मैडम राखी सूर्यवंशी ने बच्चों के भविष्य को रौंदकर स्कूल को बनाया पार्टी पैलेस, क्लासरूम में स्कूली बच्चों के साथ गानों पर हुआ डांस, शिक्षा विभाग में हड़कंप
विशेष रिपोर्ट (अवंतिका के युवराज/उज्जैन)। उज्जैन जिले के ग्राम दताना स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय इन दिनों शिक्षा का मंदिर कम और मनोरंजन का रंगमंच ज्यादा नजर आ रहा है। बीते दिन 7 अगस्त 2026 को इस सरकारी स्कूल में जो शर्मनाक नजारा देखने को मिला, उसने पूरे शिक्षा विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था के मुंह पर कालिख पोत दी है।
विद्यालय में पदस्थ शिक्षिका राखी सूर्यवंशी ने अपने जन्मदिन के मौके पर पठन-पाठन को पूरी तरह ताक पर रखकर कक्षा 7वीं के क्लासरूम के भीतर बाकायदा फिल्मी गानों पर डांस पार्टी का आयोजन कर डाला। जिस पवित्र प्रांगण में बच्चों की कलम की सरसराहट और ज्ञान की बातें गूंजनी चाहिए थीं, वहां तेज आवाज में अश्लील और तड़क-भड़क वाले फिल्मी गानों की धुन बज रही थी। इस जश्न के माहौल में शिक्षिकाओं के साथ-साथ छोटे-बड़े सभी स्कूली बच्चे भी क्लासरूम में फिल्मी गानों पर डांस करते नजर आए। मैडम के इस अति-आत्मविश्वास और बेलगाम रवैये ने शासकीय शिक्षा प्रणाली की बची-कुची गरिमा को भी पूरी तरह तार-तार कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर और डरावना पहलू यह है कि इस नाच-गाने के ड्रामे में केवल राखी सूर्यवंशी ही शामिल नहीं थीं, बल्कि उनके साथ स्कूल की 3 अन्य शिक्षिकाएं भी बच्चों के साथ जश्न में चूर थीं। पढ़ाई-लिखाई के समय को इस तरह जन्मदिन की पार्टी में तब्दील कर देना यह साफ दर्शाता है कि स्कूल के भीतर अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है। शिक्षिकाओं के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते स्कूल में पढ़ाई का माहौल पूरी तरह चौपट हो चुका है, जहां पढ़ाई की जगह निजी उत्सवों को प्राथमिकता दी जा रही है।
दताना के इस शासकीय स्कूल में ज्यादातर गरीब, मजदूर और ग्रामीण तबके के मासूम बच्चे अपने सुनहरे भविष्य की उम्मीद लेकर पढ़ने आते हैं। सरकार इन शिक्षकों को जनता के टैक्स की कमाई से भारी-भरकम वेतन देती है ताकि गांव के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिल सके। परंतु जब शिक्षिकाएं खुद पढ़ाई के कीमती समय में गंदे गानों पर नाच-गाकर अपना जन्मदिन मनाएं और छोटे-बड़े सभी बच्चों को क्लासरूम में डांस में शामिल कर लें, तो उन अभागे बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा। जिन नौनिहालों को उस समय गणित, विज्ञान और भाषा का ज्ञान मिलना चाहिए था, उन्हें मैडमों की इस पार्टी का हिस्सा बनाकर नचवाया जा रहा था। बच्चों के कीमती भविष्य और पढ़ाई के घंटों को इस तरह कचरे के डिब्बे में फेंकना सीधे-सीधे नौनिहालों के जीवन के साथ किया जा रहा बड़ा खिलवाड़ है।
दताना शासकीय स्कूल से आई इस कड़वी सच्चाई ने उज्जैन जिला शिक्षा अधिकारी और संभाग के तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की नींद उड़ाने का काम किया है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी स्कूलों को अब निजी अय्याशी और पार्टी मनाने की खुली छूट दे दी गई है। क्लासरूम के भीतर पढ़ाई के समय में फिल्मी गानों पर इस तरह का माहौल बनाने वाली शिक्षिका राखी सूर्यवंशी और इस पूरे मामले में शामिल जिम्मेदार तंत्र पर तुरंत निलंबन की गाज कब गिरेगी।










