खाकी की नाक के नीचे प्रेमिका ने काटा पत्नी का गला

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उज्जैन। शहर में कानून व्यवस्था और खाकी का खौफ किस कदर दम तोड़ चुका है, इसकी एक रूह कंपा देने वाली और शर्मनाक बानगी पवासा थाना क्षेत्र में देखने को मिली। अवैध संबंधों की आग में अंधी हो चुकी एक प्रेमिका ने सरेराह, वो भी थाने के ठीक सामने, अपने बॉयफ्रेंड की पत्नी पर ब्लेड से जानलेवा हमला कर उसका गला रेत दिया। लहूलुहान हालत में पीड़िता को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसके गले में बारह टांके आए हैं और वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस पुलिस की जिम्मेदारी जनता को सुरक्षा देना है, उसकी नाक के नीचे इतनी बड़ी वारदात हो गई और वो तमाशबीन बनी रही। यह सनसनीखेज घटना बजरंग नगर इलाके की है, जहां शुभम प्रजापत के शादीशुदा होने के बाद भी एक युवती से प्रेम संबंध चल रहे थे। आरोपी प्रेमिका पिछले कई दिनों से शुभम के पूरे परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी।

हद तो तब हो गई जब विवाद के दौरान यह सिरफिरी प्रेमिका शुभम के घर में घुस गई और वहां जमकर हाथापाई करते हुए उसकी अठारह महीने की मासूम बच्ची को भी बेरहमी से जमीन पर पटक दिया। इस गुंडागर्दी और प्रताड़ना से तंग आकर जब पीड़ित परिवार अपनी जान बचाने और गुहार लगाने पवासा थाने पहुंचा, तो खाकी की मुस्तैदी का ढोल वहीं फूट गया। आरोपी प्रेमिका ने थाने की दहलीज के ठीक बाहर पुलिस के खौफ को ठेंगे पर रखते हुए शुभम की पत्नी के गले पर ब्लेड से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। थाने के बाहर मचते इस खूनी गदर को देख जब तक पुलिसकर्मी बाहर दौड़ते, तब तक महिला का गला लहू से लाल हो चुका था। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कागजी औपचारिकता शुरू कर दी है, लेकिन इस दुस्साहस ने पुलिसिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह कोई पहला मामला नहीं है जब उज्जैन पुलिस की सुस्ती और ढुलमुल रवैये के कारण अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हुए हों। कुछ समय पूर्व ठीक ऐसा ही एक मामला चिमनगंज मंडी थाने के अंतर्गत भी सामने आया था, जहां एक प्रेमिका खुलेआम अपने प्रेमी के घर में घुसकर उसकी पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट कर आई थी। विडंबना देखिए कि उस दौरान भी चिमनगंज मंडी थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय कागजों के खेल में उलझा दिया। न्याय की आस में भटक रही वह पीड़ित पत्नी आज भी खाकी के गलियारों में न्याय की भीख मांग रही है। वह बेचारी संभागायुक्त से लेकर आईजी कार्यालय तक और एसपी दफ्तर से लेकर महिला थाने तक की चौखट पर अपना माथा टेक चुकी है, लेकिन खाकी की फाइलों का वजन शायद इस गरीब की आंसुओं से ज्यादा भारी है। उज्जैन में रहने वाली वह दबंग प्रेमिका आज भी खुलेआम घूम रही है, पीड़ित परिवार को डरा-धमका रही है, मारपीट कर रही है, लेकिन पुलिस प्रशासन के आला हुक्मरान किसी दिव्य ज्ञान की प्रतीक्षा में मौन साधे बैठे हैं।

कानूनविदों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि जब थानों की पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है और छोटी शिकायतों पर अपराधियों को खुली छूट दे देती है, तो अपराधियों का हौसला इतना बढ़ जाता है कि वे पवासा जैसी वारदात को सीधे थाने के बाहर ही अंजाम देने से नहीं हिचकिचाते। अब जनता के जेहन में यह तीखा सवाल तैर रहा है कि क्या खाकी महकमा हमेशा किसी बड़ी और खूनी वारदात के होने का ही इंतजार करता रहता है? क्या जब तक सरेराह गला न रेत दिया जाए या किसी की जान न चली जाए, तब तक कागजी औपचारिकता पूरी नहीं होती? अगर पूर्व में आए चिमनगंज मंडी वाले मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उज्जैन की उस दबंग महिला को सलाखों के पीछे भेजा होता, तो आज पवासा थाने के बाहर किसी दूसरी महिला का गला रेतने की हिम्मत कोई नहीं कर पाता। थानों के सामने सुरक्षित महसूस करने वाली जनता अब यह सोचने पर मजबूर है कि जब रक्षक की नाक के नीचे ही अपराधी ब्लेड भांज रहे हों, तो आम आदमी अपनी सुरक्षा के लिए कहां जाए। हमारे समाचार पत्र की पैनी नजर पुलिस के इस लचर रवैये और पवासा मामले की हर एक विधिक कार्रवाई पर लगातार बनी हुई है।