
उज्जैन। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में आज उस समय हड़कंप मच गया जब अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के बैनर तले समाज के प्रबुद्धजनों और पदाधिकारियों ने फिल्मी दुनिया के उन चेहरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जो अपनी कला की आड़ में सनातन परंपराओं और ब्राह्मण समाज को कलंकित करने का प्रयास कर रहे हैं। फिल्म ‘घूसखोरी पंडित’ के आपत्तिजनक शीर्षक और उसमें ब्राह्मण समाज को लक्षित कर दिखाई गई कथित अपमानजनक सामग्री के विरोध में आज समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर नजर आया। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेंद्र चतुर्वेदी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी माधव नगर थाने पहुंचे और फिल्म के निर्माता, निर्देशक सहित मुख्य अभिनेता के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने हेतु एक तीखा शिकायती आवेदन सौंपा।
ब्राह्मण समाज का स्पष्ट आरोप है कि फिल्म जगत में एक सोची-समझी साजिश के तहत ब्राह्मणों को नकारात्मक पात्रों के रूप में पेश करने का चलन बढ़ गया है। इस फिल्म का शीर्षक ही अपने आप में समाज की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला और विद्वता के प्रतीक ‘पंडित’ शब्द का उपहास उड़ाने वाला है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेंद्र चतुर्वेदी ने दोटूक शब्दों में कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी भी जाति या समुदाय के मान-मर्दन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फिल्म के निर्माता रितेश शाह, निर्देशक नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेई के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो ब्राह्मण समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा। समाज का मानना है कि जानबूझकर ऐसे विवादास्पद नाम रखे जाते हैं ताकि फिल्म को सस्ती लोकप्रियता मिले, लेकिन इस बार समाज अपनी अस्मिता के साथ खिलवाड़ चुपचाप नहीं देखेगा।
थाने में आवेदन सौंपते समय महामंत्री तरुण उपाध्याय और सचिव शैलेंद्र द्विवेदी ने भी फिल्म की पटकथा और प्रस्तुतिकरण पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि फिल्म के माध्यम से ब्राह्मणों को टारगेट करना और उन्हें भ्रष्ट या घूसखोर के रूप में चित्रित करना न केवल भ्रामक है, बल्कि सामाजिक समरसता को बिगाड़ने वाला कृत्य है। सनी कोसी और शैलेश दुबे सहित उपस्थित अन्य पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस फिल्म के प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाई जाए और धार्मिक भावनाओं को आहत करने की धाराओं के तहत दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए। उज्जैन की पावन धरा से शुरू हुआ यह विरोध अब प्रदेशव्यापी और राष्ट्रव्यापी स्वरूप लेने की ओर अग्रसर है, क्योंकि समाज के युवाओं में भी इस अपमानजनक चित्रण को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। पुलिस ने फिलहाल आवेदन स्वीकार कर मामले की जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन ब्राह्मण समाज के तेवरों से साफ है कि वे इस बार बिना ठोस कार्रवाई के पीछे हटने वाले नहीं हैं।










