गांधीधाम में टेलीकॉम कंपनी और फर्जीवाड़े का बड़ा खेल

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20 साल पुराना सिम पोर्ट करवाकर दूसरे के नाम किया ए-डिवीजन थाने पहुँची शिकायत!

विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। गुजरात के गांधीधाम शहर में टेलीकॉम कंपनियों के स्टोर्स और जालसाजों की मिलीभगत से जुड़ा एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा बेनकाब हुआ है। करीब दो दशकों (20 वर्षों) से लगातार इस्तेमाल किए जा रहे एक नागरिक के वैध मोबाइल नंबर को बिना उसकी अनुमति, बिना दस्तावेज सत्यापन और बिना किसी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के किसी अज्ञात व्यक्ति के नाम ट्रांसफर और अन्य टेलीकॉम कंपनी में पोर्ट करा दिया गया। इस घिनौने खेल की शिकार पीड़ित नागरिक ने अब गांधीधाम ए-डिवीजन पुलिस स्टेशन में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की गुहार लगाई है।

प्राप्त आवेदन और पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, न्यू भारत नगर निवासी पीड़ित लक्ष्मणभाई मालशीभाई मतिया का वोडाफोन कंपनी का सिम नंबर *****63422 उनका Vivo Y73 मोबाइल फोन गुम होने के बाद से विवादों में आ गया। पीड़ित 23 मई 2026 को जुनी सुंदरपुरी खोडियार माता मंदिर के पास से अपना मोबाइल फोन गंवा बैठा था। इसके बाद जब पीड़ित ने अपने इस 20 साल पुराने नंबर को दोबारा जारी कराने के लिए वोडाफोन कंपनी से संपर्क किया, तो कंपनी के गैर-जिम्मेदाराना जवाब और धांधली ने उसके पैर तले ज़मीन खिसका दी। कंपनी की ओर से बताया गया कि 5 जून को यह नंबर किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति के नाम पर एयरटेल कंपनी में पोर्ट कराया जा चुका है।

बैंक खातों, अस्पताल और निजी सुरक्षा पर सीधा डाका
पीड़ित लक्ष्मणभाई का आरोप है कि यह 20 साल पुराना नंबर उनके जीवन की सभी मुख्य बुनियादी सेवाओं से जुड़ा हुआ है। उनके बैंक खाते, ऑनलाइन पेमेंट सोशल मीडिया और यहाँ तक कि गंभीर बीमारी के इलाज से जुड़ी अस्पतालों की तमाम फाइलें व केस हिस्ट्री इसी नंबर से रजिस्टर्ड हैं। मोबाइल गुम होने के बाद अज्ञात व्यक्ति ने न केवल फोन का लॉक खोला, बल्कि पीड़ित से फोन लौटाने के नाम पर गूगल पे के जरिए ₹500 की ऑनलाइन राशि भी ऐंठ ली। इसके बाद टेलीकॉम कंपनी के स्थानीय एजेंटों की आपराधिक साठगांठ से इस नंबर को किसी अन्य कंपनी में पोर्ट करवाकर दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज करा दिया गया।

यह पूरा घटनाक्रम सीधे तौर पर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कड़े नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाता है। सवाल यह उठता है कि किसी भी सिम कार्ड को पोर्ट कराने या दूसरे के नाम ट्रांसफर करने के लिए आवश्यक आधार वेरिफिकेशन, फोटो, बायोमेट्रिक इम्प्रेशन और ओटीपी की प्रक्रिया किसके फर्जी दस्तावेजों पर पूरी की गई? क्या टेलीकॉम कंपनियों के फ्रेंचाइजी और स्टोर्स में बैठकर कर्मचारी चंद पैसों के लालच में साइबर अपराधियों को दूसरों के एक्टिव सिम बेच रहे हैं?

पुलिस की जांच और कंपनियों पर कानूनी गाज का समय
पीड़ित ने गांधीधाम ए-डिवीजन पुलिस स्टेशन में आवेदन देकर मांग की है कि उनके 20 साल पुराने नंबर का लोकेशन ट्रेस किया जाए, मोबाइल बरामद किया जाए और उन जालसाजों के खिलाफ सख्त एफआईआर दर्ज की जाए जिन्होंने बिना किसी अधिकार के उनका सिम पोर्ट किया। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और टेलीकॉम कंपनी से पोर्टेबिलिटी में जमा कराए गए कागजात की मांग की जा रही है।

अवंतिका के युवराज यह सीधा और तीखा प्रहार करता है कि अगर टेलीकॉम कंपनियों के स्टोर्स पर बैठे अधिकारी और कर्मचारी इतने बेखौफ हो चुके हैं कि 20 साल पुराने चालू नंबर को रात-रात किसी अज्ञात को पोर्ट कर दें, तो गांधीधाम का कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं है। किसी भी आम आदमी के बैंक खाते खाली करवाने और उसकी निजी जिंदगी को खतरे में डालने वाले इस फर्जी पोर्टेबिलिटी रैकेट की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इस खेल में शामिल कंपनी अधिकारियों और जालसाजों को सीधे जेल की सलाखों के पीछे धकेलना ही एकमात्र रास्ता है।