मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डीजीपी को दिया ‘फ्री-हैंड’

भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी पत्रकारिता और यूट्यूब के नाम पर अवैध वसूली का धंधा चलाने वालों पर राज्य सरकार अब बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि तथ्यों से खिलवाड़ कर सरकार की छवि बिगाड़ने, विभागों को बदनाम करने और अधिकारियों सहित आम जनता को प्रताड़ित करने वाले यूट्यूबर्स को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने डीजीपी कैलाश मकवाना को सख्त कार्रवाई के लिए पूरी छूट देते हुए ‘फ्री-हैंड’ दे दिया है। मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी जी. जनार्दन के कार्यकाल का विशेष उल्लेख किया और निर्देश दिए कि जिस तरह वर्ष 2004 में उज्जैन एसपी रहते हुए जी. जनार्दन ने अराजक तत्वों पर नकेल कसी थी, ठीक वैसी ही जीरो टॉलरेंस वाली कार्रवाई प्रदेश भर में होनी चाहिए।
वर्तमान में प्रदेश के हर शहर और कस्बे में यूट्यूब चैनलों का एक अनियंत्रित जाल सा बिछ गया है। बिना किसी वैधानिक रजिस्ट्रेशन या सरकारी मान्यता के, कई लोग खुद को पत्रकार बताकर भोले-भले लोगों को ब्लैकमेल करने का काम कर रहे हैं। ये कथित यूट्यूबर्स किसी भी व्यक्ति या विभाग की छवि खराब करने के लिए बिना प्रमाण के वीडियो चलाने में जरा भी देर नहीं करते और इसे एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की इस सख्ती से अब उन भ्रष्टाचारियों के चेहरे भी उजागर हो गए हैं जो यूट्यूब की आड़ में अपना काला कारोबार चला रहे थे।
विशेष रूप से उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को इन कथित यूट्यूबर्स और उनके नेटवर्क द्वारा निशाना बनाने की खबरें लगातार आ रही हैं। दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से हजारों रुपये की चपत लगाई जा रही है, जिससे न केवल धर्म नगरी की साख गिर रही है बल्कि शहर की प्रतिष्ठा भी धूमिल हो रही है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि धार्मिक स्थलों पर सक्रिय ऐसे गिरोह जो रसूख दिखाकर अवैध वसूली करते हैं, उन पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही सीएम ने सड़क हादसों पर चिंता जताते हुए केंद्रीय निर्देशों के पालन और पुलिस भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के भी निर्देश दिए हैं।










