हत्या और दुष्कर्म के तीन खूंखार आरोपी 20 फीट ऊंची दीवार फांदकर फरार

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खाचरौद। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित खाचरौद उपजेल से सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए तीन खतरनाक कैदियों के भागने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। गुरुवार की शाम करीब 7 से 7:15 बजे के बीच, जब जेल परिसर में सन्नाटा पसरने लगा था, तब हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में निरुद्ध तीन हवालाती कैदी जेल की 20 फीट ऊंची दीवार फांदकर रफूचक्कर हो गए। फरार हुए आरोपियों की पहचान नारायण पिता भेरूलाल जाट निवासी चंदवासला, गोपाल पिता बापूलाल निवासी मालीखेड़ी और गोविंद पिता आत्माराम निवासी नागदा के रूप में हुई है। इनमें से नारायण और गोपाल दुष्कर्म के आरोपी हैं, जबकि गोविंद पर हत्या का संगीन मामला दर्ज है और इन सभी का ट्रायल फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

जेल प्रशासन की घोर लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तीनों कैदियों ने भागने के लिए जेल के अंदर चल रहे मेंटेनेंस कार्य का सहारा लिया। बताया जा रहा है कि जेल में इन दिनों पुताई का काम चल रहा था और ये तीनों कैदी महिला सेल के समीप दीवार की पुताई कर रहे थे। कार्य समाप्ति के बाद कैदियों ने पेंट के डिब्बे तो जमा कर दिए, लेकिन दीवार के पास खड़ी सीढ़ी को वहीं छोड़ दिया गया। जेल प्रहरियों की सतर्कता में कमी का फायदा उठाते हुए तीनों कैदी तेजी से सीढ़ी पर चढ़े और देखते ही देखते 20 फीट ऊंची दीवार को पार कर गए। घटना के समय मौके पर केवल एक प्रहरी की तैनाती की बात सामने आ रही है, जो कैदियों को रोकने की कोशिश करता तब तक वे उसकी पहुंच से दूर जा चुके थे।

जेल से सटे गांव चौकी जुर्नादा के ग्रामीणों ने इन तीनों को एक साथ भागते हुए देखा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस फरारी की योजना काफी पहले से और बेहद सुनियोजित तरीके से बनाई गई थी। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और एसडीएम नेहा साहू तत्काल मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने पूरे क्षेत्र में नाकेबंदी कर दी है और आरोपियों की तलाश में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया है। साथ ही, आम जनता को सतर्क करने और आरोपियों की पहचान के लिए सोशल मीडिया का भी व्यापक सहारा लिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि खाचरौद जेल में सुरक्षा में चूक का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले 11 महीनों के भीतर जेल ब्रेक की यह दूसरी बड़ी वारदात है, जिसने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले जनवरी 2025 में लूट का आरोपी रोहित शर्मा भी पुलिस अभिरक्षा से भागने में सफल रहा था। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और प्रहरियों की मुस्तैदी की पोल खोलकर रख दी है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन के लिए इन तीनों आरोपियों को दोबारा सलाखों के पीछे पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।