंकि पुलिस ने इन पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 और बीएनएसएस की धारा 170 के तहत मामला ठोक कर इन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

इस पूरी कार्रवाई में देवास गेट थाना प्रभारी और उनकी टीम की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। गौर करने वाली बात यह है कि देवास गेट थाने में स्टाफ की भारी कमी होने के बावजूद यहाँ के जांबाज पुलिसकर्मी कभी अपने कदमों को पीछे नहीं खींचते। संसाधनों की कमी और वर्कलोड के भारी दबाव के बाद भी थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने जिस मुस्तैदी से इन बदमाशों को दबोचा है, वह शहर की सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्टाफ कम होने के बाद भी देवास गेट पुलिस का इकबाल बुलंद है और वे हर उस गुंडे का इलाज ‘ऑन द स्पॉट’ करने का दम रखते हैं जो उज्जैन की अमन-चैन में खलल डालने की कोशिश करता है। पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि खैरात के राशन पर पलकर चाकूबाजी का शौक पालने वाले ‘छर्रों’ का अगला ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल की कालकोठरी होगी। अब इन बदमाशों को समझ आएगा कि किश्त मांगकर गुजारा करना और कानून की बेड़ियों में जकड़े जाना क्या होता है।










