काला दिवस पर कांग्रेस का प्रचंड जन-आक्रोश

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राहुल गांधी और खड़गे पर बर्बर लाठीचार्ज के खिलाफ सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता, तानाशाही भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखा हमला!

विशेष राजनीतिक व खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा संवैधानिक संस्थाओं के खुलेआम दमन, लोकतंत्र की हत्या और तानाशाही रवैये के खिलाफ गांधीधाम शहर और तालुका कांग्रेस समिति ने एकजुट होकर अभूतपूर्व और उग्र विरोध प्रदर्शन किया। देश की राजधानी दिल्ली में निष्पक्ष चुनाव की मांग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से लोकतांत्रिक प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी तथा इंडिया गठबंधन के शीर्ष सांसदों व समर्पित कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा किए गए अमानवीय लाठीचार्ज, बर्बरतापूर्ण व्यवहार और गैर-कानूनी गिरफ्तारी के विरोध में पूरे गांधीधाम में जन-आक्रोश का ज्वालामुखी फूट पड़ा है।


7 अक्टूबर की इस शर्मनाक और बर्बर घटना को ‘संविधान और लोकतंत्र के लिए काला दिवस’ करार देते हुए गांधीधाम शहर और तालुका कांग्रेस समिति के तत्वावधान में शहर के सबसे व्यस्त और मुख्य व्यावसायिक केंद्र—रोटरी सर्किल, ओशिया मॉल के पास एक विशाल, आक्रामक और उग्र विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार की तानाशाही, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और पुलिस प्रशासन की हठधर्मिता के खिलाफ गगनभेदी नारेबाजी की गई। जैसे ही कांग्रेस का यह विशाल जन-सैलाब आगे बढ़ने लगा, बौखलाए पुलिस प्रशासन ने लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कुत्सित नीयत से कार्यकर्ताओं को बलपूर्वक रोक लिया। पुलिस ने बर्बरता दिखाते हुए दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में लिया और बी-डिविजन पुलिस स्टेशन ले गई।

लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरा गांधीधाम कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व
गांधीधाम महानगर कांग्रेस समिति के महामंत्री लतीफ आर. खलीफा द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस उग्र और ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन का कुशल नेतृत्व गांधीधाम शहर कांग्रेस अध्यक्ष भरत भाई गुप्ता और तालुका कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्रसिंह झाला ने किया।

इस उग्र प्रदर्शन में भाजपा की जनविरोधी नीतियों की धज्जियां उड़ाते हुए नितेशभाई लालण, राधा सिंह चौहान, कोकिलाबेन घेडा, बलवंतसिंह झाला, उमाबेन सैनी, अल्पेशभाई जरू, कपिलभाई पाधी, साजिदभाई ककल, घनश्यामभाई साधु, आर. एल. नागवाड़िया, परबतभाई खटाना, बाबूभाई आहीर, बेलाबेन आचार्य, सिकंदरभाई पठान, जुमाबेन महेश्वरी तथा नवीनभाई अबचुग सहित कांग्रेस पार्टी के तमाम फ्रंटल संगठनों के अग्रिम पंक्ति के नेता, जिला व तालुका पदाधिकारी और सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ता अपनी जान की परवाह किए बिना भारी संख्या में उपस्थित रहे।

लाठियों और गिरफ्तारी के दम पर कब तक दबाओगे जनता की आवाज?

अवंतिका के युवराज भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और स्थानीय तंत्र से यह सीधा और चुभता सवाल पूछता है कि क्या देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना भी अब अपराध हो गया है? जब देश के शीर्ष नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाते हैं, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं; और जब गांधीधाम में कांग्रेस कार्यकर्ता उस बर्बरता का विरोध करते हैं, तो उन्हें पुलिस की गाड़ियों में ठूंसकर जेल भेजा जाता है।

यह दमनकारी रवैया साफ दर्शाता है कि भाजपा सरकार सत्ता के अहंकार में पूरी तरह अंधी हो चुकी है और उसे लोकतंत्र तथा संविधान की मर्यादाओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। गांधीधाम की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस की इन गीदड़ धमकियों और गिरफ्तारियों से डरने वाले नहीं हैं। जब तक देश में लोकतंत्र की बहाली नहीं हो जाती और संवैधानिक संस्थाओं का दमन बंद नहीं होता, तब तक अवंतिका के युवराज की कलम और कांग्रेस का यह जनांदोलन भाजपा के इस निरंकुश शासन के खिलाफ सड़कों से लेकर गलियारों तक पूरी शिद्दत से जारी रहेगा!