ग्वालियर। प्यार जब अंधा होता है, तो वह केवल चेहरे नहीं देखता, बल्कि उन झूठी कहानियों पर भी विश्वास कर लेता है जो उसे सुनहरे भविष्य का सपना दिखाती हैं। लेकिन ग्वालियर की 26 वर्षीय वैष्णवी उर्फ प्राची सिंह को क्या मालूम था कि जिस इंसान के लिए उसने अपने खून के रिश्तों से बगावत की, जिसे उसने अपना सर्वस्व मानकर मंदिर की दहलीज लांघी, वही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा कातिल साबित होगा। यह कहानी केवल एक प्रेम विवाह के टूटने की नहीं है, बल्कि एक मासूम भरोसे के कत्ल की है, जहाँ एक युवती ने हर कदम पर मिले धोखे से थककर आखिरकार मौत को गले लगा लिया।
प्राची और राजू उर्फ सत्यनारायण भदौरिया की पहली मुलाकात किसी फिल्मी दृश्य जैसी थी। ग्वालियर की सड़कों पर जब दोनों की स्कूटियां आमने-सामने आईं, तो शायद नियति ने प्राची के लिए एक खौफनाक जाल बुन दिया था। राजू ने खुद को देश की सेवा में लगा एक जांबाज फौजी बताया। वर्दी का रूतबा और सजी-धजी बातों के मायाजाल में प्राची इस कदर उलझी कि उसे 37 साल के राजू और अपनी उम्र का फासला भी नजर नहीं आया। उसने अपने माता-पिता के आंसुओं और परिवार के विरोध को दरकिनार कर दिया, क्योंकि उसे लगा था कि उसका ‘राजकुमार’ उसे दुनिया की हर खुशी देगा। उसने अपनों से लड़कर मंदिर में सात फेरे लिए और नोटरी पर भी अपनी रजामंदी की मुहर लगा दी, यह सोचकर कि अब उसकी दुनिया मुकम्मल है।
लेकिन शादी के बाद का हर दिन प्राची के लिए एक डरावना खुलासा लेकर आया। जिस पति को वह सरहद का रखवाला समझती थी, वह सेना से रिटायर हो चुका था। जिस घर में वह अपनी गृहस्थी बसाने के सपने देख रही थी, वहां उसे ले जाने के बजाय किराए के फ्लैट में रखा गया। धीरे-धीरे झूठ की परतें उधड़ने लगीं और प्राची के पैरों तले जमीन तब खिसक गई जब उसे पता चला कि राजू पहले से शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता भी है। एक लड़की जिसने अपने परिवार को छोड़ा, अपने समाज को छोड़ा, उसके पास अब लौटने का कोई रास्ता नहीं बचा था। जब उसने इस धोखे का विरोध किया, तो उसे प्यार के बदले मारपीट और प्रताड़ना मिली। हद तो तब हो गई जब पति की पहली पत्नी और उसके परिजनों ने भी प्राची को जानवरों की तरह पीटा और जान से मारने की धमकियां दीं।
दहेज की भूख और धोखे की आग ने प्राची को अंदर तक झुलसा दिया था। वह डिप्रेशन के उस अंधेरे मुहाने पर खड़ी थी जहाँ से उसे सिर्फ मौत ही राहत का जरिया नजर आई। 11 फरवरी की वह काली रात प्राची की जिंदगी की आखिरी रात साबित हुई। मरने से पहले उसने एक 11 सेकंड का वीडियो बनाया, जिसमें उसकी आंखों का दर्द और आवाज की थरथराहट यह चीख-चीख कर कह रही थी कि उसकी मौत का जिम्मेदार कोई और नहीं, बल्कि वही शख्स है जिसके लिए उसने पूरी दुनिया को छोड़ दिया था। उसने कांपते स्वर में कहा कि उसके पति और ससुराल वालों ने उसे इस हाल में पहुंचा दिया है कि अब उसके पास जीने की कोई वजह नहीं बची।
जब उसका भाई तेजस फ्लैट पर पहुँचा और पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ा गया, तो पंखे से लटकती प्राची की देह उस विश्वासघात की गवाह दे रही थी जो उसके साथ महीनों से हो रहा था। उसके गले में फंदा नहीं, बल्कि उन झूठे वादों की रस्सी थी जिसे राजू ने बड़ी बेरहमी से कसा था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, उनका आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि साजिश के तहत की गई हत्या है। ग्वालियर की इस बेटी ने एक साल के भीतर प्यार, शादी, धोखा और मौत का जो सफर तय किया, उसने पूरे शहर की रूह को कंपा दिया है। आज प्राची नहीं है, लेकिन उसका वह आखिरी वीडियो उन तमाम लड़कियों के लिए एक चेतावनी है जो झूठी वर्दी और बनावटी बातों के पीछे अपना सब कुछ न्योछावर कर देती हैं। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उस आखिरी वीडियो के आधार पर कार्रवाई की बात कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कानून प्राची के उन आंसुओं और उस टूटे हुए भरोसे का हिसाब कर पाएगा, जिसने एक हंसती-खेलती जिंदगी को हमेशा के लिए खामोश कर दिया?










