महाकाल मार्ग पर मौत का तांडव टला, नगर निगम की लापरवाही से जमींदोज हुआ तीन मंजिला मकान

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भ्रष्टाचार और लापरवाही की नींव पर ढहा गेबी हनुमान क्षेत्र का आशियाना

उज्जैन के हृदय स्थल और महाकाल मंदिर जाने वाले अति व्यस्त गेबी हनुमान क्षेत्र में सोमवार की शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक तीन मंजिला मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। यह घटना नगर निगम की उस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है जो विकास के नाम पर जनता की जान को जोखिम में डाल रही है। गनीमत रही कि स्थानीय रहवासियों ने समय रहते खतरे को भांप लिया और रास्ते को बंद करवा दिया, अन्यथा इस प्रमुख मार्ग पर कोई बड़ी जनहानि हो सकती थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शाम करीब सात बजे जब यह मकान गिरा, तो पूरा इलाका धूल के गुबार में तब्दील हो गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-बदल भागने लगे।

पोकलेन की धमक और अनदेखी बनी बर्बादी का मुख्य कारण

मकान मालिक मनोज भावसार और अली अजगर सहित क्षेत्र के रहवासियों ने नगर निगम प्रशासन पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि मार्ग चौड़ीकरण के नाम पर जिस तरह से भारी-भरकम पोकलेन मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, उसकी धमक से आसपास के पुराने मकानों की बुनियाद हिल चुकी है। इतना ही नहीं, पिछले एक महीने से मकान की नींव में पानी भरने की लगातार शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन कुंभकर्णी नींद में सोए निगम अधिकारियों ने इस ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा। अधिकारियों की इसी हठधर्मिता और तकनीकी चूक के कारण आज एक परिवार का आशियाना मलबे में तब्दील हो गया और क्षेत्र में दहशत का माहौल व्याप्त है।

निगम की सफाई और कागजी दावों पर उठते गंभीर सवाल

हादसे के बाद हमेशा की तरह नगर निगम अपनी विफलताओं पर पर्दा डालता नजर आ रहा है। निगम प्रशासन का दावा है कि ढाबा रोड चौड़ीकरण के तहत जर्जर भवनों को सुरक्षा मानकों के साथ हटाया जा रहा था और यह पूरी कार्रवाई अधिकारियों की निगरानी में की गई। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि कार्रवाई सुरक्षा मानकों के साथ थी, तो मकान अचानक ढह कैसे गया? क्या अधिकारियों की निगरानी केवल कागजों तक ही सीमित थी? स्थानीय लोगों का आक्रोश इस बात पर है कि यदि वे खुद मुस्तैद होकर रास्ता बंद नहीं करवाते, तो मंदिर जाने वाले सैकड़ों श्रद्धालु इस मलबे के नीचे दबे होते, जिसका जवाब देने वाला कोई नहीं होता।

प्रमुख मार्ग पर सुरक्षा की कमी और बढ़ता जन आक्रोश

गेबी हनुमान से गोपाल मंदिर और शिप्रा नदी की ओर जाने वाला यह मार्ग उज्जैन का सबसे व्यस्ततम रास्ता है, जहाँ चौबीसों घंटे श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना उचित बैरिकेडिंग और बिना पड़ोसी मकानों को सुरक्षित किए तोड़फोड़ करना सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है। घटना के बाद पुलिस और निगम की टीमें मौके पर जरूर पहुँचीं, लेकिन जनता के मन में प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष है। लोग अब सवाल कर रहे हैं कि क्या विकास के नाम पर गरीबों के घर और श्रद्धालुओं की जान दांव पर लगाना ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है? प्रशासन को अब इस नुकसान की भरपाई और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी।
अधिकारियों की लापरवाही या विकास की बलि? देखिए कैसे गिरा तीन मंजिला मकान।