उज्जैन।धार्मिक नगरी को आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में नगर निगम प्रशासन ने अब तक का सबसे मानवीय और सख्त रुख अख्तियार किया है। केटीएम शोरूम से नीलगंगा चौराहे तक होने वाले सड़क चौड़ीकरण की मुहिम केवल विकास का रास्ता नहीं खोल रही बल्कि उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण बनी है जिनके आशियाने इस विकास की जद में आ रहे हैं। नगर निगम के शीर्ष नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रगति के इस महायज्ञ में किसी भी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप, प्रशासन ने प्रभावितों को मुआवजा या नगर निगम की आधुनिक मल्टी में नया आशियाना चुनने का विकल्प देकर संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश की है। यह सड़क केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं होगी, बल्कि इंदौर रोड और माधवनगर रेलवे स्टेशन के बीच एक सेतु का काम करेगी, जिससे शहर के व्यस्ततम तीन बत्ती चौराहे पर यातायात का बोझ नाममात्र रह जाएगा।
कबाड़ और संपदा की पाई-पाई का होगा हिसाब अब विकास की राह में नहीं बहेगा राजस्व का एक भी रुपया।
इंदौर रोड के चौड़ीकरण के दौरान निकलने वाली हर एक ईंट और जड़ से उखड़ने वाले हर एक पेड़ की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व योजना तैयार की है। विकास की बलि चढ़ने वाले पेड़-पौधों उखाड़ी गई जालियों और खंभों से निकलने वाले मलबे को अब कबाड़ समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष उत्तरदायी प्रकोष्ठ का गठन किया जा रहा है। जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम के एक निष्ठावान अधिकारी को सौंपी जाएगी। यह अधिकारी एक-एक पुरानी जाली लोहे के खंभे और लकड़ी का विस्तृत ब्योरा तैयार करेगा। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विस्थापन से अर्जित होने वाला हर एक पैसा सीधे नगर निगम के राजकोष में जमा हो। भ्रष्टाचार के उन सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया है जहाँ से पूर्व में स्क्रैप के नाम पर सरकारी संपत्ति निजी जेबों में चली जाती थी। अब नगर निगम का खजाना ही विकास की पहली प्राथमिकता होगा।
पुरातन दस्तावेजों की स्कैनिंग से कांपे पुराने खिलाड़ी दफन हो चुके भ्रष्टाचार के काले पन्ने अब बाहर आने को तैयार।
नगर निगम के गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सूत्रों के हवाले से यह खबर आई कि प्रशासन ने पुराने कालखंड के कच्चे-चिट्ठों’ को खंगालना शुरू कर दिया है। नगर निगम के ही कुछ प्रबुद्ध और अनुभवी जानकारों से मिली गोपनीय सूचनाओं के आधार पर अब उन पुराने जिम्मेदारों की पहचान की जा रही है। जिन्होंने विकास कार्यों के नाम पर अतीत में भ्रष्टाचार की लंबी इबारत लिखी थी। फाइलें अब केवल अलमारियों की शोभा नहीं बढ़ाएंगी बल्कि उनकी हर एक एंट्री की बारीकी से जांच होगी। यह उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो पद छोड़ने के बाद अपनी कारगुजारियों को दफन मान बैठे थे। पुराने भ्रष्टाचार के काले चिट्ठे अब उजाले में आने के लिए तैयार हैं और जांच की आंच उन सफेदपोशों तक पहुंचना तय है जिन्होंने निगम के संसाधनों का दुरुपयोग किया था। प्रशासन की पैनी नजर अब हर उस पुराने हस्ताक्षर पर है जिसके पीछे गबन की कहानी छुपी हुई है।
केवल मकान ही नहीं सामान शिफ्टिंग तक का जिम्मा संभालेगा निगम मानवीय संवेदनाओं के साथ बदल रही शहर की तस्वीर।
विकास की इस यात्रा में नगर निगम ने एक कदम आगे बढ़कर अभिभावक की भूमिका निभाई है। जब प्रभावित रहवासी लीला बाई दायमा ने सामान शिफ्टिंग को लेकर अपनी चिंता जताई तो प्रशासन ने तुरंत आश्वासन दिया कि प्रभावितों को केवल घर की चाबी ही नहीं सौंपी जाएगी बल्कि उनके घरेलू सामान को सुरक्षित नई मल्टी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी नगर निगम स्वयं उठाएगा। यह पहली बार है जब कोई सरकारी विभाग सामान शिफ्ट करने के लिए भी सहायता प्रदान कर रहा है। निगम की आधुनिक मल्टी में पेयजल बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहले से ही तैयार हैं। ताकि किसी भी परिवार को नए परिवेश में बसने में रत्ती भर भी परेशानी न हो। विस्थापितों को मिलने वाले दोहरे विकल्प—मुआवजा या भवन—ने जनता के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास को और गहरा कर दिया है जिससे उज्जैन के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलना तय है।










