DPT की लावारिस ज़मीन बनी बेजुबान मवेशियों के लिए मौत का अखाड़ा, गंदगी के बीच पॉलिथीन निगलने को मजबूर गौवंश!

विशेष खोजी रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/गांधीधाम-कच्छ)। धर्म, सनातन और गौसेवा का मंचों व सोशल मीडिया पर जोर-शोर से ढोल पीटने वाले तथाकथित धर्मध्वजाधारियों और दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPT) के बेपरवाह प्रशासनिक तंत्र का दोहरा और घिनौना चरित्र गांधीधाम में सरेआम बेनकाब हो चुका है। DPT क्षेत्र की लावारिस पड़ी अरबों रुपये की ज़मीन पर फैली भयावह गंदगी की तस्वीरें केवल कचरे के पहाड़ नहीं दिखातीं, बल्कि यह चीख-चीखकर गवाही देती हैं कि DPT के ज़िम्मेदार अफ़सरों के दिलों में इंसानियत और संवेदनशीलता पूरी तरह मर चुकी है। चारों तरफ फैला ज़हरीला घरेलू कचरा, प्लास्टिक, पॉलिथीन, केमिकल मलबे के अवशेष और सड़ती गंदगी के बीच बेजुबान गौवंश पेट भरने के लिए ज़हरीला कचरा और पॉलिथीन निगलने को मजबूर है।

ज़मीनी पड़ताल में जो सबसे शर्मनाक और विस्फोटक सच सामने आया है, वह यह है कि DPT के आला अधिकारियों के लिए यह ज़मीन अब केवल धन-उगाही और काली कमाई का अड्डा बनकर रह गई है। सवाल यह उठता है कि आखिर शहरभर से और बड़ी-बड़ी कंपनियों से कचरा लेकर आने वाली गाड़ियों को यहाँ सरेआम कचरा खाली करने की अनधिकृत परमिशन किसने दी? घर-घर से और औद्योगिक इकाइयों से ट्रकों में भरकर लाया गया ज़हरीला कचरा यहाँ लाकर पटक दिया जाता है। पहले इस कचरे और पॉलिथीन के मलबे को आग के हवाले करके पूरे शहर की हवा में ज़हर घोला जाता है, और जो अवशेष बच जाते हैं, उन्हें यह बेजुबान गौवंश खाने को मजबूर होता है।

मंचों पर गौसेवा का ढोंग और धरातल पर घिनौना सन्नाटा
इंसानों द्वारा फेंकी गई यह गंदगी अब बेजुबान जानवरों के लिए धीमे ज़हर का मैदान बन चुकी है। प्लास्टिक और पॉलिथीन से भरे इस कचरे को खाकर रोज़ाना दर्जनों गौवंश अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं। विडंबना देखिए कि जो राजनीतिक और सामाजिक चेहरा हर दूसरे दिन गौमाता के नाम पर भाषण झाड़ता दिखाई देता है, वह DPT की इस ज़मीन पर तड़पते और कचरा खाते गौवंश को देखकर मौन साधे बैठा है। क्या DPT के अधिकारियों की आँखें इतनी धन-लोलुपता में अंधी हो चुकी हैं कि उन्हें अपनी ही सीमा में फैली यह भयावह तबाही और मवेशियों की मौत नज़र नहीं आ रही?
यह मामला सिर्फ गंदगी का नहीं, बल्कि शासकीय संसाधनों के आपराधिक दुरुपयोग और DPT प्रशासन की घोर विफलता का है। अगर DPT की ज़मीन पर अनधिकृत रूप से कचरा गाड़ियों को डंपिंग की इजाज़त दी जा रही है, तो इसके पीछे मोटी कट-मनी और कमीशनखोरी का खेल चल रहा है।
अवंतिका के युवराज यह सीधा सवाल दागता है कि आखिर DPT का सुरक्षा महकमा और विजिलेंस विंग किस नींद में सो रहा है? कचरा फेंकने वाली गाड़ियों के मालिकों, कंपनियों और इस ज़मीन की निगरानी के नाम पर तनख्वाह डकारने वाले अधिकारियों पर अब तक आपराधिक मुकदमे दर्ज क्यों नहीं किए गए?
यदि DPT प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से इस लावारिस भूखंड की बाउंड्री वॉल बनाकर कचरा डंपिंग पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया और सफाई अभियान चलाकर बेजुबान मवेशियों की जान बचाना सुनिश्चित नहीं किया, तो अवंतिका के युवराज इस पूरे कचरा माफ़िया और DPT के ज़िम्मेदार अफ़सरों के गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब करके रख देगा। बेजुबान जानवरों की हर एक मौत का हिसाब प्रशासनिक तंत्र को देना ही पड़ेगा।










