बिना सांठगांठ के 4 समितियों का केंद्र मिलना नामुमकिन, क्या अधिकारियों की जेब गर्म कर चल रहा है खेल?
उज्जैन। जिला कंट्रोलिंग टीम की आधी रात की छापेमारी ने उज्जैन के मां आशापुरा वेयरहाउस में चल रहे जिस अवैध खेल को बेनकाब किया है। उसके तार सीधे प्रशासनिक दफ्तरों की कुर्सियों से जुड़े नजर आ रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि वेयरहाउस में अवैध गेहूं मिला सवाल यह है कि जिस वेयरहाउस का इतिहास ही ब्लैक लिस्ट का रहा हो उसे आखिर किस जादुई रसूख के दम पर 4-4 समितियों का केंद्र सौंप दिया गया? बिना विभाग के बड़े साहबों के आशीर्वाद के यह कागजी प्रक्रिया पूरी होना नामुमकिन है।

नियमों की बलि चढ़ाकर अधिकारियों ने बांटी रेवड़ियाँ
नियम कहते हैं कि समितियों का आवंटन दूरी और क्षमता के आधार पर होता है, लेकिन मां आशापुरा वेयरहाउस पर नियमों की ऐसी बलि चढ़ाई गई कि सारा फायदा एक ही केंद्र को दे दिया गया। सूत्र बताते हैं कि फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए जो ‘सुविधा शुल्क’ का पहिया घूमा है, उसने विभाग की आँखों पर पट्टी बाँध दी थी। जब रात 11 बजे टीम ने छापा मारा, तो अधिकारी भी हक्के-बक्के रह गए।
2023 में दागी हुआ, फिर भी मिली ‘अधिकारियों की शरण।
हैरानी की बात यह है कि 2023 में इसी वेयरहाउस को ब्लैक लिस्ट किया गया था। आखिर वह कौन सी ‘शक्ति’ थी जिसने इस दागी संस्थान को फिर से पवित्र कर दिया? क्या अधिकारियों ने पुराने रिकॉर्ड को रद्दी में फेंक दिया था? रात के अंधेरे में तड़के 3 बजे तक चली कार्रवाई के बाद भी अब मामले को ‘जांच’ के ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है, ताकि बड़े नामों को बचाया जा सके।
जांच का नाटक या होगा असली प्रहार?
संचालक ने जब वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी दलीलें रखीं, तो अधिकारियों की चुप्पी ने कई गहरे राज खोल दिए। यह चुप्पी साफ बताती है कि भ्रष्टाचार की इस गंगोत्री में ऊपर से नीचे तक सबने हाथ धोए हैं। प्रशासन अब इसे ब्लैक लिस्ट करने की बात तो कर रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उन अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी जिन्होंने फाइलों पर साइन करके नियमों की धज्जियां उड़ाईं?
कलेक्टर साहब, क्या उन कुर्सियों की भी तलाशी होगी जहाँ बैठकर भ्रष्टाचार की ये फाइलें तैयार हुईं? या फिर हमेशा की तरह केवल एक वेयरहाउस को मोहरा बनाकर असल ‘मगरमच्छों’ को बचा लिया जाएगा? अधिकारियों की कलम जब तक भ्रष्टाचार की स्याही से डूबी रहेगी, उज्जैन के किसानों का हक ऐसे ही वेयरहाउसों की भेंट चढ़ता रहेगा।










