उज्जेन। नगर निगम के गलियारों में नैतिकता को शर्मसार करने वाला पीयूष भार्गव का वह काला अध्याय एक बार फिर सुर्खियों में है, जिसने करीब एक साल पहले पूरे महकमे को कलंकित कर दिया था। 13 मार्च 2025 को नगर निगम में पदस्थ एक महिला उपयंत्री ने भार्गव पर अश्लील चैटिंग शारीरिक संबंध बनाने का दबाव और घर बुलाने जैसे रूह कपाने वाले गंभीर आरोप लगाए थे। “आई मिस यू” और “आई लव यू” जैसे अभद्र मैसेज भेजकर पद की गरिमा को तार-तार करने वाले भार्गव की शिकायत ने तब खूब सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन सिस्टम की सुस्ती ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की पूरी कोशिश की थी।
क्लीन चिट देने वाली पुरानी समिति पर उठे सवाल, हाईकोर्ट की चाबुक के बाद गठित नई समिति ने उजागर किया सच।
तात्कालीन आयुक्त आशीष पाठक द्वारा गठित पुरानी समिति ने तो जैसे भार्गव को पवित्र साबित करने की कसम खा ली थी और क्लीन चिट दे दी थी लेकिन अन्याय के खिलाफ हाईकोर्ट ने जब चाबुक चलाया तो निगम को मजबूरन नई आंतरिक परिवाद समिति गठित करनी पड़ी। सरिता मांडरे की अध्यक्षता वाली इस उच्च स्तरीय समिति ने जब योगेंद्र पटेल वीणा बौरासी श्वेता यादव और शिवमंगला सिसौदिया के साथ मिलकर जांच की तो भार्गव के पापों का घड़ा फूट गया। समिति ने तीनों प्रमुख आरोपों को सही पाया है और अब भार्गव का पॉलीग्राफ टेस्ट एवं ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराने की कड़ी अनुशंसा की है।
दागी अधिकारी को संविदा का इनाम देने की तैयारी, सिंहस्थ डिवीजन में मलाईदार पद के लिए बुना जा रहा ताना-बाना
हद तो तब हो गई जब एक तरफ भार्गव पर अश्लीलता के आरोपों की पुष्टि हो रही है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम का सिंहस्थ डिवीजन उनके स्वागत में रेड कारपेट बिछाने की तैयारी कर रहा है। निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए परामर्शी पद के जो विज्ञापन निकाले गए हैं, उनकी शर्तें (25 साल का अनुभव और 70 साल की उम्र) चीख-चीख कर कह रही हैं कि यह पूरा खेल सिर्फ और सिर्फ भार्गव को दोबारा निगम में फिट करने के लिए रचा गया है। संविदा पीरियड खत्म होने के बाद घर बैठे भार्गव को फिर से मलाई चटाने की यह साजिश उजागर करती है कि निगम में भ्रष्टाचार और कदाचार को कैसे पाला-पोसा जाता है।
पुलिस फाइलों में दबाया गया मामला, रसूख के दम पर जांच को ठंडे बस्ते में डालने का घिनौना खेल जारी
हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा मामला होने के बावजूद पुलिस जांच अब तक लंबित है। अश्लील चैटिंग और शारीरिक शोषण की कोशिश जैसे संगीन मामले में पुलिस की यह कछुआ चाल कई सवाल खड़े करती है। क्या भार्गव का रसूख कानून से भी बड़ा है? समिति द्वारा पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग ने यह साफ कर दिया है कि भार्गव ने जो झूठ की दीवार खड़ी की थी उसे ढहाने का समय आ गया है। इस इतने गंभीर आरोपों और जांच रिपोर्ट के बाद भी साहब की अकड़ कम नहीं हुई है, जब इस पूरे मामले में उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा मानो वे खुद को कानून और जवाबदेही से ऊपर समझ बैठे हों।
नानाखेड़ा से इंदौर रोड तक फैला सेटिंग का जाल विश्व प्रसिद्ध मार्ग पर निर्माणाधीन विशाल होटल बना चर्चा का केंद्र।
पीयूष भार्गव के रसूख और मेहरबानी की कहानियाँ सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सड़कों पर कंक्रीट के रूप में खड़ी दिखाई दे रही हैं। चर्चा है कि नानाखेड़ा स्थित इंदौर रोड जैसे बेशकीमती और विश्व प्रसिद्ध मार्ग पर एक विशाल होटल का निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग और इसके पीछे की मजबूत दीवार के रूप में भी भार्गव का ही नाम उछल रहा है। सूत्रों की मानें तो नियमों को ताक पर रखकर इस होटल को जो संरक्षण मिल रहा है, उसके पीछे वही परामर्शी खेल है जिसे दोबारा निगम में स्थापित करने की तैयारी चल रही है। क्या इस विशाल होटल के निर्माण और भार्गव को दोबारा संविदा पर लाने के बीच कोई गहरा व्यावसायिक रिश्ता है? यह शहर में कौतूहल और जांच का विषय बना हुआ है।
क्या अश्लील आचरण करने वालों को ही मिलेगा सिंहस्थ की मॉनिटरिंग का जिम्मा?
यह शहर के सम्मान और नगर निगम की शुचिता का सवाल है। क्या उज्जैन नगर निगम इतना कंगाल हो गया है कि उसे गंभीर आरोपों से घिरे और जांच में दोषी पाए गए व्यक्ति के अलावा कोई और योग्य सिविल इंजीनियर नहीं मिल रहा? 70 साल तक की उम्र की छूट और विशेष अनुभव की शर्तें किसी भी आम नागरिक को यह समझने के लिए काफी हैं कि अंधा बांटे रेवड़ी अपनों को दे। यदि ऐसे दागी अधिकारियों को फिर से पद नवाजा जाता है, तो यह उन ईमानदार महिला अधिकारियों का अपमान होगा जो रोज दफ्तरों में अपनी सुरक्षा और सम्मान की जंग लड़ रही हैं।










