देवास RTO का पारिवारिक शोरूम, सिंधी कॉलोनी के महल से संचालित हो रही समानांतर सरकार, सुभाष के कुनबे ने हाईजैक किया सरकारी सर्वर!
देवास। भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘अवंतिका के युवराज’ की कलम आज उस कड़वे और खौफनाक सच की परतों को उखाड़ने जा रही है, जिसने देवास क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की शुचिता को सरेआम नीलाम कर दिया है। देवास में सरकारी नियम और कायदे अब दफ्तर की फाइलों में नहीं, बल्कि सिंधी कॉलोनी की गलियों में स्थित सुभाष जैन के आलीशान बंगले और उसके कुनबे के इशारों पर दम तोड़ रहे हैं। यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘डिजिटल डकैती’ है, जहाँ सरकारी गोपनीयता की धज्जियां उड़ाते हुए विभाग का पूरा कंट्रोल एक निजी सिंडिकेट को सौंप दिया गया है। सूत्रों का दावा है कि इस काले साम्राज्य का असली सूत्रधार सुभाष जैन है, जिसने अपने भतीजे और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर RTO को एक ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ में तब्दील कर दिया है।
कुनबे के हाथ में विभाग की डिजिटल चाबी, जब जो फ्री हुआ वह बन गया ‘अघोषित आरटीओ’
हैरत की बात यह है कि देवास RTO के भीतर एक ऐसा ‘पारिवारिक शोरूम’ चल रहा है जहाँ योग्यता नहीं, बल्कि सुभाष जैन से रिश्ता मायने रखता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सिंधी कॉलोनी स्थित इस निजी निवास पर कंप्यूटरों का ऐसा जाल बिछा है कि सरकारी दफ्तर भी बौना नजर आए। यहाँ सुभाष का पूरा कुनबा बारी-बारी से अपनी ड्यूटी निभाता है; परिवार का जो भी सदस्य जब खाली या ‘फ्री’ होता है, वह तत्काल सिस्टम पर बैठकर वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन करने लगता है। मानों सरकारी पोर्टल कोई सोशल मीडिया अकाउंट हो, जिसे घर का कोई भी बच्चा या बड़ा अपनी मर्जी से संचालित कर सके। अधिकारियों की आईडी और पासवर्ड इस कुनबे की निजी जागीर बन चुके हैं, और सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस दबाव या लालच में सरकारी गोपनीयता का यह सौदा किया गया?
जिम्मेदारों की आईडी पर ‘बाहरी’ कब्ज़ा, क्या सिस्टम की मजबूरी बन गया है|
इस पूरे डिजिटल खेल में जिस आईडी का सबसे ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है, वह जिम्मेदारों से जुड़ी बताई जा रही है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि जिम्मेदारों जैसे नाम इस चक्रव्यूह में ऐसे फंसे हैं कि उनकी आईडी और पासवर्ड का रिमोट कंट्रोल पूरी तरह सुभाष और उसके भतीजे के पास है। सूत्र बताते हैं कि जिम्मेदार जैसे कर्मचारी शायद सिस्टम के भारी दबाव या किसी अनजाने डर के साये में हैं, क्योंकि यदि इस फर्जीवाड़े की गाज गिरी तो सबसे पहले उनकी ही नौकरी और भविष्य पर संकट आएगा। यह जानते हुए भी कि नियम अनुसार कार्य का समय सुबह 11:00 से शाम 6:00 बजे तक निर्धारित है, उनकी आईडी का उपयोग आधी रात को और रविवार की छुट्टियों में किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदारों इस अवैध संचालन से अनभिज्ञ हैं, या फिर उन्हें बलि का बकरा बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है?
नए शोरूम संचालकों के लिए खुशखबरी, देवास में अब आधी रात को भी होगा गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन!
यदि आप देवास में वाहनों का नया शोरूम खोल रहे हैं, तो आपको सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सुभाष जैन की ‘मिडनाइट सर्विस’ आपके लिए हाजिर है। देवास के कई रसूखदार शोरूम संचालक इस बहती गंगा में जमकर हाथ धो रहे हैं। जहाँ आम जनता दिन भर लाइन में लगकर परेशान होती है, वहीं इन रसूखदारों की गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन आधी रात के सन्नाटे में, AC कमरों में बैठकर चंद मिनटों में कर दिए जाते हैं। यह ‘RTO 2.0’ का जलवा ही है कि सरकारी सर्वर पर सूरज ढलने के बाद असली खेल शुरू होता है। जब पूरी दुनिया सोती है, तब सुभाष और उसका भतीजा नए रजिस्ट्रेशन की फाइलें दौड़ा रहे होते हैं। क्या प्रशासन को दिखाई नहीं दे रहा कि जो काम सरकारी समय में होना चाहिए, वह रात के 2:00 बजे किस नियम के तहत अंजाम दिया जा रहा है?
करोड़ों की प्रॉपर्टी और डिजिटल सेंधमारी, आखिर कब तक मौन रहेगा प्रशासन?
सिंधी कॉलोनी के उन दो बंगलों के भीतर चल रही इस ‘समानांतर सरकार’ की अगर बारीकी से जांच हो जाए, तो मध्यप्रदेश के सबसे बड़े डिजिटल घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। क्या जिला प्रशासन, पुलिस और आईटी सेल को इस बात की भनक नहीं है कि सरकारी आईडी का उपयोग निजी स्वार्थ और अवैध उगाही के लिए किया जा रहा है? यह सीधे तौर पर आईटी एक्ट का उल्लंघन और शासन के साथ धोखाधड़ी का मामला है। अधिकारियों की मौन सहमति यह चीख-चीख कर कह रही है कि भ्रष्टाचार की यह जड़ें बहुत गहरी हैं और इसका हिस्सा ऊपर तक पहुँच रहा है।
‘अवंतिका के युवराज’ प्रशासन से यह तीखा सवाल पूछता है कि आखिर देवास की जनता के टैक्स से चलने वाले विभाग को सुभाष जैन और उसके कुनबे की जागीर किसने बनने दिया? क्या कलेक्टर और संभाग आयुक्त इन ‘डिजिटल लुटेरों’ के गिरेबान तक हाथ डालेंगे, या फिर सिंधी कॉलोनी से चलने वाली यह अवैध सरकार ऐसे ही फलती-फूलती रहेगी?
देवास में अवंतिका के युवराज के पास मौजूद दस्तावेजी साक्ष्य उस महा-घोटाले की तस्दीक कर रहे हैं जिसने देवास RTO की साख को पूरी तरह निगल लिया है क्योंकि हमारे पास एसी हजारों गाड़ियों की काली सूची मौजूद है जिनका रजिस्ट्रेशन सरकारी दफ्तर के समय के बाद आधी रात को और रविवार की छुट्टियों में सुभाष जैन के कुनबे द्वारा बेखौफ होकर किया गया है। यह महज कुछ चुनिंदा गाड़ियों का मामूली मामला नहीं बल्कि हजारो से अधिक ऐसे वाहनों का कच्चा चिट्ठा है जिनका डेटा आरटीओ के सर्वर पर असामान्य समय में दर्ज हुआ है जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की गवाही दे रहा है। आधी रात के इन रजिस्ट्रेशन सुल्तानों के काले खेल की गवाही खुद सरकारी नंबर दे रहे हैं जिनमें MP41ZJ4493 का रात 10:43 बजे का खेल हो या फिर रविवार की छुट्टी के दिन MP41ZJ1013 का रात 10:11 बजे हुआ जादुई रजिस्ट्रेशन और साथ ही MP41ZJ1654 की रात 9:40 बजे की स्पेशल सर्विस सहित MP41ZJ6849 की रात 10:45 बजे की एंट्री और MP41ZH7599 का आधी रात 11:30 बजे का कारनामा स्पष्ट रूप से प्रमाणित है। सबसे हैरान करने वाला मामला MP41ZJ2993 का है जिसका रजिस्ट्रेशन रात के 2:00 बजे किया गया जब पूरा शहर सो रहा था लेकिन सुभाष जैन के घर का कंप्यूटर रूम धधक रहा था और सरकारी आईडी का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा था। यदि जिला प्रशासन या संभाग आयुक्त महोदय इन नंबरों और इनके आईपी एड्रेस की बारीकी से निष्पक्ष जांच करवा लें तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि ये तमाम आईडी देवास आरटीओ कार्यालय से नहीं बल्कि सिंधी कॉलोनी के उन आलीशान बंगलों से संचालित हो रही थीं जहाँ कानून का प्रवेश वर्जित माना जाता है।









